धान के खेत में पानी की सतह के पास तने की म्यान पर हरे-धूसर, अंडाकार धब्बे दिखाई दे रहे हैं तो इसे सामान्य पीलापन समझकर छोड़ना ठीक नहीं है। खासकर जब धब्बे का बीच वाला हिस्सा धूसर-सफेद और किनारा भूरा या बैंगनी-भूरा होने लगे, तब फसल में शीथ ब्लाइट की आशंका मजबूत हो जाती है।
यह रोग नीचे की म्यान से शुरू होकर अनुकूल मौसम में ऊपर की पत्तियों और आसपास के कल्लों तक बढ़ सकता है। लेकिन केवल किसी भी भूरे धब्बे को देखकर दवा छिड़कना भी गलत है। सही नियंत्रण की शुरुआत सही पहचान, खेत की नमी, नत्रजन की मात्रा, पौधों की घनता और रोग के फैलाव को देखकर होती है।
धान में शीथ ब्लाइट क्या है?
शीथ ब्लाइट धान का एक प्रमुख फफूंदजनित रोग है। इसका कारक Rhizoctonia solani है। “शीथ” का अर्थ पत्ती की वह म्यान है जो धान के तने को घेरकर रखती है। रोग की शुरुआत प्रायः इसी म्यान पर, पानी या जमीन की सतह के पास होती है।
रोग पैदा करने वाली फफूंद मिट्टी और पुराने संक्रमित अवशेषों में कवकीय जाल या कठोर संरचना, जिसे स्क्लेरोशिया कहा जाता है, के रूप में जीवित रह सकती है। खेत में पानी चलने पर ये संरचनाएं एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच सकती हैं। इसलिए एक हिस्से में शुरू हुआ रोग लगातार नमी और घनी फसल में तेजी से फैल सकता है।
वैज्ञानिक प्रमाण: तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के धान रोग पोर्टल के अनुसार शीथ ब्लाइट के शुरुआती धब्बे पानी की सतह के पास पत्ती की म्यान पर बनते हैं। अधिक नमी, 28–32°C तापमान, लगातार बारिश, ज्यादा नत्रजन और बहुत पास-पास पौधे रोग को बढ़ावा देते हैं।
शीथ ब्लाइट की स्पष्ट पहचान कैसे करें?
1. धब्बे की शुरुआत कहां से होती है?
सबसे पहले नीचे की पत्ती की म्यान देखें, विशेषकर वहां जहां म्यान पानी की सतह के पास रहती है। शुरुआती अवस्था में छोटे, पानी से भीगे जैसे या हरे-धूसर अंडाकार धब्बे दिखाई दे सकते हैं।
2. धब्बे का रंग और आकार
रोग बढ़ने पर धब्बे का बीच वाला हिस्सा धूसर-सफेद हो जाता है और उसके चारों ओर भूरी, गहरी भूरी या बैंगनी-भूरी अनियमित किनारी बनती है। कई धब्बे आपस में मिलकर म्यान के बड़े हिस्से को घेर सकते हैं।
3. नीचे से ऊपर की ओर फैलाव
अनुकूल मौसम में संक्रमण नीचे की म्यान से ऊपर की म्यान और पत्तियों की ओर बढ़ता है। गंभीर स्थिति में पूरा कल्ला झुलसा हुआ दिख सकता है। बालियां निकलने और दाना भरने के समय ऊपरी भाग तक पहुंचा रोग दाना भराव को प्रभावित कर सकता है।
4. छोटे भूरे दाने या स्क्लेरोशिया
पुराने संक्रमित हिस्से पर कभी-कभी सरसों के दाने जैसे छोटे भूरे स्क्लेरोशिया चिपके दिखाई दे सकते हैं। ये बाद में गिरकर मिट्टी या पानी में पहुंचते हैं और रोग को अगले पौधों तक ले जाने में मदद करते हैं। केवल इनके न दिखने से रोग को खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि हर अवस्था में ये साफ दिखाई नहीं देते।
शीथ ब्लाइट को दूसरी समस्याओं से अलग कैसे पहचानें?
| समस्या | मुख्य पहचान | शीथ ब्लाइट से अंतर |
|---|---|---|
| शीथ ब्लाइट | पानी की सतह के पास म्यान पर हरे-धूसर अंडाकार धब्बे, धूसर-सफेद केंद्र और भूरी किनारी | नीचे की म्यान से ऊपर की ओर बढ़ता है |
| बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट | पत्ती की नोक या किनारे से पीली, पानी से भीगी धारियां और बाद में सूखना | मुख्य शुरुआत पत्ती के किनारे/नोक से होती है, म्यान पर अंडाकार धब्बों से नहीं |
| शीथ रॉट | ऊपरी म्यान, विशेषकर निकलती हुई बाली के आसपास सड़न या भूरापन | अधिकतर बाली निकलने के समय ऊपर की म्यान प्रभावित होती है |
| तना छेदक | डेड हार्ट या सफेद बाली, तने पर छेद और कभी-कभी कीट का मल | अंडाकार धूसर-सफेद फफूंदजनित धब्बे इसकी मुख्य पहचान नहीं हैं |
यदि पत्ती की नोक से सूखने की समस्या है तो पहले धान में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट की पहचान भी देखें। दोनों रोगों में एक जैसी दवा काम नहीं करती, इसलिए पहचान में गलती महंगी पड़ सकती है।
शीथ ब्लाइट तेजी से क्यों फैलता है?
- लगातार नमी और बारिश: लंबे समय तक गीली म्यान और बंद छत्र फफूंद को अनुकूल वातावरण देते हैं।
- अधिक नत्रजन: जरूरत से ज्यादा यूरिया फसल को बहुत मुलायम और घना बना सकता है, जिससे रोग का दबाव बढ़ता है।
- घनी रोपाई: पास-पास पौधे होने से हवा का आवागमन घटता है और नमी अधिक देर टिकती है।
- खेत में लगातार पानी का प्रवाह: संक्रमित खेत से बहने वाला पानी स्क्लेरोशिया को स्वस्थ हिस्सों तक ले जा सकता है।
- पुराने संक्रमित अवशेष: मिट्टी और अवशेषों में रोगजनक बना रह सकता है।
- खरपतवार और बहुत घना निचला भाग: इससे हवा कम चलती है और रोग की निगरानी भी कठिन होती है।
खेत में रोग दिखे तो सबसे पहले क्या करें?
- पांच अलग स्थानों पर नीचे की म्यान देखें: केवल खेत की मेड़ से फैसला न करें। बीच और निचले हिस्सों में जाकर देखें कि धब्बे सीमित हैं या ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं।
- अगली यूरिया की मात्रा रोककर पुनः आकलन करें: रोग सक्रिय हो और फसल पहले से गहरी हरी व घनी हो तो बिना जरूरत अतिरिक्त यूरिया न दें। मिट्टी परीक्षण, फसल अवस्था और पहले दिए गए नत्रजन के आधार पर ही अगला निर्णय लें।
- संक्रमित पानी स्वस्थ खेत में न जाने दें: एक ही नाली से पानी कई खेतों में जा रहा हो तो रोग वाले हिस्से से स्वस्थ हिस्से की ओर बहाव रोकें।
- निचली म्यान तक कवरेज सुनिश्चित करें: केवल ऊपर की पत्तियां भिगो देने से पर्याप्त नियंत्रण नहीं मिलता। स्प्रे की दिशा और पानी की मात्रा ऐसी रखें कि घोल रोग वाले निचले हिस्से तक पहुंचे।
- पहचान पक्की किए बिना मिश्रण न बनाएं: फफूंदनाशक, कीटनाशक, सूक्ष्म पोषक और वृद्धि नियामक एक साथ डालना जरूरी नहीं है। अनावश्यक मिश्रण से फसल पर दबाव, तलछट या कमजोर असर हो सकता है।
धान में शीथ ब्लाइट के लिए फफूंदनाशक कैसे चुनें?
एक ही नाम से बिकने वाले उत्पादों की formulation, सक्रिय तत्व और लेबल अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल ब्रांड देखकर मात्रा तय न करें। खरीदे गए पैक पर धान + शीथ ब्लाइट का वर्तमान label claim, formulation, प्रति एकड़ या प्रति हेक्टेयर मात्रा, पानी की मात्रा, दो स्प्रे के बीच अंतर और कटाई-पूर्व प्रतीक्षा अवधि जरूर पढ़ें।
| सक्रिय तत्व व formulation | तकनीकी आधार | सुरक्षित उपयोग की शर्त |
|---|---|---|
| Propiconazole 25% EC | TNAU पोर्टल पर 1 मिली प्रति लीटर पानी का संदर्भ दिया गया है | केवल उसी उत्पाद में उपयोग करें जिसके वर्तमान लेबल पर धान और शीथ ब्लाइट दर्ज हो; लेबल की कुल क्षेत्रीय मात्रा व प्रतीक्षा अवधि मानें |
| Carbendazim 50% WP | TNAU पोर्टल पर 100 ग्राम प्रति एकड़ का संदर्भ है | स्थानीय सिफारिश और वर्तमान label claim जांचें; एक ही क्रिया-विधि वाली दवा को बार-बार न दोहराएं |
| Validamycin 3% L | ICAR के Indian Phytopathology में प्रकाशित क्षेत्र परीक्षणों में शीथ ब्लाइट पर प्रभाव दर्ज है | शोध की सांद्रता को हर ब्रांड की सार्वभौमिक dose न मानें; खरीदे गए उत्पाद का लेबल ही अंतिम आधार रखें |
जरूरी चेतावनी: ऊपर दिए गए विकल्पों में से कई दवाएं एक साथ मिलाना अधिक असरदार होने की गारंटी नहीं है। किसी एक वर्तमान label-approved विकल्प का सही समय, सही पानी और निचली म्यान तक समान कवरेज अधिक महत्वपूर्ण है। बिना लेबल या कृषि विशेषज्ञ की स्पष्ट सलाह के tank mix न करें।
प्रति पंप मात्रा सीधे क्यों नहीं बताई गई?
15, 16 और 25 लीटर के पंप से प्रति एकड़ लगाए जाने वाले टैंकों की संख्या किसान के nozzle, चाल, फसल की घनता और spray-water volume पर निर्भर करती है। केवल “प्रति पंप” मात्रा बताने से कुल प्रति एकड़ dose कम या ज्यादा हो सकती है। सही गणना के लिए पहले एक एकड़ में लगने वाला कुल पानी मापें, फिर लेबल पर लिखी क्षेत्रीय dose को उसी पानी में समान रूप से बांटें।
स्प्रे करते समय ये गलतियां न करें
- दोपहर की तेज गर्मी, तेज हवा या तुरंत बारिश की संभावना में स्प्रे न करें। उत्पाद लेबल पर दी गई rain-free अवधि मानें।
- केवल ऊपर से हल्की फुहार देकर लौट न आएं; रोग का प्रमुख भाग नीचे की म्यान पर होता है।
- यूरिया या पत्तियों पर डालने वाली खाद को अपने-आप fungicide के साथ न मिलाएं।
- रोग रुकने के बाद भी आदत के कारण निश्चित अंतर पर लगातार spray न दोहराएं। पुनः खेत देखकर और लेबल के अनुसार फैसला करें।
- एक ही क्रिया-विधि के fungicide को बार-बार लगाने से प्रतिरोध का जोखिम बढ़ सकता है। जरूरत होने पर लेबल-अनुमोदित अलग क्रिया-विधि के विकल्प पर स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।
- दस्ताने, पूरे कपड़े, जूते और आंखों की सुरक्षा के बिना घोल न बनाएं। स्प्रे के बाद हाथ-मुंह और उपकरण साफ करें।
क्या केवल यूरिया रोकने से रोग ठीक हो जाएगा?
नहीं। अधिक नत्रजन रोग को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है, लेकिन यूरिया रोक देना फफूंदनाशक उपचार का विकल्प नहीं है। यदि पहचान पक्की है और धब्बे ऊपर की ओर फैल रहे हैं तो खेत की स्थिति के अनुसार label-approved fungicide की जरूरत पड़ सकती है।
दूसरी ओर, केवल रोग के डर से पूरी फसल का पोषण बंद कर देना भी सही नहीं है। पहले दिए गए नत्रजन, मिट्टी की उर्वरता, फसल का रंग, कल्लों की संख्या और वृद्धि अवस्था देखें। यदि दूसरी खाद की योजना बना रहे हैं तो धान में दूसरी खाद कब और क्या डालें वाली गाइड के साथ रोग की स्थिति को जोड़कर निर्णय लें।
अगली फसल में शीथ ब्लाइट का दबाव कैसे घटाएं?
- अनुशंसित दूरी पर रोपाई करें और एक जगह बहुत अधिक पौधे न लगाएं।
- नत्रजन को एक बार में अधिक देने के बजाय मिट्टी परीक्षण और क्षेत्रीय सिफारिश के अनुसार विभाजित मात्रा में दें।
- पोटाश की कमी हो तो मिट्टी परीक्षण के आधार पर सुधार करें; अंधाधुंध पोटाश भी उचित नहीं है।
- कटाई के बाद संक्रमित अवशेष को खेत में ढेर बनाकर न छोड़ें। सुरक्षित residue decomposition और गहरी गर्मी की जुताई जैसे क्षेत्र-अनुकूल उपाय अपनाएं; पराली जलाना सुरक्षित विकल्प नहीं है।
- संक्रमित खेत का पानी दूसरे धान खेत में न छोड़ें।
- अगले मौसम में रोपाई के समय से ही निचली म्यान की नियमित निगरानी रखें, विशेषकर लगातार बारिश और घनी फसल में।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. धान में शीथ ब्लाइट की सबसे पक्की पहचान क्या है?
पानी की सतह के पास पत्ती की म्यान पर हरे-धूसर अंडाकार धब्बे, बाद में धूसर-सफेद केंद्र और भूरी या बैंगनी-भूरी किनारी इसकी मजबूत पहचान है। रोग बढ़ने पर धब्बे ऊपर की म्यान और पत्तियों की ओर फैलते हैं।
2. शीथ ब्लाइट किस फफूंद से होता है?
यह रोग Rhizoctonia solani नामक फफूंद से होता है। यह मिट्टी और संक्रमित अवशेषों में जीवित रह सकती है तथा पानी के साथ इसके स्क्लेरोशिया खेत में फैल सकते हैं।
3. क्या ज्यादा यूरिया से शीथ ब्लाइट बढ़ता है?
अधिक नत्रजन से फसल बहुत घनी और मुलायम हो सकती है तथा छत्र के भीतर नमी बनी रहती है। ये परिस्थितियां रोग के लिए अनुकूल हैं। इसलिए रोग सक्रिय होने पर बिना जरूरत अतिरिक्त यूरिया न दें।
4. शीथ ब्लाइट में कौन-सी दवा डालें?
Propiconazole 25% EC, Carbendazim 50% WP और Validamycin 3% L के लिए कृषि विश्वविद्यालय या ICAR आधारित तकनीकी प्रमाण उपलब्ध हैं। लेकिन खरीदे गए उत्पाद पर धान और शीथ ब्लाइट का वर्तमान label claim तथा उसकी dose जांचना जरूरी है। इनमें से कई दवाओं को एक साथ न मिलाएं।
5. क्या पुराने धब्बे स्प्रे के बाद हरे हो जाएंगे?
नहीं। पहले से क्षतिग्रस्त ऊतक सामान्य हरा नहीं बनता। सफल नियंत्रण का मतलब नए धब्बों का कम बनना और रोग का ऊपर तथा आसपास के स्वस्थ कल्लों में फैलाव रुकना है।
अंतिम सलाह
धान में शीथ ब्लाइट का नियंत्रण केवल दवा का नाम जान लेने से नहीं होता। नीचे की म्यान पर सही लक्षण पहचानना, ज्यादा यूरिया से बचना, संक्रमित पानी का प्रवाह रोकना और spray को रोग वाले हिस्से तक पहुंचाना उतना ही जरूरी है।
यदि धब्बे केवल एक-दो पौधों तक सीमित हैं तो पहले पूरे खेत की जांच करें। यदि रोग सक्रिय होकर ऊपर या आसपास के कल्लों में बढ़ रहा है, तभी खरीदे गए उत्पाद के वर्तमान label claim और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार किसी एक उपयुक्त fungicide का उपयोग करें।
तकनीकी स्रोत: Tamil Nadu Agricultural University—Rice Sheath Blight, TNAU Paddy Expert System—Sheath Blight और Indian Phytopathology—Validamycin field study।

