धान की खेती में बंपर पैदावार सीधे तौर पर इस बात पर निर्भर करती है कि पौधे में कितने कल्ले (Tillers) निकले हैं। जितने ज्यादा कल्ले होंगे, उतनी ही ज्यादा बालियां आएंगी और पैदावार भी उसी अनुपात में बढ़ेगी। धान रोपाई के बाद एक समय ऐसा आता है जब पौधे को अपने विकास के लिए सबसे ज्यादा पोषण की जरूरत होती है। यही वह समय है जब धान का दूसरा खाद (Second Top Dressing) डाला जाता है।
अगर आप भी धान की खेती कर रहे हैं और चाहते हैं कि आपके खेत में हर पौधे से 20-30 कल्ले निकलें, तो यह ब्लॉग पोस्ट आपके लिए है। आइए जानते हैं कि धान में दूसरी खाद कब, कितनी और कैसे डालनी चाहिए।
धान में दूसरा खाद कब डालें? (सही समय)
खाद का पूरा फायदा तभी मिलता है जब उसे सही समय पर दिया जाए। धान में दूसरी यूरिया या खाद डालने का सबसे सही समय रोपाई के 25 से 35 दिन के बीच का होता है।
यह वह अवस्था है जब धान का पौधा अपनी वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative Growth) कर रहा होता है और नए कल्ले फूटने शुरू हो जाते हैं। अगर इस समय पौधे को सही मात्रा में नाइट्रोजन, जिंक और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व मिल जाएं, तो कल्ले तेजी से निकलते हैं और फसल एकदम हरी-भरी हो जाती है।
नोट: अगर आप सीधी बिजाई (DSR) वाले धान की खेती कर रहे हैं, तो बुवाई के लगभग 35-40 दिन बाद यह खाद दी जानी चाहिए।
धान का दूसरा खाद कब और क्या डालें? सही तरीका समझें
धान की रोपाई के बाद पौधे हरे दिखाई देना ही अच्छी पैदावार की गारंटी नहीं है। असली उत्पादन इस बात पर निर्भर करता है कि पौधों में कितने स्वस्थ और उत्पादक कल्ले निकलते हैं।
कल्ले निकलने की अवस्था में दिया गया धान का दूसरा खाद फसल की आगे की बढ़वार पर बड़ा असर डालता है। लेकिन हर खेत में यूरिया, डीएपी, पोटाश और जिंक एक साथ डाल देना सही तरीका नहीं है।
दूसरी खाद तय करने से पहले यह जानना जरूरी है कि पहली खाद कब और कितनी दी गई थी, धान की किस्म कौन-सी है, मिट्टी में नमी कितनी है और फसल का रंग तथा बढ़वार कैसी है।
धान की दूसरी खाद से क्या फायदा होता है?
धान की दूसरी खाद मुख्य रूप से सक्रिय कल्ले निकलने की अवस्था में पौधों को पोषण उपलब्ध कराने के लिए दी जाती है।
सही समय और संतुलित मात्रा में खाद देने से:
- नए कल्लों का विकास बेहतर होता है।
- पौधों की पत्तियां सक्रिय और स्वस्थ रहती हैं।
- जड़ों की बढ़वार बनी रहती है।
- आगे बनने वाली बालियों की संभावित संख्या बढ़ती है।
- पौधे भोजन बनाने के लिए पर्याप्त हरा क्षेत्र विकसित करते हैं।
- कमजोर और पीली फसल को पोषण की कमी से उबरने में मदद मिलती है।
लेकिन जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने पर पौधे केवल गहरे हरे और मुलायम हो सकते हैं। इससे गिरने, कीट तथा रोग बढ़ने और बाली बनने में देरी का खतरा बढ़ सकता है।
“दूसरी खाद” का सही अर्थ क्या है?
किसानों के बीच दूसरी खाद शब्द का अलग-अलग अर्थ लिया जाता है। इसलिए केवल दिन देखकर खाद डालने से गलती हो सकती है।
| पहले दिया गया खाद | अब कौन-सी अवस्था दूसरी खाद मानी जाएगी? |
|---|---|
| खेत तैयार करते समय बेसल खाद दी थी | सक्रिय कल्ले निकलने की अवस्था वाली खाद |
| रोपाई के 10–15 दिन बाद पहली खाद दी थी | अगली खाद अधिकतम कल्ले या बाली आरंभ अवस्था में हो सकती है |
| बेसल खाद नहीं दी थी | पोषक तत्वों की पूरी स्थिति देखकर अलग योजना बनानी होगी |
| पहली बार केवल यूरिया दिया था | पोटाश और अन्य तत्व मिट्टी जांच तथा पहली खाद के अनुसार तय होंगे |
| पहली खाद में DAP, यूरिया और पोटाश दिया था | दूसरी बार वही मिश्रण दोहराना जरूरी नहीं है |
इसलिए “रोपाई के बाद दूसरा खाद” और “फसल की दूसरी पोषण किस्त” हमेशा एक ही बात नहीं होती।
धान में दूसरी खाद कब डालें?
सामान्य रोपित धान में दूसरी पोषण किस्त सक्रिय कल्ले निकलने की अवस्था के आसपास दी जाती है। कई खेतों में यह अवस्था रोपाई के लगभग 20 से 30 दिन बाद आ सकती है, लेकिन किस्म, पौध की उम्र, तापमान और रोपाई के झटके के कारण समय बदल सकता है।
केवल कैलेंडर देखने के बजाय ये संकेत देखें:
- पौधे रोपाई के झटके से उबर चुके हों।
- मुख्य पौधे के पास नए कल्ले निकलने लगे हों।
- जड़ें खेत में अच्छी तरह जम गई हों।
- फसल सक्रिय रूप से बढ़ रही हो।
- खेत में खरपतवार का अधिक दबाव न हो।
- पौधों में गंभीर कीट या रोग न हो।
कृषि अनुशंसाओं में नाइट्रोजन और पोटाश को बेसल, सक्रिय कल्ले, बाली आरंभ तथा आवश्यकता के अनुसार आगे की अवस्था में विभाजित करके देने की सलाह दी जाती है। सक्रिय कल्ले और बाली आरंभ दोनों पोषण की महत्वपूर्ण अवस्थाएं हैं।
कल्ले बढ़ाने का अचूक फॉर्मूला (प्रति एकड़ खाद की मात्रा)
धान की दूसरी खाद में सिर्फ यूरिया डालना काफी नहीं है। मिट्टी की कमी और फसल की जरूरत को देखते हुए आपको एक संतुलित मिश्रण तैयार करना चाहिए:
| खाद / उर्वरक का नाम | मात्रा (प्रति एकड़) | इसका क्या काम है? |
| यूरिया (Urea) | 35 – 40 किलो | नाइट्रोजन की पूर्ति करता है, फसल को हरा-भरा और तेजी से बढ़ने में मदद करता है। |
| जिंक सल्फेट (33%) | 4 – 5 किलो | जिंक की कमी दूर करता है, पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। |
| ह्यूमिक एसिड (98%) | 500 ग्राम | सफेद जड़ों का विकास करता है जिससे पौधा मिट्टी से ज्यादा पोषण खींच पाता है। |
| कीटनाशक (वैकल्पिक) | आवश्यकतानुसार | अगर पत्ता लपेट (Leaf Folder) या तना छेदक का प्रकोप हो, तो फिप्रोनिल या कार्टैप हाइड्रोक्लोराइड मिला सकते हैं। |
अगर आपने पहली खाद में जिंक डाल दिया था, तो दूसरी खाद में आप जिंक की जगह सल्फर (80% WDG) 3 किलो प्रति एकड़ इस्तेमाल कर सकते हैं। यह फंगीसाइड का काम भी करता है और मिट्टी को भुरभुरा बनाता है। जिंक और सल्फर का एक साथ इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
खाद डालते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
कई बार किसान महंगी खाद डालते हैं लेकिन फिर भी मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलता। ऐसा अक्सर गलत तरीके से खाद डालने के कारण होता है। दूसरा खाद देते समय इन नियमों का पालन करें:
- पानी का सही स्तर (Water Management): कल्ले फूटने की अवस्था (Tillering Stage) के दौरान खेत में पानी का स्तर 5 सेंटीमीटर (लगभग 2 इंच) से ज्यादा नहीं होना चाहिए। बहुत ज्यादा पानी भरा होने से कल्ले कम निकलते हैं।
- शाम के समय छिड़काव: खाद का छिड़काव हमेशा दोपहर के बाद या शाम के समय करें जब पत्तों पर ओस न हो। पत्तों पर यूरिया चिपकने से पत्ते जल सकते हैं।
- खेत को सुखाना: खाद डालने के बाद जब कल्ले पूरी तरह निकल आएं (लगभग रोपाई के 40-45 दिन बाद), तो एक हफ्ते के लिए खेत से पानी निकाल कर उसे हल्का सूखने दें। इससे जड़ों को हवा मिलती है और ज्यादा मजबूत कल्ले बनते हैं।
निष्कर्ष
धान की फसल में दूसरी खाद एक टर्निंग पॉइंट होती है। अगर आप यूरिया के साथ जिंक और ह्यूमिक एसिड का सही मिश्रण सही समय (25-35 दिन) पर दे देते हैं, तो फसल का विकास बहुत तेजी से होता है। बस ध्यान रखें कि खेत में पानी बहुत ज्यादा न भरा हो। सही पोषण और सही देखभाल ही बंपर पैदावार की कुंजी है।

