किसानों के लिए धान का सीजन सबसे महत्वपूर्ण होता है। कई बार बारिश में देरी, मौसम के बदलाव या मजदूरों की कमी के कारण धान की रोपाई लेट हो जाती है।
जब नर्सरी 30-35 दिन से पुरानी हो जाती है, तो पैदावार पर असर पड़ने का डर रहता है। लेकिन घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अगर आप कुछ स्मार्ट और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, तो पछेती रोपाई के बावजूद आप बंपर उत्पादन ले सकते हैं।
1. पौधों की संख्या और रोपाई की दूरी में बदलाव करें
समय पर रोपाई करते समय हम एक जगह पर 2 से 3 पौधे लगाते हैं। लेकिन लेट होने पर यह तरीका उतना कारगर नहीं होता।
- ज्यादा पौधे लगाएं: अगर नर्सरी पुरानी हो गई है, तो एक जगह (हिल) पर 4 से 5 पौधे रोपें। इससे खेत में कल्लों (Tillers) की कमी पूरी हो जाएगी और धान में कल्लों का फुटाव तेजी से होगा।
- दूरी कम करें: पौधों से पौधों की दूरी और लाइन से लाइन की दूरी सामान्य से थोड़ी कम कर दें, ताकि खेत में पर्याप्त पौधे मौजूद रहें।
2. खेत की तैयारी (Puddling) और सही रोपाई विधि
लेट रोपाई में पौधों की जड़ों का जल्दी विकास होना बहुत जरूरी है, इसलिए खेत की तैयारी में कोई कमी न छोड़ें।
- मचाई (Puddling): खेत में अच्छी तरह से पानी भरकर मचाई (Puddling) करें। मिट्टी एकदम मुलायम और कीचड़युक्त होनी चाहिए, जिससे पुरानी नर्सरी की जड़ें भी नई मिट्टी को जल्दी पकड़ लें।
- SRI विधि से बचें: ध्यान रहे, SRI विधि (श्री विधि) में 12-14 दिन के छोटे पौधों की जरूरत होती है। रोपाई लेट होने पर पारंपरिक मचाई विधि ही अपनाएं।
3. उर्वरक (खाद) का सटीक प्रबंधन
देर से रोपाई करने पर पौधों को शुरुआत से ही तेजी से बढ़ने के लिए एक्स्ट्रा एनर्जी चाहिए।
- नाइट्रोजन (यूरिया): रोपाई के समय यूरिया (नाइट्रोजन) की थोड़ी अधिक मात्रा का इस्तेमाल करें ताकि पौधे जल्दी ग्रोथ कर सकें। यह सुनिश्चित करने के लिए धान की रोपाई से पहले खाद का सही डोज जानना बहुत जरूरी है।
- जैविक विकल्प: अगर आप जैविक खेती पर ध्यान देते हैं, तो खेत तैयार करते समय जीवामृत (Jeevamrut) का उपयोग करें। यह मिट्टी में सूक्ष्म जीवों को बढ़ाकर जड़ों को तुरंत मजबूती देता है।
- जिंक सल्फेट का प्रयोग: धान में जिंक की कमी बिल्कुल न होने दें। 25 किलो जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में जरूर डालें। यदि आपको अपनी फसल में पीलापन या अन्य समस्या दिखे, तो धान में जिंक की कमी के लक्षण और उपाय के बारे में जरूर पढ़ें।
4. पुरानी नर्सरी (जैसे PB1 बासमती) के लिए खास टिप्स
अगर आपने लंबी अवधि वाली किस्में (जैसे PB1 बासमती) लगा रखी हैं और नर्सरी 40 दिन के करीब पहुंच गई है, तो रोपाई करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।
- पौधों को खेत से उखाड़ते समय जड़ों को टूटने से बचाएं।
- रोपाई से पहले धान की जड़ों को फफूंदनाशक या वेस्ट डीकंपोजर (Waste Decomposer) के घोल में डुबोकर उपचारित जरूर करें। जैसे हम शुरुआत में बीमारियों से बचाव के लिए धान का बीज उपचार करते हैं, वैसे ही पछेती रोपाई में जड़ों का उपचार भी बेहद लाभकारी होता है।
5. खरपतवार नियंत्रण पर तुरंत ध्यान दें
लेट रोपाई में फसल को सेट होने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है, लेकिन खरपतवार (घास) तेजी से उगते हैं।
- रोपाई के 2 से 3 दिन के अंदर ही अच्छी क्वालिटी का खरपतवारनाशक इस्तेमाल करें। धान में खरपतवार नियंत्रण सही समय पर न करने से फसल की बढ़वार रुक सकती है और पैदावार में भारी नुकसान हो सकता है।
- खेत में शुरुआती दिनों में पानी का स्तर सही बनाए रखें। पानी भरे रहने से खरपतवार के बीज पनप नहीं पाते।
निष्कर्ष
धान की रोपाई का लेट होना कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसका समाधान न हो। खेत में पौधों की संख्या बढ़ाने, सही तरीके से मचाई करने और उर्वरकों के सटीक उपयोग से आपकी फसल एकदम स्वस्थ रहेगी और पैदावार में कोई कमी नहीं आएगी।
FAQs: धान की लेट रोपाई से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1: धान की रोपाई के लिए नर्सरी की सही उम्र क्या होती है?
सामान्यतः 21 से 25 दिन की नर्सरी रोपाई के लिए सबसे बेहतरीन मानी जाती है।
Q2: अगर नर्सरी 35 दिन की हो जाए तो क्या करें?
नर्सरी 35 दिन या उससे अधिक की हो जाने पर एक जगह पर 2-3 की बजाय 4-5 पौधे रोपें और पौधों की आपसी दूरी कम कर दें।
Q3: लेट रोपाई में कौन सी खाद ज्यादा डालनी चाहिए?
शुरुआती विकास को तेज करने के लिए रोपाई के बेस में नाइट्रोजन (यूरिया) की मात्रा हल्की सी बढ़ा देनी चाहिए। साथ ही जड़ों के विकास के लिए जिंक और जीवामृत का इस्तेमाल फायदेमंद रहता है।
Q4: क्या रोपाई लेट होने पर SRI (श्री विधि) से खेती कर सकते हैं?
नहीं, SRI विधि के लिए 12-14 दिन के बहुत छोटे पौधों की आवश्यकता होती है। इसलिए रोपाई लेट होने पर यह विधि बिल्कुल कारगर नहीं है।

