क्या आपकी धान की रोपाई होने वाली है और मन में यही सवाल घूम रहा है कि धान रोपाई से पहले कौन सा खाद डालें, ताकि पौधा जल्दी पकड़े, जड़ मजबूत बने और बाद में पीलापन या फुटाव की कमी न आए?
धान में असली खेल रोपाई के बाद नहीं, बल्कि रोपाई से पहले खेत की तैयारी और बेसल खाद से शुरू होता है। अगर इस समय खाद गलत डाल दी, ज्यादा डाल दी, या जरूरी खाद छोड़ दी, तो पौधा खेत में लगने के बाद 10–15 दिन तक सुस्त पड़ा रहता है। किसान को लगता है कि बीज या नर्सरी खराब थी, लेकिन कई बार असली गलती खाद और मिट्टी की तैयारी में होती है।
धान में रोपाई से पहले मुख्य रूप से गोबर खाद/कम्पोस्ट, DAP या SSP, MOP यानी पोटाश, जिंक सल्फेट और जरूरत के हिसाब से थोड़ी यूरिया दी जाती है। लेकिन कौन-सी खाद कितनी डालनी है, यह मिट्टी, किस्म, पानी की उपलब्धता और आपके खेत के पिछले अनुभव पर निर्भर करता है।
सबसे सही तरीका है soil test (मिट्टी जांच) के आधार पर खाद देना। फिर भी अगर soil test नहीं है, तो किसान भाई एक safe general formula अपनाकर अच्छी शुरुआत कर सकते हैं। TNAU की rice nutrient management सलाह में भी मिट्टी जांच के आधार पर खाद देने, पूरी phosphorus को basal में मिलाने और nitrogen/potash को split में देने की बात कही गई है।
धान रोपाई से पहले कौन सा खाद डालें? सबसे आसान जवाब
अगर आप जल्दी में हैं और सीधा जवाब चाहते हैं, तो धान की रोपाई से पहले ये खादें सबसे जरूरी मानी जाती हैं:
- सड़ी हुई गोबर खाद या कम्पोस्ट
- DAP (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) या SSP (सिंगल सुपर फॉस्फेट)
- MOP / पोटाश (म्यूरिएट ऑफ पोटाश)
- जिंक सल्फेट
- जरूरत के हिसाब से थोड़ी यूरिया
- हरी खाद या ढैंचा (अगर उपलब्ध हो)
धान में phosphorus यानी फास्फोरस का काम जड़ बनाना है। इसलिए इसे रोपाई से पहले मिट्टी में मिलाना ज्यादा अच्छा रहता है। पोटाश पौधे को मजबूत बनाता है, तना मजबूत करता है और रोग-सहनशीलता में मदद करता है।
जरूरी बात: नाइट्रोजन यानी यूरिया को पूरा एक साथ नहीं डालना चाहिए। धान में यूरिया को आम तौर पर हिस्सों (splits) में देना बेहतर रहता है, क्योंकि पानी भरे खेत में nitrogen loss हो सकता है। TNAU के अनुसार धान में nitrogen और potassium को कई हिस्सों में देने की सलाह दी जाती है, जबकि phosphorus को basal में शामिल किया जा सकता है।
रोपाई से पहले खाद क्यों जरूरी है?
धान की रोपाई के बाद पौधे को सबसे पहले नई जड़ें बनानी होती हैं। नर्सरी से पौधा उखड़कर जब मुख्य खेत में जाता है, तो उसे transplanting shock (रोपाई का झटका) लगता है। अगर मिट्टी में पहले से पोषण तैयार है, तो पौधा जल्दी संभलता है।
रोपाई के पहले 7–15 दिन धान के लिए बहुत खास होते हैं। इसी समय पौधा खेत में जमता है, नई सफेद जड़ें बनाता है और धीरे-धीरे फुटाव की तैयारी करता है। अगर इस समय खेत में phosphorus और zinc की कमी हुई, तो पौधा पीला, छोटा और कमजोर दिख सकता है।
कई किसान रोपाई के बाद ही यूरिया डालकर पौधे को हरा करने की कोशिश करते हैं। पौधा हरा तो दिख सकता है, लेकिन अगर जड़ कमजोर है तो आगे चलकर फुटाव कम, तना कमजोर और उत्पादन घट सकता है।
इसलिए रोपाई से पहले खाद का असली उद्देश्य है:
- जड़ मजबूत करना और पौधे को जल्दी स्थापित (establish) कराना
- फुटाव (tillering) की मजबूत नींव तैयार करना
- जिंक और फास्फोरस की कमी (जैसे खैरा रोग) को रोकना
- मिट्टी में microbial activity (सूक्ष्मजीवों की सक्रियता) बढ़ाना
- धान को शुरुआती झटके या stress से बचाना
धान में बेसल डोज क्या होता है?
धान में जो खाद रोपाई से पहले या रोपाई के समय खेत में मिलाई जाती है, उसे आम भाषा में बेसल डोज (Basal Dose) कहते हैं। यह फसल की नींव (foundation) होती है।
बेसल डोज में ऐसी खादें दी जाती हैं जो मिट्टी में रहकर धीरे-धीरे काम करती हैं या जड़ के पास उपलब्ध रहनी चाहिए। DAP, SSP, पोटाश, जिंक और जैविक खादें इसी श्रेणी में आते हैं।
NFSM (National Food Security Mission) के package में rice के लिए सामान्य NPK recommendation lowland/hilly region में 100:60:60 kg/ha N:P:K और hybrid rice में 120–150 kg N + 60 kg P2O5 + 60 kg K2O/ha बताई गई है। इसे प्रति एकड़ में बदलकर और soil test के हिसाब से adjust करना चाहिए।
एक बात गांठ बांध लें: यह पूरे सीजन की कुल मात्रा है, पूरी खाद रोपाई से पहले नहीं डालनी है। खासकर यूरिया कभी भी पूरा basal में नहीं डालना चाहिए।
धान रोपाई से पहले खाद की General Dose (प्रति एकड़)
नीचे दी गई तालिका एक व्यावहारिक सामान्य गाइड है। इसे आप अपने soil test या स्थानीय कृषि विभाग के अनुसार बदल सकते हैं:
| खाद / पोषक तत्व | सामान्य Dose (प्रति एकड़) | कब डालें | मुख्य फायदा |
|---|---|---|---|
| सड़ी गोबर खाद / कम्पोस्ट | 2–3 टन | आखिरी जुताई/मचाई से पहले | मिट्टी मुलायम, जड़ अच्छी, न्यूट्रिएंट होल्डिंग बढ़ाना |
| DAP | 40–55 kg | रोपाई से पहले मिट्टी में मिलाएं | जड़ विकास, शुरुआती growth |
| SSP | 100–150 kg | DAP की जगह (सल्फर की पूर्ति के लिए) | फास्फोरस + सल्फर और कैल्शियम की उपलब्धता |
| MOP / पोटाश | 15–25 kg | बेसल डोज में (बाकी हिस्सा बाद में) | तना मजबूत करना, रोग सहनशीलता बढ़ाना |
| जिंक सल्फेट | 8–10 kg | रोपाई से पहले बालू/मिट्टी में मिलाकर | पीलापन और खैरा रोग रोकने में मदद |
| यूरिया | 10–20 kg तक | जरूरत हो तो ही हल्का बेसल | शुरुआती हरियाली देना (ज्यादा बिल्कुल नहीं) |
DAP डालें या SSP? धान में कौन बेहतर है?
धान रोपाई से पहले DAP और SSP दोनों का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन दोनों का काम और स्थिति अलग है:
- DAP (डाई-अमोनियम फॉस्फेट): इसमें नाइट्रोजन और फॉस्फोरस दोनों होते हैं। इसलिए किसान इसे ज्यादा पसंद करते हैं। DAP डालने से जड़ के पास तुरंत फॉस्फोरस मिलता है और पौधा जल्दी जम जाता है। लेकिन DAP में सल्फर नहीं होता।
- SSP (सिंगल सुपर फॉस्फेट): इसमें फॉस्फोरस के साथ-साथ सल्फर और कैल्शियम भी मिलता है। जिन खेतों में सल्फर की कमी है, वहाँ SSP बहुत बेहतरीन विकल्प साबित होता है। खासकर हल्की जमीन, लगातार रासायनिक खेती वाले खेत और कम जैविक कार्बन वाली मिट्टी में इसका बढ़िया फायदा दिखता है।
नियम: अगर आप DAP डाल रहे हैं, तो पोटाश और जिंक अलग से देना होगा। यदि आप SSP डाल रहे हैं, तो नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए बेसल में थोड़ी यूरिया अलग से मिलानी होगी।
आसान किसान फॉर्मूला (Simple Farmer Formula)
- नॉर्मल धान के लिए (बिना मिट्टी जांच): DAP 40–50 kg + MOP 15–20 kg + जिंक सल्फेट 8–10 kg प्रति एकड़।
- सल्फर की कमी वाली जमीन के लिए: SSP 100–150 kg + थोड़ी यूरिया + MOP + जिंक सल्फेट।
- हाइब्रिड धान के लिए: अधिक पैदावार के लिए स्थानीय कृषि वैज्ञानिक की सलाह पर डोज थोड़ी बढ़ाई जा सकती है।
धान रोपाई से पहले जिंक सल्फेट क्यों जरूरी है?
धान में जिंक (Zinc) की कमी होना बहुत आम बात है। किसान भाई इसे कई बार “धान पीला पड़ गया”, “पौधा बैठ गया”, “जड़ नहीं पकड़ रही” या “खैरा रोग” के नाम से जानते हैं।
जिंक की कमी होने पर पौधा छोटा रह जाता है, पत्तियों पर कत्थई-भूरे या पीले दाग आने लगते हैं और पूरे खेत में ऊँचा-नीचा (uneven) बढ़ाव दिखता है। कई बार किसान भाई यूरिया डालते रहते हैं पर सुधार नहीं आता, क्योंकि असली कमी नाइट्रोजन की नहीं, जिंक की होती है।
TNAU की सलाह के अनुसार, जिंक सल्फेट को 25 kg/ha तक बालू (sand) के साथ मिलाकर रोपाई से पहले डालना चाहिए, जो प्रति एकड़ लगभग 10 kg जिंक सल्फेट बैठता है।
जिंक डालने का सही तरीका (Step-by-Step)
जिंक सल्फेट को कभी भी अकेले हाथ से नहीं छिड़कना चाहिए, नहीं तो यह कहीं ज्यादा और कहीं कम गिरता है। इसे ऐसे डालें:
- प्रति एकड़ 8–10 kg जिंक सल्फेट नापकर अलग रखें।
- इसे 20–25 kg सूखी रेत या भुरभुरी मिट्टी में अच्छी तरह मिला लें।
- खेत में आखिरी मचाई (puddling) से पहले या पानी कम करके पूरे खेत में समान रूप से बिखेर दें।
- हल्की मचाई चलाकर इसे मिट्टी में मिक्स कर दें।
सावधानी: जिंक सल्फेट को DAP के साथ बहुत दिनों पहले मिलाकर बोरी में बंद करके कभी न रखें। खेत में छिड़कने से ठीक पहले ही इन्हें आपस में मिलाएं (या अलग-अलग डालें) तो बेहतर रिएक्शन मिलता है।
रोपाई से पहले यूरिया डालनी चाहिए या नहीं?
यह सवाल लगभग हर किसान पूछता है। इसका सीधा जवाब है: थोड़ी यूरिया जरूरत के हिसाब से डाल सकते हैं, लेकिन पूरी डोज कभी नहीं!
धान को नाइट्रोजन की बहुत ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन नाइट्रोजन पानी भरे खेत में बहुत जल्दी हवा में उड़ जाता है या नीचे बह जाता है (Leaching loss)। अगर आप रोपाई से पहले ही भारी मात्रा में यूरिया डाल देंगे, तो उसका बड़ा हिस्सा पौधे के काम आने से पहले ही बर्बाद हो जाएगा। अधिक यूरिया से पौधा ऊपर से बहुत नरम हो जाता है, जिससे उसमें कीट और बीमारियों का हमला बढ़ जाता है।
सही तरीका (Practical Approach)
- रोपाई के समय बेसल डोज में 10–20 kg यूरिया प्रति एकड़ से ज्यादा बिल्कुल न डालें।
- ध्यान रखें कि अगर आप DAP डाल रहे हैं, तो DAP के अंदर भी 18% नाइट्रोजन पहले से मौजूद होती है।
- पहली मुख्य टॉप ड्रेसिंग (Top Dressing) रोपाई के 18–25 दिन बाद ही करें।
- TNAU की LCC (Leaf Colour Chart) आधारित नाइट्रोजन प्रबंधन सलाह में भी रोपाई के 14 दिन बाद से पत्तियों का रंग देखकर यूरिया देने की बात कही गई है। इसका मतलब है कि जरूरत के हिसाब से किस्तों में यूरिया देना ही बेस्ट है।
पोटाश यानी MOP धान में क्यों जरूरी है?
कई किसान भाई धान में DAP और यूरिया तो भर-भर कर डालते हैं, लेकिन पोटाश (Potash) को छोड़ देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है जो बाद में भारी नुकसान कराती है।
पोटाश का काम सिर्फ दाना भरना नहीं है। यह पौधे के तने को लोहे जैसा मजबूत बनाता है, तेज हवा में फसल को गिरने से रोकता है, सूखे या ज्यादा पानी के तनाव (stress) को सहने की ताकत देता है और बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है।
- इस्तेमाल का तरीका: एक सामान्य खेत में 15–25 kg MOP (म्यूरिएट ऑफ पोटाश) प्रति एकड़ बेसल डोज में देना चाहिए।
- अगर मिट्टी जांच में पोटाश की बहुत कमी आई है, तो इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है या इसका एक हिस्सा बाद में (Panicle Initiation stage पर) दिया जा सकता है।
गोबर खाद, कम्पोस्ट और हरी खाद का रोल
धान का खेत सिर्फ केमिकल खादों के दम पर लंबे समय तक अच्छी पैदावार नहीं दे सकता। अगर मिट्टी में जैविक कार्बन (Organic Matter) कम है, तो आप कितनी भी महंगी खाद डाल लें, पौधा पूरा रिस्पॉन्स नहीं देगा।
- गोबर खाद/कम्पोस्ट: अच्छे से सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी को भुरभुरी बनाती है और उसकी जलधारण क्षमता (Water Holding Capacity) को बढ़ाती है। TNAU के अनुसार लगभग 2 टन प्रति एकड़ (5 t/ha) गोबर खाद खेत में डालना बेहद फायदेमंद है। ([Agritech TNAU][4])
- हरी खाद (ढैंचा/सनई): अगर आपने रोपाई से 20–30 दिन पहले खेत में ढैंचा बोया है और उसे मचाई के समय मिट्टी में पलट दिया है, तो यह मिट्टी की सेहत सुधारने के साथ-साथ नाइट्रोजन की भी भारी बचत करता है। PAU (पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी) के पैकेज में भी हरी खाद को लोहे की कमी (Iron deficiency) दूर करने और मिट्टी सुधार के लिए उत्तम माना गया है।
धान की किस्म के हिसाब से खाद का प्रबंधन
हर किस्म की भूख एक जैसी नहीं होती। अवधि और वैरायटी के हिसाब से खाद की मात्रा में बदलाव करना जरूरी है:
1. सामान्य धान (Non-Basmati)
इसमें संतुलित डोज रखनी चाहिए। DAP, पोटाश, जिंक और जैविक खाद का एक सामान्य तालमेल रखें और यूरिया को 2 से 3 बराबर हिस्सों में बांटकर दें।
2. हाइब्रिड धान (Hybrid Rice)
हाइब्रिड धान की पैदावार देने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है, इसलिए इसकी पोषक तत्वों की मांग भी अधिक होती है। NFSM के पैकेज में भी इसके लिए नाइट्रोजन की मात्रा सामान्य धान से ज्यादा रखने की सलाह दी गई है। लेकिन ध्यान रहे, नाइट्रोजन के साथ पोटाश और जिंक भी उसी अनुपात में बढ़ाना होगा। ([Food Security Mission][3])
3. बासमती या सुगंधित धान (Basmati/Aromatic Rice)
सुगंधित धान में बहुत ज्यादा नाइट्रोजन (यूरिया) डालने से पौधा बहुत लंबा होकर गिर जाता है और चावल की क्वालिटी व खुशबू खराब हो जाती है। ICAR-CRRI के FAQ के अनुसार, सुगंधित धान के लिए NPKZn की सही डोज 60:30:30:25 kg/ha है, जबकि हाइब्रिड के लिए यह 100:60:60 kg/ha तक जाती है। ([Central Rice Research Institute][8]) इसलिए बासमती में हमेशा खाद हाथ रोककर संतुलित मात्रा में ही दें।
रोपाई से कितने दिन पहले कौन सी खाद डालें?
खाद डालने की टाइमिंग का पूरा गणित इस प्रकार है:
- जैविक और हरी खाद: रोपाई से 10-20 दिन पहले.
अच्छी सड़ी हुई गोबर खाद, कम्पोस्ट या ढैंचा (हरी खाद) को रोपाई से 15-20 दिन पहले ही खेत में डालकर मिट्टी में अच्छे से पलट दें ताकि वह सड़कर मिट्टी का हिस्सा बन जाए। - फास्फोरस और पोटाश (DAP/SSP और MOP): आखिरी मचाई के समय.
DAP या SSP और पोटाश (MOP) को रोपाई से ठीक 1 दिन पहले या आखिरी मचाई (कदू/Puddling) करते समय खेत में डालें ताकि यह मिट्टी की निचली सतह में चला जाए जहाँ जड़ें विकसित होनी हैं। - जिंक सल्फेट का प्रयोग: रोपाई से ठीक पहले.
जिंक सल्फेट को सूखी रेत या मिट्टी में मिलाकर आखिरी मचाई के ठीक पहले या पानी कम करके पूरे खेत में समान रूप से छिड़कें और हल्की मचाई कर दें। - हल्की यूरिया (यदि आवश्यक हो): रोपाई के तुरंत पहले.
अगर बेसल डोज में यूरिया देनी है, तो 10-15 किलो यूरिया रोपाई से ठीक पहले हल्के पानी में छिड़कें। ध्यान रहे खेत में पानी बहुत गहरा न हो, नहीं तो खाद बह जाएगी।
धान रोपाई से पहले खाद डालते समय 7 आम गलतियां
धान में कई बार नुकसान खाद की कमी से नहीं, बल्कि गलत तरीके से खाद देने के कारण होता है। इन गलतियों से हमेशा बचें:
- पूरा यूरिया बेसल डोज में डाल देना: इससे नाइट्रोजन हवा और पानी में बहकर बर्बाद हो जाती है।
- पोटाश को छोड़ देना: सिर्फ DAP और यूरिया डालने से तना कमजोर रह जाता है और दाना सही से नहीं भरता।
- जिंक का इस्तेमाल न करना: जिंक न डालने से खैरा रोग आता है और पौधा पीला होकर बैठ जाता है।
- कच्ची गोबर खाद डालना: इससे खेत में दीमक, कीड़े, खरपतवार और नुकसानदायक गैसें बनती हैं। हमेशा सड़ी खाद ही डालें।
- खाद को मिट्टी में न मिलाना: बेसल खाद को सिर्फ ऊपर तैरते न छोड़ें, इसे मचाई चलाकर मिट्टी के अंदर मिक्स करना जरूरी है।
- बिना मिट्टी जांच के अंधाधुंध हाई डोज डालना: ज्यादा खाद का मतलब ज्यादा पैदावार नहीं होता, बल्कि इससे लागत बढ़ती है और फसल बीमार होती है।
- सिर्फ हरा रंग देखकर यूरिया डालना: फसल का सिर्फ हरा दिखना ही स्वास्थ्य की गारंटी नहीं है; मजबूत जड़ें और अच्छा फुटाव ज्यादा मायने रखते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) और विशेष परिस्थितियां
प्रश्न: अगर खेत में पहले से DAP डाल दी है तो अब क्या करें?
उत्तर: घबराने की कोई बात नहीं है, अब आपको सिर्फ बाकी बचे पोषक तत्वों को संतुलित (balance) करना है। अगर आप 40–50 kg प्रति एकड़ DAP पहले ही डाल चुके हैं, तो अब बेसल डोज में और DAP मत डालिए। इसके बजाय 15–20 kg MOP (पोटाश) और 8–10 kg जिंक सल्फेट को रेत में मिलाकर खेत में डाल दें। चूंकि DAP से नाइट्रोजन मिल चुकी है, इसलिए रोपाई पर यूरिया न डालें।
प्रश्न: अगर हम SSP डाल रहे हैं तो यूरिया कैसे मैनेज करें?
उत्तर: सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) में फॉस्फोरस और सल्फर तो भरपूर होता है पर नाइट्रोजन शून्य होती है। इसलिए यदि आप प्रति एकड़ 100–150 kg SSP डाल रहे हैं, तो उसके साथ नाइट्रोजन की शुरुआती पूर्ति के लिए 15–20 kg यूरिया बेसल डोज में जरूर मिलाएं। साथ में पोटाश और जिंक का पुराना नियम लागू रहेगा।
प्रश्न: धान रोपाई से पहले DAP कितना डालना चाहिए?
उत्तर: एक सामान्य एकड़ खेत के लिए 40–55 kg DAP पर्याप्त माना जाता है। सही मात्रा अपनी वैरायटी और मिट्टी के प्रकार के हिसाब से तय करें।
प्रश्न: धान में जिंक सल्फेट कब और कैसे डालें?
उत्तर: जिंक सल्फेट को हमेशा आखिरी मचाई के समय रोपाई से ठीक पहले डालना चाहिए। 8–10 kg जिंक सल्फेट को 20 किलो सूखी रेत या मिट्टी में मिलाकर छिड़कना सबसे सही तरीका है।
Practical Basal Fertilizer Plan: तीन आसान विकल्प
किसान भाई अपनी सुविधा, बजट और खेत के इतिहास के हिसाब से इन तीन में से कोई भी एक प्लान चुन सकते हैं:
विकल्प 1: DAP आधारित प्लान
- सड़ी गोबर खाद: 2 टन/एकड़
- DAP: 45–50 kg/एकड़
- MOP (पोटाश): 15–20 kg/एकड़
- जिंक सल्फेट: 8–10 kg/एकड़
- यूरिया: 0–15 kg/एकड़ (जरूरत के अनुसार ही)
विकल्प 2: SSP आधारित प्लान (सल्फर की कमी वाले खेतों के लिए)
- सड़ी गोबर खाद: 2–3 टन/एकड़
- SSP: 100–150 kg/एकड़
- MOP (पोटाश): 15–25 kg/एकड़
- जिंक सल्फेट: 8–10 kg/एकड़
- यूरिया: 15–20 kg/एकड़ (बेसल में अनिवार्य)
विकल्प 3: ऑर्गेनिक + संतुलित प्लान (मिट्टी की सेहत के लिए बेस्ट)
- ढैंचा/हरी खाद या अच्छी कम्पोस्ट खाद
- DAP या SSP की मध्यम (आधी) डोज
- MOP (पोटाश) की पूरी बेसल डोज
- जिंक सल्फेट अनिवार्य रूप से
- यूरिया का प्रयोग पूरी तरह से सिर्फ टॉप ड्रेसिंग में (फसल की जरूरत देखकर)
निष्कर्ष: रोपाई से पहले सही खाद, आधी फसल मजबूत
धान में बंपर पैदावार की कहानी रोपाई के पहले दिन से ही लिखी जाती है। अगर खेत में सही बेसल खाद, जैविक कार्बन, फॉस्फोरस, पोटाश और जिंक का सही संतुलन रहेगा, तो पौधा रोपाई के तीसरे दिन से ही नई जड़ें फेंकना शुरू कर देगा और आपका खेत कल्ला (फुटाव) से भर जाएगा।
हमेशा याद रखें कि सिर्फ यूरिया ही धान की खुराक नहीं है। धान को एक संपूर्ण और संतुलित आहार की जरूरत होती है। इस बार अपनी खेती से पुरानी गलतियों को हटाएं, बेसल डोज का सही तरीका अपनाएं और इस गाइड को अपने अन्य किसान मित्रों के साथ भी शेयर करें ताकि वे भी जागरूक हो सकें!

