Site icon Smart Kisan

ICAR की इस सप्ताह की आधिकारिक सलाह: खरीफ किसानों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट

icar-kharif-advisory-this-week-2026

खरीफ सीजन में यह सप्ताह किसानों के लिए बहुत अहम है। कई राज्यों में मानसून सक्रिय हो चुका है, कुछ जगह भारी बारिश हो रही है और कई इलाकों में सोयाबीन, धान, मक्का, कपास, अरहर और सब्जियों की बुवाई या शुरुआती देखभाल चल रही है। ऐसे समय में छोटी-सी गलती—जैसे जल निकासी न करना, गलत समय पर खरपतवारनाशी डालना या बारिश में बुवाई कर देना—सीधे पौध संख्या और पैदावार पर असर डाल सकती है।

मौसम विभाग (IMD) का अलर्ट:

IMD की 4 जुलाई 2026 की प्रेस रिलीज के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक well-marked low-pressure area बना है। इसके प्रभाव से देश के मध्य हिस्सों में अगले 4–5 दिनों तक मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। IMD ने पश्चिम मध्य प्रदेश, ओडिशा, गुजरात, कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और सौराष्ट्र-कच्छ जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग तारीखों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी भी दी है।

Join Smart Kisan Community

1. इस सप्ताह की सबसे बड़ी सलाह: पहले पानी निकास, फिर खाद-दवा

किसान भाइयों को इस सप्ताह सबसे पहले खेत की जल निकासी पर ध्यान देना चाहिए। लगातार बारिश या भारी बारिश वाले क्षेत्रों में खेत में पानी रुकना सोयाबीन, मक्का, कपास, सब्जियों और दलहनी फसलों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

2. सोयाबीन किसानों के लिए ICAR-NSRI की ताजा सलाह

ICAR-National Soybean Research Institute, Indore ने 29 जून से 5 जुलाई 2026 के लिए सोयाबीन किसानों की साप्ताहिक सलाह जारी की है। इस सलाह में बताया गया है कि कई क्षेत्रों में सोयाबीन की बोवनी हो चुकी है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी बोवनी जारी है। ICAR के अनुसार मानसून आने के बाद जुलाई के पहले सप्ताह तक सोयाबीन बोवनी का समय उपयुक्त माना गया है।

बोवनी से पहले की शर्त

जहां अभी बोवनी नहीं हुई है, वहां ICAR ने साफ सलाह दी है कि किसान अपने क्षेत्र में मानसून के आगमन और कम से कम 100 मिमी बारिश होने के बाद ही सोयाबीन की बोवनी करें। इसका कारण यह है कि मिट्टी में पर्याप्त नमी होने पर अंकुरण अच्छा होता है और बाद में गैप भरने की जरूरत कम पड़ती है।

जिन खेतों में सोयाबीन 10 दिन की हो गई है

अगर आपकी सोयाबीन 10 दिन की हो चुकी है और अभी तक कोई PPI (Pre-Plant Incorporation) या PE (Pre-Emergence) खरपतवारनाशी नहीं डाला गया है, तो ICAR ने हाथ से निराई, डोरा-कुलपा या अनुशंसित post-emergence herbicide के उपयोग की सलाह दी है।

पारंपरिक सीड ड्रिल से बोवनी की है तो नाली जरूर निकालें

ICAR-NSRI ने जिन किसानों ने परंपरागत सीड ड्रिल से सोयाबीन बोई है, उन्हें 6 या 9 कतारों के अंतराल पर नाली निकालने की सलाह दी है। इससे ज्यादा बारिश का पानी बाहर निकलता है और सूखे की स्थिति में नमी संरक्षण भी होता है। यह सलाह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे सोयाबीन क्षेत्रों के लिए बहुत उपयोगी है, क्योंकि यहां कभी एक साथ तेज बारिश और फिर लंबा सूखा अंतराल देखने को मिलता है।

कमजोर अंकुरण हो तो तुरंत गैप फिलिंग करें

जहां सोयाबीन का अंकुरण कमजोर है, वहां किसान दो काम कर सकते हैं:

  1. या तो दोबारा बोवनी (Re-sowing) करें।
  2. या फिर खाली जगहों पर कतार में बीज डालकर गैप फिलिंग (Gap filling) करें।

नोट: गैप फिलिंग में देरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि देर से लगाए पौधे मुख्य फसल के साथ बराबरी नहीं कर पाते और उत्पादन में खास योगदान नहीं दे पाते।

सोयाबीन में बीज, खाद और किस्म चयन की सलाह

3. धान किसानों के लिए इस सप्ताह की जरूरी सलाह

जहां धान की नर्सरी लगी है या रोपाई की तैयारी चल रही है, वहां भारी बारिश में नर्सरी और मुख्य खेत में पानी जमा न होने दें।

4. मक्का, कपास और सब्जियों के लिए सलाह

मक्का और कपास की शुरुआती अवस्था में जलभराव बड़ा नुकसान कर सकता है। तेज हवा और बारिश वाले क्षेत्रों में मक्का के गिरने, सब्जियों के पौधों के टूटने और पपीता-केला जैसे पौधों को नुकसान की संभावना रहती है।

5. खरीफ किसानों के लिए 7 जरूरी काम

  1. खेत में पानी रुक रहा है तो तुरंत निकासी नाली बनाएं।
  2. सोयाबीन की 10 दिन की फसल में खरपतवार नियंत्रण की योजना बनाएं।
  3. बारिश के दौरान किसी भी तरह का स्प्रे करने से बचें।
  4. कमजोर अंकुरण वाले खेत में बिना देरी किए तुरंत गैप फिलिंग करें।
  5. धान नर्सरी में पानी जमा न होने दें, निकास व्यवस्था दुरुस्त रखें।
  6. तेज हवा वाले क्षेत्रों में केला, पपीता और सब्जियों के पौधों को सहारा दें।
  7. जिला-स्तरीय मौसम चेतावनी (District Agro-met Advisory) देखकर ही खाद, दवा और रोपाई का फैसला लें।

निष्कर्ष

इस सप्ताह खरीफ किसानों के लिए सबसे बड़ा संदेश यही है—बुवाई से ज्यादा जरूरी है सही समय, सही नमी और सही जल निकासी। सोयाबीन में बोवनी का अंतिम उपयुक्त समय कई क्षेत्रों में जुलाई के पहले सप्ताह तक माना जा रहा है, लेकिन 100 मिमी बारिश और मिट्टी में पर्याप्त नमी की शर्त को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। धान, मक्का, कपास और सब्जियों में भारी बारिश के कारण जलभराव, पौधे गिरना और रोग का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए खेत की नाली और मौसम अलर्ट पर लगातार नजर रखें।

किसान भाई इस सप्ताह जल्दबाजी में दवा-खाद डालने के बजाय पहले खेत की स्थिति देखें—मिट्टी में नमी, पानी निकासी, पौध संख्या और मौसम पूर्वानुमान। यही छोटा निर्णय आगे चलकर पैदावार में बड़ा अंतर ला सकता है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1: क्या जुलाई के पहले सप्ताह में सोयाबीन बो सकते हैं?

उत्तर: हां, ICAR-NSRI के अनुसार मानसून आने के बाद जुलाई के पहले सप्ताह तक सोयाबीन बोवनी का समय उपयुक्त माना गया है, लेकिन क्षेत्र में कम से कम 100 मिमी बारिश और पर्याप्त नमी होनी चाहिए।

प्रश्न 2: सोयाबीन में 10 दिन बाद कौन सा काम जरूरी है?

उत्तर: अगर खरपतवारनाशी पहले नहीं डाला है, तो 10 दिन की फसल में निराई, डोरा-कुलपा या अनुशंसित post-emergence herbicide का उपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 3: भारी बारिश में धान की नर्सरी कैसे बचाएं?

उत्तर: धान की नर्सरी में पानी रुकने न दें। अतिरिक्त पानी निकालने के लिए नाली बनाएं और भारी बारिश के समय रोपाई या नई नर्सरी की बुवाई से बचें।

प्रश्न 4: इस सप्ताह मध्य भारत के किसानों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

उत्तर: IMD के अनुसार 4–10 जुलाई के दौरान मध्य भारत में व्यापक बारिश की संभावना है, इसलिए सोयाबीन, मक्का, सब्जी और धान किसानों को खेत में पानी निकासी और मौसम चेतावनी पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

Join Smart Kisan Community

Exit mobile version