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सोयाबीन में तना गलन: लक्षण, कारण, बचाव और सही इलाज

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क्या आपकी सोयाबीन के पौधे अचानक मुरझाने लगे हैं? क्या तने के पास काला-भूरा सड़न दिख रहा है या खेत में जगह-जगह पौधे सूखकर गिर रहे हैं? अगर हाँ, तो यह सोयाबीन में तना गलन (Stem Rot) की शुरुआत हो सकती है।

किसान भाई, तना गलन एक ऐसा छुपा हुआ दुश्मन है जो ऊपर से छोटा लगता है, लेकिन नीचे जड़ और तने के पास चुपचाप पौधे को खोखला करता रहता है। अक्सर इसे पानी की कमी, ज्यादा बारिश, खाद की कमी या सामान्य पीलापन समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जब तक सही पहचान होती है, तब तक खेत में बड़े-बड़े पैच बन जाते हैं और पौधे मरने लगते हैं।

इस विस्तृत लेख में हम सोयाबीन में तना गलन के लक्षण, कारण, सही पहचान, खेत में फैलाव रोकने के उपाय, बीज उपचार, जैविक नियंत्रण और अगले सीजन की तैयारी को बहुत ही आसान भाषा में समझेंगे।

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सोयाबीन में तना गलन क्या है?

सोयाबीन में तना गलन कोई एक अकेली बीमारी नहीं है। किसान जब ‘तना गलन’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं, तो उसमें मुख्य रूप से मिट्टी से जनित (Soil-borne) ये 3 बड़ी समस्याएं शामिल होती हैं:

  1. कॉलर रॉट / स्केलेरोटियम ब्लाइट (Collar rot / Sclerotium blight): भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR) के अनुसार, यह Sclerotium rolfsii नाम की फफूंद से होता है। गर्म और अत्यधिक नमी (Humid) वाला मौसम इस रोग को तेजी से बढ़ाता है।
  2. चारकोल रॉट (Charcoal rot): यह Macrophomina phaseolina नाम के फंगस से होने वाला बीज और मिट्टी जनित रोग है। यह विपरीत मौसम यानी सूखे (Dry condition), कम नमी और 25–35°C के उच्च तापमान में ज्यादा आक्रामक होता है।
  3. राइजोक्टोनिया रूट एंड स्टेम रॉट (Rhizoctonia root and stem rot): इसमें तने और जड़ के पास जंग जैसे भूरे, सूखे और धंसे हुए निशान (Rusty-brown, dry sunken lesions) दिखते हैं। यह छोटे पौधों (Seedlings) को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाता है, लेकिन बड़े पौधों को भी कमजोर कर सकता है।

सतर्क रहें: यदि आपने हाल ही में बोनी की है और पौधे छोटे हैं, तो तना गलन को हल्के में न लें। खासकर उन खेतों में जहाँ पानी रुकता है, बीज उपचार नहीं किया गया था, या पिछले साल भी यह बीमारी आई थी।

सोयाबीन में तना गलन के मुख्य लक्षण

सही पहचान ही सही इलाज की पहली सीढ़ी है। गलत पहचान होने पर गलत दवा डल जाती है, जिससे पैसा और समय दोनों बर्बाद होते हैं। इन 5 मुख्य लक्षणों पर नजर रखें:

सोयाबीन में तना गलन और जड़ सड़न में फर्क (पहचान तालिका)

खेत में सही निर्णय लेने के लिए सोयाबीन में जड़ सड़न और तना गलन के बीच का यह बुनियादी अंतर जरूर समझें:

समस्यामुख्य जगहपहचानज्यादा खतरा कब?तुरंत क्या करें?
तना गलन / कॉलर रॉटजमीन के पास का तनासफेद फफूंद, भूरा-काला कॉलर, पौधा गिरनागर्म + उमस भरा (Humid) मौसमरोगी पौधे निकालें, पानी न रुकने दें
चारकोल रॉटजड़ + तने का अंदरूनी भागतना अंदर से स्लेटी/काले दानों (Spots) वालागर्म + सूखा (Dry) मौसममॉइस्चर स्ट्रेस कम करें, रोगी पौधे हटाएं
राइजोक्टोनिया रॉटजड़ और निचला तनाजंग जैसे भूरे सूखे धंसे निशान (Rusty lesions)शुरुआती से मध्य सीजन तकबीज उपचार और जल निकासी दुरुस्त करें
साधारण पानी भरावपूरी की पूरी जड़जड़ काली पड़ना, सड़न की बदबू आनातेज बारिश / नीचा खेतखेत से पानी बाहर निकालें
पोषक तत्वों की कमीकेवल पत्तियोंपत्तियों में पीलापन, लेकिन तना बिल्कुल स्वस्थपोषण का असंतुलनसोयाबीन में पीलापन दूर करने के उपाय पढ़ें

सोयाबीन में तना गलन क्यों लगती है? (मुख्य कारण)

  1. बिना बीज उपचार के बोनी करना: यह सबसे बड़ा कारण है। राष्ट्रीय वनस्पति स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान (NIPHM) के अनुसार, बीज उपचार न करने से फंगस शुरुआती अवस्था में ही पौधे पर हमला कर देता है। इसलिए बोनी से पहले सोयाबीन बीज उपचार के लिए सही fungicide चुनना बेहद जरूरी है।
  2. खेत में जलभराव (Waterlogging): भारी काली मिट्टी वाले खेतों में अगर बारिश के बाद 24 से 48 घंटे तक पानी जमा रहता है, तो जड़ें कमजोर हो जाती हैं। ऐसे जलभराव वाले खेतों में सुधार के लिए सोयाबीन का खेत कैसे तैयार करें वाले तरीके पर जरूर ध्यान देना चाहिए।
  3. बहुत गहरी बोनी करना: बीज को मिट्टी में बहुत ज्यादा गहरा (5 cm से अधिक) दबा देने से अंकुर को बाहर आने में लंबा समय लगता है। पौधा जितने लंबे समय तक मिट्टी के अंदर दबा रहेगा, डैम्पिंग-ऑफ (Damping-off) और कॉलर रॉट का खतरा उतना ही बढ़ जाएगा। (आदर्श गहराई 3–5 cm है)।
  4. लगातार एक ही खेत में सोयाबीन बोना: एक ही खेत में साल दर साल सोयाबीन उगाने से मिट्टी में हानिकारक फंगस की संख्या बहुत बढ़ जाती है। ICAR-IISR के अनुसार, फसल चक्र न अपनाने से रोग का दबाव बढ़ता है।
  5. पोषक तत्वों का असंतुलन: केवल DAP डाल देने से काम नहीं चलता। अगर मिट्टी में पोटाश, सल्फर, जिंक या बोरॉन की कमी है, तो जड़ें कमजोर रहेंगी। इसलिए खेत में वैज्ञानिक तरीके से सोयाबीन में पोषक तत्व प्रबंधन करना चाहिए।

सोयाबीन में तना गलन की सही पहचान कैसे करें? (Field Scouting)

सोयाबीन में तना गलन दिखने पर तुरंत क्या करें?

याद रखें, मिट्टी जनित (Soil-borne) तना गलन में केवल पत्तियों पर फंगीसाइड स्प्रे करने से चमत्कार नहीं होता। सड़ा हुआ तना वापस ठीक नहीं हो सकता, लेकिन हम बीमारी को फैलने से रोक सकते हैं:

सोयाबीन में तना गलन रोकने के लिए बीज उपचार (Seed Treatment)

यह इस बीमारी का सबसे सस्ता और 100% कारगर इलाज है। रोग आने के बाद इलाज करने से बेहतर है उसे आने ही न दिया जाए।

क) रासायनिक बीज उपचार (Chemical Approach)

NIPHM के सोयाबीन IPM पैकेज के अनुसार:

ख) जैविक बीज उपचार (Biological Approach)

महत्वपूर्ण क्रम: हमेशा पहले रासायनिक फंगीसाइड लगाएं, उसके बाद ही राइजोबियम (Rhizobium) और PSB कल्चर का टीका लगाएं। कल्चर लगाने के बाद बीजों को तेज धूप में बिल्कुल न सुखाएं और जल्द से जल्द बोनी करें। ट्राइकोडर्मा और केमिकल फंगीसाइड को सीधे एक साथ मिक्स न करें।

खेत की तैयारी: तना गलन रोकने की असली नींव

तना गलन से बचने के लिए कौन सी वैरायटी चुनें?

हालाँकि कोई भी वैरायटी 100% रोग-प्रूफ नहीं होती, लेकिन उन्नत किस्में रोग के दबाव को काफी हद तक झेल लेती हैं। NIPHM और तेलहन विकास निदेशालय के अनुसार कुछ प्रमुख प्रतिरोधी/सहनशील किस्में इस प्रकार हैं:

तना गलन आने पर कौन सी 5 गलतियां कभी न करें?

  1. गलती 1: केवल पत्तियों पर फंगीसाइड का छिड़काव करना और जड़ों की सड़न पर ध्यान न देना।
  2. गलती 2: हर पीले पौधे को तना गलन समझकर बिना सोचे-समझे महंगी दवाएं डालना (पहले तना चेक करें कि वह साफ है या नहीं, इसके लिए सोयाबीन में पीलापन के कारण और उपाय विस्तार से पढ़ें)।
  3. गलती 3: रोगी और सूखे पौधों को खेत के अंदर ही पड़े रहने देना, जिससे फंगस मिट्टी में दोबारा मिल जाता है।
  4. गलती 4: फंगल इन्फेक्शन होने पर बेवजह कीटनाशक डालना। अगर तना गलन के साथ कीटों का भी हमला है, तो soybean semilooper और girdle beetle control guide का सहारा लें।
  5. गलती 5: बिना फसल चक्र अपनाए, एक ही खेत में लगातार कई सालों तक केवल सोयाबीन की ही बोनी करना।

सोयाबीन में तना गलन का स्टेज-वाइज मैनेजमेंट प्लान

1. 0 से 15 दिन की फसल (Seedling Stage)

2. 15 से 35 दिन की फसल (Vegetative Stage)

3. 35 से 55 दिन की फसल (Flowering Stage)

4. फूल आने से फली बनने तक (Pod Filling Stage)

जैविक और कम लागत वाले उपाय क्या हैं?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी खेत के कितने हिस्से में फैली है।

अगर खेत में केवल 2 से 5% पौधे ही प्रभावित हैं, तो समय पर रोगी पौधों को हटाकर और जल निकासी सुधारकर बाकी की 95% से अधिक स्वस्थ फसल को पूरी तरह बचाया जा सकता है। अपनी फसल के बेहतर विकास और बम्पर उत्पादन के लिए आप सोयाबीन पैदावार बढ़ाने के 10 तरीके भी पढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. सोयाबीन में तना गलन की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?

खड़ी फसल में छिड़काव से ज्यादा बोनी के समय Thiram 37.5% + Carboxin 37.5% DS (@ 3 g/kg seed) या ट्राइकीडर्मा से किया गया बीज उपचार ही इसकी सबसे अचूक दवा है। खड़ी फसल के लिए local KVK की सलाह से ही फंगीसाइड ड्रेंचिंग करें।

2. क्या तना गलन से प्रभावित पौधा वापस हरा हो सकता है?

अगर तने का निचला हिस्सा चारों तरफ से सड़कर काला पड़ चुका है, तो वह पौधा वापस ठीक नहीं हो सकता। हमारा मुख्य उद्देश्य बाकी बचे स्वस्थ पौधों को बचाना होना चाहिए।

3. सोयाबीन में तना गलन क्यों लगती है?

इसके मुख्य कारण बिना बीज उपचार के बोनी करना, खेत में 24-48 घंटे पानी रुकना, बहुत गहरी बोनी, लगातार एक ही खेत में सोयाबीन लेना और असंतुलित खाद का उपयोग हैं।

4. तना गलन और पीला मोजेक (Yellow Mosaic) में क्या अंतर है?

पीला मोजेक वायरस से होता है जिसमें पत्तियां पीली-हरी चितकबरी होती हैं पर तना स्वस्थ रहता. तना गलन फंगस से होता है जिसमें जमीन के पास का तना सड़ जाता है और जड़ कमजोर हो जाती है।

5. क्या ट्राइकोडर्मा से तना गलन पूरी तरह रुक सकती है?

हाँ, ट्राइकोडर्मा एक बेहतरीन जैविक फफूंदनाशक है। अगर इसे सुरक्षात्मक उपाय (Preventive) के रूप में बीज उपचार या सड़ी गोबर खाद के साथ मिट्टी में मिलाया जाए, तो यह बीमारी के असर को बेहद कम कर देता है।

सोयाबीन में तना गलन पर किसान भाई के लिए मेरी सीधी सलाह

मेरे अनुभव में सोयाबीन में तना गलन से बचने के लिए 3 बातें सबसे ज्यादा काम की हैं:

  1. बीज उपचार कभी मत छोड़ें: यह बहुत कम खर्चीला है, लेकिन फसल को शुरुआती सुरक्षा देता है।
  2. खेत को दलदल न बनने दें: सोयाबीन को सिर्फ नमी पसंद है, जड़ों में पानी का ठहराव नहीं।
  3. अंधाधुंध स्प्रे से बचें: हर पीले दिखते पौधे पर तुरंत कीटनाशक या यूरिया न डालें। पहले घुटनों के बल बैठकर पौधे की जड़ और तना चेक करें, फिर कोई निर्णय लें।

SmartKisan की सलाह: अगर आपको अपने खेत में थोड़े भी लक्षण दिख रहे हैं, तो आज ही खेत में 5-7 अलग-अलग जगहों से पौधे उखाड़कर उनके निचले तने को चाकू से चीरकर जरूर देखें। सही समय पर सही पहचान ही आपकी फसल का आधा इलाज है!

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