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सोयाबीन की नई किस्म NRC 142 (अहिल्या 142): कम समय में बम्पर पैदावार और पीला मोजेक से परमानेंट छुटकारा

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किसान भाइयों, खरीफ सीजन शुरू होते ही हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि इस बार सोयाबीन की कौन सी वैरायटी बोएं? पिछले कुछ सालों में मौसम के बदलते मिजाज, कभी सूखा तो कभी जरूरत से ज्यादा बारिश और सबसे खतरनाक पीला मोजेक वायरस (Yellow Mosaic Virus) ने हमारी उम्मीदों पर पानी फेरा है। कई बार पूरी की पूरी फसल पीली पड़कर बर्बाद हो जाती है, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।

अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं और एक ऐसी वैरायटी की तलाश में हैं जो कम दिनों में पके, जिसमें बीमारियां न लगें और पैदावार भी शानदार मिले, तो यह ब्लॉग आपके लिए ही है। आज हम भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (IISR), इंदौर द्वारा विकसित की गई एक बेहद शानदार वैरायटी NRC 142 सोयाबीन के बारे में बात करेंगे। इस लेख को पूरा पढ़ने के बाद आपको इस किस्म की ए-टू-जेड (A to Z) सटीक और वैज्ञानिक जानकारी मिल जाएगी, जिससे आप इस सीजन में सही निर्णय ले सकेंगे।

NRC 142 सोयाबीन किस्म क्या है? (परिचय और इतिहास)

NRC 142 (जिसे आधिकारिक तौर पर अहिल्या 142 के नाम से भी जाना जाता है) भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (IISR), इंदौर द्वारा विकसित की गई सोयाबीन की एक उन्नत और आधुनिक किस्म है। इसे विशेष रूप से मध्य भारत के उन क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है जहां मौसम अनिश्चित रहता है और पीला मोजेक वायरस का प्रकोप सबसे ज्यादा देखा जाता है।

मेरे अनुभव में, यह किस्म उन किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रही है जो सोयाबीन काटने के बाद आलू, मटर या अगेती गेहूं की फसल लेना चाहते हैं, क्योंकि यह बहुत ही कम समय में पककर तैयार हो जाती है। यदि आप इसकी तुलना अन्य अगेती किस्मों से करना चाहते हैं, तो हमारी JS 2034 सोयाबीन वैरायटी गाइड को देखकर समझ सकते हैं कि यह कैसे अलग है।

NRC 142 सोयाबीन की मुख्य विशेषताएं और खूबियां

अक्सर देखा गया है कि कई किसान भाई बिना सोचे-समझे किसी भी वैरायटी का चुनाव कर लेते हैं। NRC 142 को चुनने से पहले इसकी इन 5 मुख्य खूबियों को ध्यान से समझें:

1. रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity)

इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पीला मोजेक वायरस (YMV) और गर्डल बीटल (Girdle Beetle) के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है। इसमें चारकोल रॉट (Charcoal Rot) जैसी फंगस जनित बीमारियों का खतरा भी अन्य पारंपरिक किस्मों जैसे JS 9560 या JS 335 के मुकाबले बहुत कम होता है। इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए आप सोयाबीन में येलो मोजेक वायरस का इलाज भी पढ़ सकते हैं।

2. कम समय में पकना (Early Maturity)

यह वैरायटी मात्र 90 से 95 दिनों के भीतर पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। कम अवधि की होने के कारण यह सूखे की स्थिति को आसानी से झेल जाती है, क्योंकि सितंबर के अंत तक जब पानी की कमी होती, तब तक यह अपना दाना लगभग पका चुकी होती है।

3. मजबूत तना और लॉजिंग रेजिस्टेंस (No Lodging)

तेज हवा या भारी बारिश के कारण सोयाबीन के पौधे अक्सर खेतों में आड़े (गिर) जाते हैं, जिससे फलियां सड़ जाती हैं। लेकिन NRC 142 का तना बेहद मजबूत होता है, जिससे यह फसल पकने तक सीधी खड़ी रहती है।

4. फलियां चटकने की समस्या नहीं (Non-Shattering)

कई अगेती किस्मों में यह समस्या होती है कि यदि कटाई में 2-4 दिन की भी देरी हो जाए, तो फलियां खेत में ही चटककर दाने बिखेर देती हैं। NRC 142 में फलियां चटकने (Shattering) की समस्या नहीं के बराबर है। फसल पकने के बाद भी आप 8-10 दिनों तक आसानी से कटाई कर सकते हैं। इसके अलावा, फूलों के समय विशेष ध्यान रखें ताकि सोयाबीन में फूल झड़ने की समस्या न हो।

5. फलियों की ऊंचाई और हार्वेस्टर अनुकूल

इस वैरायटी में जमीन से पहली फली की ऊंचाई लगभग 15 से 20 सेंटीमीटर ऊपर होती है। इसका सीधा फायदा यह है कि आप इस फसल की कटाई कंबाइन हार्वेस्टर से भी बिना किसी नुकसान के करवा सकते हैं।

अन्य लोकप्रिय किस्मों के साथ तुलना (Comparison Table)

किसान भाइयों की आसानी के लिए हमने यहाँ NRC 142 की तुलना मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की दो सबसे प्रसिद्ध किस्मों (JS 20-34 और JS 9560) से की है:

विशेषता / मापदंडNRC 142 (अहिल्या 142)JS 20-34JS 9560
पकने की अवधि90 – 95 दिन85 – 90 दिन80 – 85 दिन
औसत उत्पादन20 – 25 क्विंटल/हेक्टेयर18 – 22 क्विंटल/हेक्टेयर15 – 18 क्विंटल/हेक्टेयर
पीला मोजेक (YMV)पूर्ण प्रतिरोधी (High Resistant)मध्यम प्रतिरोधीअत्यधिक संवेदनशील (High Risk)
तना छेदक / गर्डल बीटलप्रतिरोधीसामान्यसंवेदनशील
फूलों का रंगसफेद/हल्का बैंगनीसफेदबैंगनी
दाने का आकार व रंगमध्यम-बड़ा, चमकदार पीलाछोटा, पीलामध्यम, पीला

नोट: यह आंकड़ा आपके क्षेत्र, मौसम प्रबंधन, मिट्टी की उर्वरता और कृषि पद्धतियों की स्थिति के अनुसार बदल सकता है। यदि आप अन्य आधुनिक किस्मों की खोज में हैं, तो 2026 की टॉप सोयाबीन वैरायटी की सूची भी देख सकते हैं।

मिट्टी का चयन और खेत की तैयारी

उपयुक्त मिट्टी (Soil Selection)

NRC 142 सोयाबीन के लिए मध्यम से भारी काली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। ध्यान रहे, जिस खेत में पानी का भराव होता हो या जो रेतीली मिट्टी हो, वहां सोयाबीन लगाने से बचें।

खेत की तैयारी (Field Preparation)

बुवाई का सही समय, बीज दर और बीज उपचार

बुवाई का सही समय (Sowing Window)

कई किसानों की यही गलती होती है कि वे पहली बारिश होते ही बिना यह देखे कि जमीन में कितनी नमी है, बुवाई कर देते हैं। सोयाबीन की बुवाई तब करें जब खेत में कम से कम 3 से 4 इंच (75-100 mm) बारिश हो चुकी हो और मिट्टी में पर्याप्त नमी आ जाए। मध्य भारत के लिए 15 जून से 5 जुलाई का समय सबसे सर्वोत्तम है। अधिक जानकारी के लिए आप जून में बोई जाने वाली खरीफ फसलें की सूची देख सकते हैं।

बीज की मात्रा (Seed Rate)

बीज उपचार (Seed Treatment – सबसे जरूरी कदम)

बिना बीज उपचार के सोयाबीन बोना सीधे अपने उत्पादन को 20% कम करने जैसा है। इसके लिए F-I-R (Fungicide – Insecticide – Rhizobium) का नियम अपनाएं:

संतुलित खाद एवं पोषण प्रबंधन (Fertilizer Schedule)

सोयाबीन एक तिलहनी और दलहनी फसल है, इसलिए इसे नाइट्रोजन से ज्यादा फास्फोरस, पोटैशियम और सल्फर की आवश्यकता होती है। इसके पोषक तत्व प्रबंधन को विस्तार से समझने के लिए सोयाबीन में पोषक तत्व प्रबंधन गाइड पढ़ें।

प्रति एकड़ आवश्यक मात्रा:

एक्सपर्ट सलाह: सोयाबीन में हमेशा DAP की जगह Single Super Phosphate का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके फायदों को गहराई से समझने के लिए SSP vs DAP अंतर और लाभ अवश्य पढ़ें, क्योंकि SSP से फसल को फास्फोरस के साथ-साथ मुफ्त में सल्फर और कैल्शियम भी मिल जाता है।

खरपतवार नियंत्रण (Weed Management)

सोयाबीन की फसल में शुरुआती 30 से 40 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस दौरान खरपतवार साफ नहीं किए गए, तो उत्पादन में 40% तक की गिरावट आ सकती है। इसके रासायनिक और जैविक नियंत्रण के तरीकों के लिए हमारा विशेष लेख सोयाबीन में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें देख सकते हैं।

बुवाई के तुरंत बाद (Pre-Emergence)

बुवाई के 48 घंटे के भीतर और अंकुरण से पहले डाइक्लोसुलम 84% WDG या पेंडिमेथालिन 38.7% CS का छिड़काव करें। यह चौड़ी और संकरी पत्ती वाले खरपतवारों को उगने ही नहीं देता।

खड़ी फसल में (Post-Emergence)

यदि शुरुआती स्प्रे छूट गया हो, तो बुवाई के 15-20 दिन बाद (जब खरपतवार 2-4 पत्ती के हों) इमेजाथापायर 10% SL या प्रोपाक्विजाफॉप + इमेजाथापायर का कॉम्बिनेशन स्प्रे करें।

रोग और कीट प्रबंधन (Pest & Disease Control)

यद्यपि NRC 142 पीला मोजेक के प्रति प्रतिरोधी है, फिर भी कुछ अन्य कीटों का हमला मौसम खराब होने पर हो सकता है।

1. गर्डल बीटल (रिंग कटर) और सेमिलूपर इल्ली

2. सफेद मक्खी (White Fly)

यह कीट पीला मोजेक वायरस को एक पौधे से दूसरे पौधे में फैलाता है। इसके नियंत्रण के लिए एसिटामिप्रिड 20% SP या थायोमेथॉक्सम 25% WG का छिड़काव करें।

लागत, कमाई और उत्पादन क्षमता (Cost & Profit Analysis)

आइए एक एकड़ के आधार पर एक व्यावहारिक और अनुमानित बजट को समझते हैं:

ध्यान रहे, यह लाभ और उत्पादन का आंकड़ा क्षेत्र, मौसम के मिजाज और आपके कृषि प्रबंधन के आधार पर घट या बढ़ सकता है। यदि आप धान और सोयाबीन के मुनाफे की तुलना करना चाहते हैं, तो सोयाबीन बनाम धान का मुनाफा चार्ट जरूर देखें।

किसानों द्वारा की जाने वाली आम गलतियां (Common Mistakes)

निष्कर्ष और निर्णय आधारित सलाह

किसान भाइयों, कोई भी एक वैरायटी हर परिस्थिति के लिए परफेक्ट नहीं होती। आपको अपनी स्थिति के अनुसार निर्णय लेना चाहिए:

  1. यदि आपके क्षेत्र में पीला मोजेक (Yellow Mosaic) का प्रकोप बहुत ज्यादा होता है, तो आँख बंद करके NRC 142 का चुनाव करें।
  2. यदि आप सोयाबीन के तुरंत बाद अगेती मटर, आलू या लहसुन की खेती करना चाहते हैं, तो यह कम समय (92 दिन) की वैरायटी आपके लिए सबसे बेस्ट है।
  3. यदि आपकी जमीन मध्यम से भारी काली है (M.P/Maharashtra Region) और आप कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई करवाना पसंद करते हैं, तो इसकी ऊंचाई के कारण यह बिल्कुल उपयुक्त है।

लेकिन यदि आपकी जमीन बहुत ज्यादा रेतीली या हल्की पथरीली है, जहां पानी रोकने की क्षमता बिल्कुल नहीं है, तो फिर आपको इसकी जगह किसी अन्य सूखा-रोधी किस्म की तरफ जाना चाहिए। यदि आपके पास सिंचाई की उत्तम व्यवस्था है, तो आप मध्य प्रदेश के लिए सोयाबीन की बेस्ट वैरायटी की सूची से अन्य विकल्प भी चुन सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. NRC 142 सोयाबीन कितने दिनों में पकती है? Ans: यह किस्म मात्र 90 से 95 दिनों में पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है। यह एक अगेती (Early) किस्म है।

Q2. क्या NRC 142 में पीला मोजेक रोग आता है? Ans: नहीं, यह वैरायटी पीला मोजेक वायरस (YMV) के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी (High Resistant) है।

Q3. इस वैरायटी का औसत उत्पादन कितना है? Ans: इसका औसत उत्पादन लगभग 8 से 10 क्विंटल प्रति एकड़ तक आसानी से मिल जाता है।

Q4. क्या इसकी कटाई हार्वेस्टर से की जा सकती है? Ans: हां, इसकी पहली फली जमीन से काफी ऊपर (15-20 सेमी) लगती है, इसलिए यह कंबाइन हार्वेस्टर के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।

Q5. NRC 142 सोयाबीन का मूल नाम क्या है और इसे किसने बनाया है? Ans: इसका आधिकारिक नाम ‘अहिल्या 142’ है और इसे भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (IISR), इंदौर द्वारा विकसित किया गया है।

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