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दशपर्णी अर्क घर पर कैसे बनाएं: जैविक खेती के लिए अचूक कीटनाशक बनाने की विधि

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आज के समय में रासायनिक कीटनाशकों के लगातार इस्तेमाल से न केवल हमारे खेतों की मिट्टी खराब हो रही है, बल्कि खेती की लागत भी आसमान छू रही है। इसके अलावा, फसलों पर जहरीले रसायनों के छिड़काव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर जो बुरा असर पड़ रहा है, वह किसी से छिपा नहीं है। कई किसान भाई बाजार से महंगे कीटनाशक खरीदकर लाते हैं, फिर भी रस चूसक कीटों और इल्लियों पर पूरा नियंत्रण नहीं मिल पाता। इसका सीधा असर आपकी जेब और फसल के उत्पादन पर पड़ता है।

यदि आप भी रासायनिक दवाइयों के इस चक्रव्यूह और बढ़ते खर्च से परेशान हैं, तो दशपर्णी अर्क (Dashparni Ark) आपके लिए एक वरदान साबित हो सकता है। यह एक ऐसा पूरी तरह से प्राकृतिक और जैविक कीटनाशक है जिसे आप अपने घर या खेत पर आसानी से उपलब्ध 10 तरह की पत्तियों और कुछ देसी चीजों की मदद से मुफ्त या बेहद कम लागत में तैयार कर सकते हैं। इस विस्तृत लेख को पढ़ने के बाद, आप दशपर्णी अर्क बनाने का सही वैज्ञानिक तरीका, उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री और फसलों पर इसके इस्तेमाल की पूरी प्रक्रिया को अच्छी तरह समझ जाएंगे।

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दशपर्णी अर्क क्या है और यह कैसे काम करता है?

दशपर्णी अर्क मुख्य रूप से 10 अलग-अलग पौधों की पत्तियों, देसी गाय के गोमूत्र, गोबर और कुछ प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल व एंटी-फंगल चीजों के मिश्रण से तैयार किया जाने वाला एक शक्तिशाली जैविक कीटनाशक (Bio-Pesticide) है।

यह कीटों पर कैसे असर करता है?

जब हम इन विशिष्ट 10 पत्तियों को गोमूत्र और गोबर के साथ एक निश्चित अवधि के लिए सड़ने (फरमेंट होने) के लिए छोड़ देते हैं, तो पत्तियों में मौजूद कड़वे, कसैले और विषैले तत्व पूरी तरह से अर्क के रूप में बाहर निकल आते हैं।

दशपर्णी अर्क बनाने के लिए आवश्यक सामग्री (मात्रा के साथ)

एक आदर्श और प्रभावी 200 लीटर दशपर्णी अर्क का घोल तैयार करने के लिए आपको निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होगी। कृपया ध्यान दें कि पत्तियां ऐसी चुनें जिन्हें आमतौर पर गाय, भैंस या बकरियां नहीं खाती हैं, क्योंकि ऐसी पत्तियों में प्राकृतिक रूप से कीट-रोधी गुण सबसे ज्यादा होते हैं।

मुख्य सामग्रियां:

  1. देसी गाय का गोमूत्र: 10 से 12 लीटर
  2. देसी गाय का ताजा गोबर: 3 किलोग्राम
  3. पानी (साफ): लगभग 170-180 लीटर
  4. नीम की पत्तियां (टहनियों सहित): 5 किलोग्राम (यह सबसे मुख्य घटक है)

अन्य 9 पौधों की पत्तियां (प्रत्येक 2-2 किलोग्राम):

आपको नीचे दी गई सूची में से किन्हीं भी 9 पौधों की पत्तियां चुननी हैं:

तीखापन बढ़ाने वाले बूस्टर तत्व:

दशपर्णी अर्क बनाने की चरणबद्ध विधि (Step-by-Step Process)

दशपर्णी अर्क को तैयार होने में लगभग 30 से 45 दिन का समय लगता है। इसलिए खरीफ या रबी सीजन शुरू होने से एक महीना पहले ही इसे बनाने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।

[प्लास्टिक ड्रम (200L)] ➡️ [पानी + गोमूत्र + गोबर] ➡️ [कुचली हुई 10 पत्तियां] ➡️ [लहसुन/मिर्च पेस्ट] ➡️ [30-45 दिन फरमेंटेशन] ➡️ [छानकर तैयार अर्क]

चरण 1: ड्रम और बुनियादी मिश्रण की तैयारी

सबसे पहले एक 200 लीटर का प्लास्टिक का ड्रम लें (लोहे या टिन के ड्रम का उपयोग बिल्कुल न करें)। इस ड्रम में 170 लीटर साफ पानी भरें। अब इसमें 10 लीटर देसी गाय का गोमूत्र और 3 किलो ताजा गोबर डालकर एक लकड़ी के डंडे की मदद से अच्छी तरह मिला लें।

चरण 2: पत्तियों को कुचलना और डालना

नीम की 5 किलो पत्तियों और बाकी चुनी हुई 9 प्रकार की पत्तियों (2-2 किलो प्रत्येक) को किसी भारी वस्तु या ओखली से हल्का सा कुचल (Crush) लें। पत्तियों को साबुत डालने की बजाय कुचलकर डालने से उनके औषधीय गुण पानी में जल्दी और पूरी तरह से घुल जाते हैं। इन सभी पत्तियों को ड्रम में डाल दें।

चरण 3: बूस्टर सामग्री मिलाना

अब हरी मिर्च, लहसुन और अदरक के तैयार किए गए पेस्ट को भी इस मिश्रण में डाल दें। पूरे मिश्रण को लकड़ी के डंडे की मदद से घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) में अच्छी तरह से हिलाएं।

चरण 4: ड्रम को ढकना और फरमेंटेशन

ड्रम के मुंह को किसी जूट के बोरे (टाट की बोरी) या सूती कपड़े से अच्छी तरह बांध दें ताकि उसमें सीधे धूप न पड़े, लेकिन हवा का थोड़ा आवागमन बना रहे। ड्रम को हमेशा किसी छायादार स्थान या पेड़ के नीचे रखें।

चरण 5: दैनिक रखरखाव

अगले 30 दिनों तक रोजाना सुबह और शाम को इस मिश्रण को लकड़ी के डंडे की मदद से 2 से 3 मिनट के लिए क्लॉकवाइज घुमाना अनिवार्य है। ऐसा करने से पत्तियों का अर्क अच्छे से निकलता है और फंगस नहीं लगती। 30 से 45 दिनों में यह अर्क पूरी तरह गाढ़ा और तीखी गंध वाला हो जाता है। इसके बाद इसे महीन सूती कपड़े से छानकर प्लास्टिक की कैनों में भरकर रख लें।

फसल, कीट प्रबंधन और विभिन्न राज्यों के अनुभव

विभिन्न राज्यों में दशपर्णी अर्क का उपयोग अलग-अलग फसलों पर सफलतापूर्वक किया जा रहा है। आइए कुछ जमीनी दृश्यों और उदाहरणों से इसे समझते हैं:

मापदंड / घटकविवरण और मात्रा (प्रति 200 लीटर घोल)
तैयारी का समय30 से 45 दिन (मौसम के अनुसार)
भंडारण अवधिछानने के बाद 6 महीने तक सुरक्षित
प्रति एकड़ खुराक5 से 6 लीटर अर्क + 150 लीटर पानी
लक्षित कीटइल्ली, सफेद मक्खी, थ्रिप्स, चेपा, हरा मच्छर

विभिन्न राज्यों के जमीनी उदाहरण और अनुभव:

  • मध्य प्रदेश का अनुभव (सोयाबीन फसल): मालवा क्षेत्र के किसानों ने देखा है कि जब वे खरीफ सीजन में सोयाबीन की फसल पर फूल आने से पहले दशपर्णी अर्क का पहला छिड़काव करते हैं, तोसोयाबीन में फूल झड़ने की समस्याकाफी हद तक कम हो जाती है क्योंकि रस चूसक कीटों का हमला ही नहीं हो पाता।
  • पंजाब का अनुभव (धान की फसल): पंजाब के संगरूर जिले के जैविक किसानों के अनुसार, बासमती धान मेंधान का तना छेदक कीटके शुरुआती लक्षणों के दौरान यदि 6 लीटर दशपर्णी अर्क का प्रति एकड़ छिड़काव किया जाए, तो रासायनिक कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती।
  • खेत का सीधा अवलोकन (Field Observation): लगातार दो साल तक दशपर्णी अर्क का इस्तेमाल करने वाले खेतों की मिट्टी में केंचुओं की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि रासायनिक दवाओं वाले खेतों में केंचुए सतह पर दिखाई नहीं देते।

किसान भाइयों द्वारा की जाने वाली आम गलतियां

अक्सर कुछ किसान भाई शिकायत करते हैं कि जैविक कीटनाशक ने पूरा काम नहीं किया। मेरे अनुभव में, इसके पीछे नीचे दी गई कुछ आम गलतियां होती हैं:

फसलों पर छिड़काव की सही विधि और मात्रा

दशपर्णी अर्क का पूरा लाभ तभी मिलता है जब उसका सही अनुपात में इस्तेमाल किया जाए:

दशपर्णी अर्क के फायदे और नुकसान

फायदे:

सीमाएं / नुकसान:

एक्सपर्ट सलाह (SmartKisan Expert Tip)

विशेषज्ञ की राय: यदि आप अपनी फसलों में और भी बेहतर परिणाम चाहते हैं, तो दशपर्णी अर्क के घोल में छिड़काव करते समय प्रति पंप 20-30 ग्राम वाशिंग पाउडर या कोई भी लिक्विड सोप/स्टीकर (Silicon Sticker) जरूर मिला लें। चूंकि जैविक अर्क का अपना कोई चिपचिपा आधार नहीं होता, इसलिए स्टीकर मिलाने से यह पत्तियों पर लंबे समय तक चिपका रहता है, जिससे बारिश होने पर भी दवा धुलती नहीं है और कीटों पर इसका असर दोगुना हो जाता है।

साथ ही, बीज बोने से पहले धान का बीज उपचार कैसे करें या सोयाबीन बीज उपचार करने की विधि को अपनाकर आप फसल को शुरुआती बीमारियों से बचा सकते हैं, जिससे बाद में कीटों का प्रकोप स्वतः ही कम हो जाता है।

निष्कर्ष (Decision Based Conclusion)

किसान भाइयों, दशपर्णी अर्क का उपयोग आपको अपनी विशिष्ट परिस्थिति के अनुसार करना चाहिए:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या दशपर्णी अर्क को रासायनिक खादों या दवाइयों के साथ मिलाकर छिड़का जा सकता है?

उत्तर: बिल्कुल नहीं। दशपर्णी अर्क एक पूरी तरह से जैविक मिश्रण है। इसे किसी भी रासायनिक कीटनाशक, कवकनाशी या यूरिया जैसी खादों के साथ मिलाकर स्प्रे नहीं करना चाहिए, अन्यथा इसके जैविक गुण नष्ट हो जाएंगे।

प्रश्न 2: छना हुआ दशपर्णी अर्क कितने दिनों तक खराब नहीं होता और इसे कैसे रखें?

उत्तर: सूती कपड़े से अच्छी तरह छानने के बाद आप इस अर्क को किसी ठंडी और छायादार जगह पर प्लास्टिक की कैन में बंद करके 6 महीने तक सुरक्षित रख सकते हैं।

प्रश्न 3: क्या हम दशपर्णी अर्क में 10 से कम प्रकार की पत्तियों का उपयोग कर सकते हैं?

उत्तर: यदि आपको किन्हीं कारणों से 10 पत्तियां नहीं मिल पा रही हैं, तो आप 7 या 8 तरह की पत्तियों से भी इसे बना सकते हैं। हालांकि, नीम, आक और धतूरा को जरूर शामिल करें क्योंकि मुख्य कीटनाशक गुण इन्हीं में होते हैं।

प्रश्न 4: क्या दशपर्णी अर्क फसलों के लिए टॉनिक का काम भी करता है?

उत्तर: हां, क्योंकि इसमें देसी गाय का गोमूत्र और गोबर मिला होता है, जिसमें नाइट्रोजन, पोटाश और कई सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं। यह कीटों को मारने के साथ-साथ पौधों में हरापन और वृद्धि भी लाता है।

प्रश्न 5: क्या इसका छिड़काव हर तरह की फसल जैसे फल, सब्जी और अनाज पर किया जा सकता है?

उत्तर: हां, दशपर्णी अर्क पूरी तरह से सुरक्षित है। आप इसका उपयोग कपास, धान, सोयाबीन, गेहूं जैसी अनाज फसलों के साथ-साथ मिर्च, टमाटर, बैंगन और आम, अमरूद जैसे फलदार पौधों पर भी बेझिझक कर सकते हैं।

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