क्या आपकी तुअर की फसल बुवाई के 10–20 दिन बाद ही घास से दबने लगी है और आप सोच रहे हैं कि अब दवा डालें या निराई करवाएं? यही वह समय है जहां एक सही फैसला फसल को बचा सकता है और एक गलत दवा पौधों को झटका दे सकती है।
तुअर यानी अरहर की फसल देखने में मजबूत लगती है, लेकिन शुरुआती दिनों में यह खरपतवार से बहुत जल्दी दब जाती है। खासकर खरीफ सीजन में बारिश के बाद खेत में सांवा, मकरा, दूब, मोथा, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार और कई जगह बेलदार घास तेजी से निकलती है। अगर इन्हें समय पर नहीं रोका गया, तो तुअर की जड़, बढ़वार, शाखा और बाद में फूल-फली सब पर इसका सीधा असर दिखता है। इसके साथ ही समय-समय पर मौसम के अनुसार खेती के कार्यों को मैनेज करने के लिए आप खरीफ 2026 के लिए ICAR की महत्वपूर्ण सलाह भी देख सकते हैं।
इस लेख में हम बिल्कुल practical तरीके से समझेंगे कि तुअर में बुवाई के बाद खरपतवार नियंत्रण कैसे करें, कौन सी दवा कब काम आती है, कब हाथ से निराई करनी चाहिए और crop safety के लिए कौन-कौन सी गलतियां बिल्कुल नहीं करनी हैं।
तुअर में खरपतवार नियंत्रण इतना जरूरी क्यों है?
तुअर की फसल की शुरुआती ग्रोथ काफी धीमी होती है। पहले 25–35 दिन पौधा अपनी जड़ें जमाने और शुरुआती बढ़वार में लगा रहता है। इसी समय खरपतवार बहुत तेजी से उगकर फसल का पोषण, नमी, धूप और जगह छीन लेते हैं।
- क्रिटिकल अवधि: TNAU Agritech के अनुसार short season pigeonpea में शुरुआती पहले 30 दिन खरपतवार नियंत्रण के हिसाब से सबसे अहम माने जाते हैं। एक बार 45 दिन बीत जाने पर की गई निराई उतनी असरदार नहीं होती, जितनी 25 और 45 दिन के आसपास दो बार की गई निराई हो सकती है।
- कीट और रोगों का खतरा: खरपतवार सिर्फ खाद-पानी नहीं चुराते, बल्कि ये कई हानिकारक कीटों और रोगों के आश्रय स्थल (shelter) भी बन जाते हैं। खेत में ज्यादा घास होने पर हवा का फ्लो कम हो जाता है, जिससे नमी ज्यादा देर तक टिकी रहती है और सोयाबीन में जड़ सड़न रोग का इलाज जैसी घातक समस्याओं की तरह ही तुअर में भी रूट रॉट का खतरा बढ़ जाता है।
- दीर्घकालिक नुकसान: सबसे बड़ी बात यह है कि तुअर एक लंबी अवधि की फसल है। अगर शुरुआत में ही इसका पौधा कमजोर रह गया, तो बाद में 2–3 स्प्रे और भारी मात्रा में खाद देने के बाद भी उसकी पूरी भरपाई करना मुश्किल हो जाता है।
तुअर में बुवाई के बाद खरपतवार नियंत्रण का सही समय
तुअर में खरपतवार नियंत्रण को एक दिन का काम समझने के बजाय इसे 3 मुख्य चरणों (Stages) में व्यवस्थित करना चाहिए:
- पहला चरण (0–3 दिन): यह समय Pre-emergence herbicide (अंकुरण पूर्व दवा) के इस्तेमाल का होता है। इस समय डाली गई दवा मिट्टी की ऊपरी सतह पर एक सुरक्षात्मक परत (protection layer) बना देती है, जो नए निकलने वाले खरपतवारों को शुरुआती स्टेज में ही रोक देती है। खरीफ के इस मौसम में अन्य फसलों के प्रबंधन के लिए आप जुलाई में बोई जाने वाली फसलें की सूची भी देख सकते हैं।
- दूसरा चरण (15–25 दिन बाद): इस अवधि में खेत में जो खरपतवार प्री-इमर्जेंस दवा से बच गए हों या नए निकल आए हों, उन्हें पहचानकर Post-emergence (अंकुरण पश्चात) दवा या हल्की निराई की जरूरत पड़ती है।
- तीसरा चरण (30–50 दिन): फसल को पूरी तरह कंपटीशन-फ्री (competition-free) रखने के लिए इस समय एक Hand weeding (हाथ से निराई), wheel hoe या interculture बहुत काम आता है। कई कृषि अनुसंधान ट्रायल्स में पाया गया है कि दवा के साथ एक मैनुअल निराई का कॉम्बिनेशन अकेली दवा के मुकाबले कहीं बेहतर परिणाम देता है।
तुअर में कौन-कौन से खरपतवार ज्यादा नुकसान करते हैं?
तुअर के खेत में खरपतवार आपकी मिट्टी के प्रकार, पिछली फसल, बारिश और बुवाई के तरीके के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। मुख्य रूप से इन्हें 3 श्रेणियों में बांटा जाता है:
1. संकरी पत्ती वाली घास (Monocot Weeds)
ये गेहूं या धान जैसी पतली पत्तियों वाली घास होती हैं। खरीफ सीजन में खेत में सांवा, मकरा, और दूब जैसी घास बहुत तेजी से फैलती है।
- यह घास तुअर की कतारों (rows) के बीच की खाली जगह को जल्दी घेर लेती है।
- अगर आपने लाइन सोइंग (Line Sowing) की है और बारिश अच्छी हुई है, तो 12–18 दिन में यह घास पूरे खेत को ढकने लगती है।
- इनके नियंत्रण के लिए Quizalofop ethyl जैसी ग्रास-किलर दवा का विकल्प चुना जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल तभी करना चाहिए जब खेत में मुख्य समस्या सिर्फ संकरी पत्ती की घास की हो और फसल किसी भी प्रकार के स्ट्रेस (तनाव) में न हो।
2. चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार (Dicot Weeds)
इसमें जंगली चौलाई, हजारदाना, भुई आंवला, और कद्दूवर्गीय बेलदार खरपतवार शामिल होते हैं।
- यदि ये खरपतवार तुअर के छोटे पौधों के बराबर या उनसे ऊंचे हो जाएं, तो फसल तक पहुंचने वाली धूप (sunlight) को पूरी तरह ब्लॉक कर देते हैं।
- ऐसी स्थिति में तुअर का पौधा लंबा तो खींच जाता है, लेकिन उसका तना कमजोर रह जाता है और ब्रांचिंग (शाखाएं) बहुत कम हो जाती हैं।
- इनके नियंत्रण के लिए Imazethapyr जैसे पोस्ट-इमर्जेंस हर्बीसाइड का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसकी डोज और टाइमिंग पर विशेष ध्यान देना होता है। TNAU के अनुसार, लेबर की कमी होने पर Pendimethalin के इस्तेमाल के बाद Imazethapyr को खरपतवारों की शुरुआती 2–3 पत्ती की स्टेज पर डालना सबसे प्रभावी रहता है।
3. मोथा और मिक्स्ड खरपतवार (Mixed Weed Problem)
कई खेतों में मोथा (Nut sedge), संकरी पत्ती की घास और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार एक साथ हमला करते हैं। ऐसे खेतों में किसी एक दवा से पूरा कंट्रोल मिलना नामुमकिन होता है।
- समाधान: मिक्स्ड प्रॉब्लम में सबसे पहले खेत और फसल की स्थिति देखें। अगर फसल छोटी है, खरपतवार 2–3 पत्ती की स्टेज पर हैं और मिट्टी में पर्याप्त नमी है, तभी सिलेक्टिव पोस्ट-इमर्जेंस विकल्प पर जाएं।
- अगर खरपतवार बहुत बड़े हो चुके हैं, तुअर के पौधे कमजोर हैं या खेत में पानी भरा हुआ है, तो Chemical दवा के बजाय हल्की निराई + बाद में जरूरत के अनुसार निर्देशित स्प्रे (Directed Spray) करना ही सबसे सुरक्षित (safe) तरीका है।
तुअर में Pre-emergence दवा: बुवाई के तुरंत बाद क्या डालें?
तुअर में बुवाई के बाद सबसे कॉमन, सुरक्षित और व्यावहारिक प्री-इमर्जेंस विकल्प Pendimethalin (पेंडिमेथलीन) है। किसान भाई इसे आम भाषा में “बुवाई के तुरंत बाद वाली घास रोकने की दवा” भी कहते हैं।
TNAU Redgram Production Guide Recommendation: > पेंडिमेथलीन को 0.75 kg/ha active ingredient (सक्रिय तत्व) के हिसाब से इस्तेमाल करना चाहिए। यानी 30% EC फॉर्मूलेशन में लगभग 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर, जिसे बुवाई के 3 दिन के भीतर 500 लीटर पानी में मिलाकर फ्लैट फैन नोजल (flat fan nozzle) से समान रूप से स्प्रे करना चाहिए। इसके बाद आवश्यकतानुसार 30–35 DAS (बुवाई के दिन) पर एक हाथ से निराई (Hand Weeding) करने की सलाह दी जाती है।
Pendimethalin और अन्य दवाओं का Practical Acre Dose
अगर आप बाजार से प्रचलित फॉर्मूलेशन ला रहे हैं, तो प्रति एकड़ और प्रति हेक्टेयर का सही हिसाब इस तालिका (Table) से समझें:
| दवा / कृषि कार्य | सही समय | प्रति हेक्टेयर डोज | प्रति एकड़ अनुमानित डोज | पानी की मात्रा | खास सावधानी |
| Pendimethalin 30% EC | 0–3 DAS | 2.5 L/ha | करीब 1 L/acre | 180–220 L/acre | मिट्टी में अच्छी नमी होना अनिवार्य है |
| Hand Weeding (निराई) | 30–35 DAS | — | — | — | मुख्य पौधे की जड़ों को ज्यादा न हिलाएं |
| Imazethapyr 10% SL | 15–25 DAS (छोटे खरपतवार) | लेबल/एक्सटेंशन अनुसार | लगभग 240–300 ml/acre (लेबल अनुसार) | 120–160 L/acre | फसल किसी भी प्रकार के स्ट्रेस में न हो |
| Quizalofop ethyl 5% EC | 15–25 DAS (ग्रास वी्ड्स) | 50 g ai/ha | करीब 400 ml/acre | 120–160 L/acre | इसका इस्तेमाल सिर्फ घास वाली समस्या में करें |
| निराई-गुड़ाई (मैनुअल) | 20–35 DAS | — | — | — | बिना दवा (No-chemical) वाले खेतों में जरूरी |
ध्यान दें: फॉर्मूलेशन बदलते ही दवा की डोज बदल जाती है। 30 EC, 38.7 CS, 10 SL, या 5 EC — इन सबका गणित अलग होता है। इसलिए अंतिम डोज हमेशा प्रोडक्ट के लेबल और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही तय करें।
Pendimethalin कब और कैसे सबसे शानदार रिजल्ट देती है?
- जब खेत की मिट्टी में हल्की नमी मौजूद हो।
- बुवाई के तुरंत बाद (अधिकतम 72 घंटे के भीतर) स्प्रे किया गया हो।
- स्प्रे करने के बाद मिट्टी की ऊपरी परत को किसी औजार या पैर से डिस्टर्ब (उथल-पुथल) न किया जाए।
- फ्लैट फैन नोजल का उपयोग करके पूरी जमीन पर एक समान (uniform) स्प्रे किया गया हो।
- खेत में पहले से बड़े खरपतवार उगे हुए न हों।
पेंडिमेथलीन पहले से बड़े हो चुके खरपतवारों को जलाने वाली दवा नहीं है; इसका एकमात्र काम मिट्टी में नए उगने वाले बीजों के अंकुरण को रोकना है। इसलिए अगर बुवाई से पहले ही खेत में घास खड़ी है, तो पहले खेत की अच्छी सफाई जरूरी है।
अगर Pendimethalin डालना छूट गया तो क्या करें?
कई बार लगातार बारिश, लेबर की कमी, स्प्रेयर की खराबी या जल्दबाजी के कारण बुवाई के शुरुआती 3 दिनों में पेंडिमेथलीन का छिड़काव छूट जाता है। अगर बुवाई को 4 दिन से ज्यादा हो चुके हैं और तुअर का अंकुरण (germination) शुरू हो गया है, तो प्री-इमर्जेंस स्प्रे का समय निकल चुका है। अब स्प्रे करने से फसल को भारी नुकसान (crop injury) हो सकता है।
ऐसी स्थिति में आपके पास 2 सुरक्षित रास्ते बचते हैं:
- पहला रास्ता (Manual/Mechanical Weeding): अगर खेत छोटा है या लेबर आसानी से उपलब्ध है, तो बुवाई के 18–22 दिन पर पहली हल्की निराई-गुड़ाई कर दें। इसके बाद बुवाई से पहले बीजों की गुणवत्ता जांचने के लिए हमेशा बीज अंकुरण परीक्षण करने की सही विधि अपनानी चाहिए। TNAU के अनुसार, यदि कोई हर्बीसाइड नहीं डाला गया है, तो तुअर में 20 और 35 DAS पर दो बार हाथ से निराई करना सबसे बेहतरीन विकल्प है।
- दूसरा रास्ता (Post-emergence Selective Herbicide): अगर लेबर की समस्या है, तो फसल और खरपतवार दोनों के उगने का इंतजार करें और 15–25 दिन की स्टेज पर सिलेक्टिव पोस्ट-इमर्जेंस दवा का चुनाव करें। लेकिन यह तभी करें जब फसल पूरी तरह स्वस्थ हो और खेत में जलभराव की समस्या न हो।
तुअर में Post-emergence दवा: कब और कौन सी डालें?
फसल और खरपतवार दोनों के बाहर निकलने के बाद डाली जाने वाली दवा को पोस्ट-इमर्जेंस कहते हैं। तुअर में इसका इस्तेमाल बहुत ही फूंक-फूंक कर करना चाहिए, क्योंकि जरा सी भी चूकी हुई डोज या गलत टाइमिंग फसल को तगड़ा झटका दे सकती है।
Imazethapyr का इस्तेमाल कब और क्यों करें?
Imazethapyr का उपयोग मुख्य रूप से चौड़ी पत्ती वाले और कुछ चुनिंदा मिक्स्ड खरपतवारों के नियंत्रण के लिए किया जाता है। विभिन्न शोध रिपोर्टों में इसे तुअर में 15–25 DAS के आसपास सबसे ज्यादा प्रभावी पाया गया है।
- FAO AGRIS की स्टडी के अनुसार: अरहर खरपतवार अध्ययन में पाया गया कि बुवाई के 20 दिन बाद (20 DAS) Imazethapyr @ 75 g/ha का इस्तेमाल करने से एकबीजपत्री (monocot) और द्विबीजपत्री (dicot) दोनों प्रकार के खरपतवारों के घनत्व और उनके सूखे वजन (dry weight) में भारी कमी आई, जिससे पैदावार में होने वाले बड़े नुकसान को रोका जा सका।
- Indian Journal of Agronomy (Kota, Rajasthan Trials 2020-21 से 2022-23): इन वैज्ञानिक परीक्षणों में सामने आया कि Pendimethalin 30 EC @ 0.75 kg/ha PE डालने के बाद, बुवाई के 20–25 दिन पर Imazethapyr 10 SL @ 100 g/ha का पोस्ट-इमर्जेंस स्प्रे किया गया और फिर 50 DAS पर एक हल्की अंतर-कृषि (inter-cultivation) की गई। इस कॉम्बिनेशन से 60 DAS पर खरपतवार नियंत्रण दक्षता (Weed Control Efficiency) 84.39% रही, तथा अनाज की पैदावार 1,868 kg/ha दर्ज की गई, जो कि बिना दवा और बिना निराई वाले खेतों (weedy check) की तुलना में 61.73% अधिक उपज थी।
Imazethapyr डालते समय Crop Safety के कड़े नियम
Imazethapyr भले ही सिलेक्टिव हर्बीसाइड हो, लेकिन यह हर परिस्थिति में 100% सेफ नहीं होती। इसका स्प्रे करते समय इन बातों की गांठ बांध लें:
- तुअर के पौधे पूरी तरह स्वस्थ और एक्टिव ग्रोथ में होने चाहिए।
- खेत की मिट्टी में कीचड़ या पानी का भराव बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
- स्प्रे के तुरंत पहले या बाद में अत्यधिक तेज गर्मी या सूखे (drought stress) का मौसम न हो।
- खरपतवार अपनी शुरुआती 2–3 पत्तियों की स्टेज पर ही होने चाहिए (ज्यादा बड़े खरपतवारों पर यह काम नहीं करती)।
- ओवरडोज (Overdose) गलती से भी न करें; नोजल को एक ही जगह पर दोबारा न लहराएं (No overlap spray)।
- सबसे जरूरी बात: इसे कभी भी किसी कीटनाशक (Insecticide), फंगीसाइड, टॉनिक या अन्य वाटर सॉल्युबल खादों के साथ मिक्स न करें। रासायनिक खादों के सही उपयोग को समझने के लिए आप DAP vs NPK फर्टिलाइजर तुलना पढ़ सकते हैं।
अगर आपकी फसल पहले से पीली है, उसमें जड़ सड़न की शिकायत है, या पानी भरा हुआ है, तो पहले फसल को ठीक होने दें। ऐसे तनावग्रस्त खेत में यह दवा भारी नुकसान पहुंचा सकती है Meso-level पर।
Grass Weeds (घास) ज्यादा हों तो क्या करें?
अगर आपके खेत में चौड़ी पत्ती के खरपतवार नाममात्र हैं और सिर्फ संकरी पत्ती वाली घास (जैसे सांवा, मकरा) का भयंकर प्रकोप है, तो आप Quizalofop ethyl जैसे ग्रास-स्पेसिफिक हर्बीसाइड का चुनाव कर सकते हैं।
TNAU ने तुअर में केवल घासीय खरपतवारों (grassy weeds) की समस्या होने पर Quizalofop ethyl @ 50 g ai/ha को खरपतवारों की छोटी अवस्था में डालने की सिफारिश की है। इसके अतिरिक्त, यदि चौड़ी पत्ती और घास दोनों एक साथ बड़ी मात्रा में मौजूद हों, तो Imazethapyr + Quizalofop ethyl के टैंक मिक्स (tank mix) की सिफारिश भी कुछ विशेष परिस्थितियों में विस्तारक गाइडों में मिलती है।
टैंक मिक्स करते समय सावधानी: दो अलग-अलग हर्बीसाइड्स को आपस में मिलाना हमेशा जोखिम भरा हो सकता है। पानी की क्वालिटी, तापमान और फसल की वैरायटी बदलते ही इसका रिएक्शन बदल सकता है। इसलिए यदि आप मिक्स स्प्रे करने की सोच रहे हैं तो:
- सबसे पहले प्रोडक्ट के ऑफिशियल लेबल को ध्यान से पढ़ें।
- स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि अधिकारी से पुष्टि करें।
- पूरे खेत में डालने से पहले एक छोटे से पैच (small patch test) पर स्प्रे करके 2 दिन देख लें कि फसल पर कोई विपरीत असर तो नहीं हो रहा।
Glyphosate (ग्लाइफोसेट) को लेकर सबसे बड़ी चेतावनी
कई किसान भाई तुअर की बुवाई के बाद बची हुई खाली जगहों या मेड़ों पर उगने वाली घास को मारने के लिए Glyphosate (ग्लाइफोसेट) के इस्तेमाल को लेकर असमंजस में रहते हैं। यहाँ वैज्ञानिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर लें:
Glyphosate एक Non-selective Herbicide है: इसका सीधा मतलब यह है कि यह किसी भी हरे-भरे पौधे के संपर्क में आते ही उसे पूरी तरह नष्ट कर देता है। NPIC (National Pesticide Information Center) के अनुसार, ग्लाइफोसेट बिना किसी भेदभाव के लगभग सभी पौधों को मार सकता है।
इसलिए, तुअर की बुवाई के बाद मुख्य फसल वाले क्षेत्र (main crop area) के भीतर ग्लाइफोसेट का छिड़काव करना खुदकुशी जैसा है। अगर हवा के झोंके से इसकी हल्की सी भी फुहार (spray drift) तुअर की पत्तियों पर चली गई, तो पौधा तुरंत पीला पड़ जाएगा, उसकी ग्रोथ हमेशा के लिए रुक जाएगी या वह पूरी तरह सूखकर मर जाएगा।
ग्लाइफोसेट का सही व सुरक्षित इस्तेमाल केवल इन स्थितियों में करें:
- बुवाई से पहले पूरी तरह खाली पड़े खेतों की सफाई के लिए।
- खेत की मेड़ों या बाउंड्री पर, जब हवा बिल्कुल शांत हो।
- फसल के पौधों से दूर, नोजल के आगे प्रोटेक्टिव शील्ड (Shield) लगाकर ताकि दवा फसल को न छुए।
तुअर में मैनुअल निराई-गुड़ाई कब और कैसे करें?
केमिकल दवाओं के अलावा या उनके साथ मिलाकर निराई-गुड़ाई का एक सटीक और व्यावहारिक शेड्यूल (Schedule) नीचे दिया गया है:
1. बिना दवा (No-chemical) वाले खेतों के लिए:
यदि आपने बुवाई के समय कोई प्री-इमर्जेंस दवा नहीं डाली है, तो पारंपरिक रूप से इस टाइमलाइन का पालन करें:
- पहली निराई: बुवाई के 18–22 दिन बाद (18–22 DAS)
- दूसरी निराई: बुवाई के 32–38 दिन बाद (32–38 DAS)
- तीसरी अंतर-कृषि (Interculture): बुवाई के 45–50 दिन बाद (यदि खेत में दोबारा घास दिखती है)(TNAU की आधिकारिक सलाह भी यही है कि बिना हर्बीसाइड वाले खेतों में 20 and 35 DAS पर दो बार हाथ से अच्छी निराई की जानी चाहिए।)
2. Pendimethalin (प्री-इमर्जेंस) वाले खेतों के लिए:
अगर आपने बुवाई के तुरंत बाद पेंडिमेथलीन का स्प्रे कर दिया था और उसका कंट्रोल अच्छा दिख रहा है, तो आपका लेबर का खर्च बहुत कम हो जाएगा:
- 30–35 DAS: इस समय पेंडिमेथलीन का असर कम होने लगता है और कुछ जिद्दी खरपतवार बाहर आने लगते हैं। इस समय एक हल्की हाथ से निराई (hand weeding) या व्हील हो (wheel hoe) चला दें।
- 45–50 DAS: आवश्यकतानुसार एक बार कल्टीवेटर या डोरा (interculture) चला दें। इससे बची-खुची घास भी साफ हो जाएगी और मिट्टी में हवा का संचार (aeration) सुधरेगा।
3. Post-emergence दवा वाले खेतों के लिए:
यदि आपने खरपतवारों को मारने के लिए 15–25 DAS पर Imazethapyr या कोई अन्य खड़ी फसल वाली दवा डाली है, तो स्प्रे करने के तुरंत बाद खेत में निराई या डोरा बिल्कुल न चलाएं। दवा को पौधे के सिस्टम में जाकर उसे जड़ से सुखाने के लिए कम से कम 7 से 10 दिन का समय चाहिए होता है।
- अगर आप 2–3 दिन में ही मिट्टी हिला देंगे, तो खरपतवार दोबारा जीवित हो सकते हैं। छिड़काव के 10 दिन बाद जो खरपतवार बच जाएं, उन्हें हाथ से उखाड़ लें।
Line Sowing और Spacing: खरपतवार नियंत्रण के अचूक हथियार
तुअर की खेती में खरपतवारों को केवल रसायनों के भरोसे नहीं जीता जा सकता। बुवाई की तकनीक और पौधों के बीच की दूरी (spacing) इसमें बहुत बड़ा रोल अदा करती है। आधुनिक खेती में कतारबद्ध बुवाई के लिए आप ऑटोमैटिक सीड ड्रिल मशीन गाइड की मदद ले सकते हैं।
- कतारों में बुवाई (Line Sowing) के फायदे: जब आप कतारों में सही दूरी पर बोनी करते हैं, तो कतारों के बीच खाली जगह में व्हील हो (wheel hoe), साइकिल वीडर या कल्टीवेटर आसानी से चलाया जा सकता है। इससे लेबर की लागत में भारी कमी आती है और मुख्य फसल के पौधों को कोई चोट नहीं पहुंचती।
- ब्रॉडकास्टिंग (छिड़काव विधि) का नुकसान: छिड़काव विधि से बुवाई करने पर पौधे आड़े-तिरछे उगते हैं। ऐसी स्थिति में मैनुअल निराई करते समय तुअर के अच्छे पौधे भी उखड़ जाते हैं, और दवाओं का स्प्रे भी एक समान रूप से नहीं हो पाता।
वैज्ञानिक Spacing गाइडलाइंस (TNAU Redgram Guide):
फसल की अवधि और किस्म के अनुसार कतार से कतार की दूरी इस प्रकार रखें:
- मध्यम अवधि की तुअर (Medium duration): 60 से 90 cm की रो स्पेसिंग।
- लंबी अवधि की तुअर (Long duration): 90 से 120 cm की रो स्पेसिंग।
- शुद्ध फसल (Pure crop) के लिए TNAU की विशिष्ट सिफारिशें: किस्मों के आधार पर 45 x 20 cm, 45 x 30 cm या 90 x 30 cm की दूरी रखी जाती है। संकरी दूरी (Narrow spacing) रखने से फसल की कैनोपी जमीन को जल्दी ढक लेती है, जिससे खरपतवारों को उगने के लिए धूप नहीं मिलती और वे स्वतः ही दब जाते हैं।
Intercropping (अंर्तवर्तीय खेती) से खरपतवारों का प्राकृतिक दमन
तुअर एक ऐसी फसल है जिसकी कतारों के बीच की जगह का उपयोग सोयाबीन, उड़द, मूंग, मूंगफली, ज्वार या मक्के जैसी फसलों को सह-फसल के रूप में बोने के लिए किया जाता है। इसके लिए सोयाबीन का खेत तैयार करने का तरीका और उसकी बुवाई दूरी को समझना लाभदायक होता है।
TNAU Weed Management Insights: पारंपरिक उत्पादन प्रणालियों में यह सिद्ध हो चुका है कि सही इंटरक्रॉपिंग सिस्टम अपनाने से खेतों में खरपतवारों का प्रकोप 50% से 70% तक कम हो जाता है। कम ऊंचाई वाली और तेजी से फैलने वाली फसलें (Low-stature crops) जैसे लोबिया (cowpea), मूंग (greengram), उड़द (blackgram), मूंगफली (groundnut) और सोयाबीन जमीन पर हरी चादर बिछा देती हैं, जिससे खरपतवारों को पनपने का मौका ही नहीं मिलता।
इंटरक्रॉपिंग में दवा चुनते समय सबसे बड़ी सावधानी: जो हर्बीसाइड तुअर के लिए पूरी तरह सुरक्षित है, वह आपकी सह-फसल (intercrop) को बर्बाद कर सकता है।
- उदाहरण 1: यदि आपकी इंटरक्रॉप तुअर + सोयाबीन है, तो आपको ऐसी दवा चुननी होगी जो दलहन और सोयाबीन दोनों के लिए कंपैटिबल (compatible) हो। इसके लिए आप सोयाबीन में खरपतवार नियंत्रण गाइड की सहायता ले सकते हैं।
- उदाहरण 2: यदि आपने तुअर + मक्का लगाया है, और आप मक्के की खरपतवार नाशक दवा ‘Atrazine’ का इस्तेमाल करते हैं, तो वह आपकी मुख्य पल्स क्रॉप (तुअर) को पूरी तरह जला देगी। इसलिए मिश्रित खेती में कृषि वैज्ञानिकों की लिखित सलाह के बिना कोई केमिकल न डालें।
Crop Safety: तुअर में दवा डालते समय ये 12 स्वर्ण नियम याद रखें
खेतों में हर्बीसाइड से फसल जलने के जितने भी मामले सामने आते हैं, उनमें 90% गलती दवा की नहीं बल्कि उसे डालने के गलत तरीके की होती है। स्प्रे करने से पहले इस सेफ्टी चेकलिस्ट को जरूर पढ़ लें:
- मिट्टी में पर्याप्त नमी हो: प्री-इमर्जेंस दवाएं सूखी धूल जैसी मिट्टी पर काम नहीं करतीं। हल्की नमी होने पर ही पेंडिमेथलीन की फिल्म (layer) मिट्टी पर सही से सेट होती है।
- सही नोजल (Flat Fan Nozzle) का चुनाव: खरपतवार नाशक दवाओं के लिए हमेशा फ्लैट फैन नोजल या फ्लड जेट नोजल का ही प्रयोग करें।
- सिर्फ साफ पानी का इस्तेमाल करें: गंदे, मटमैले या कीचड़ वाले पानी से केमिकल का असर आधा रह जाता है।
- ओवरडोज (Overdose) से बचें: अधिक दवा डालने से फसल में पीलापन और बौनापन आ जाता है। मुख्य पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए दवाओं के बजाय सही समय पर SSP और DAP में अंतर समझकर सही खाद का चुनाव करें।
- तनावग्रस्त (Stressed) फसल पर स्प्रे न करें: अगर आपकी फसल पहले से ही कीटों, सूखे या रोग से स्ट्रेस में है, तो पोस्ट-इमर्जेंस हर्बीसाइड का स्प्रे तुरंत रोक दें।
- तेज हवा में छिड़काव वर्जित है: इससे दवा उड़कर पड़ोस के खेत की संवेदनशील फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है।
- स्प्रे ओवरलैप (Overlap) होने से बचाएं: जहां नोजल दो बार घूम जाता है, वहां दवा की डबल डोज हो जाती है और फसल जल जाती है।
- पोस्ट-इमर्जेंस स्प्रे के तुरंत बाद निराई न करें: कम से कम 7-10 दिनों तक मिट्टी को बिल्कुल न छुएं ताकि दवा अपना पूरा सिस्टेमिक असर दिखा सके।
- अंधाधुंध मिक्सिंग (Tank Mix) से बचें: हर्बीसाइड के साथ अपनी मर्जी से कोई भी कीटनाशक या फंगीसाइड मिक्स न करें।
- बड़े खरपतवारों पर चमत्कार की उम्मीद न रखें: पोस्ट-इमर्जेंस दवाएं केवल तभी तक कारगर हैं जब खरपतवार छोटे यानी 2 से 4 पत्ती वाले हों।
- इंटरक्रॉप की संवेदनशीलता का ध्यान रखें: तुअर + सोयाबीन या तुअर + मक्का, हर कॉम्बिनेशन की केमिकल सहन करने की क्षमता अलग होती है।
- प्रोडक्ट का लेबल ही आपका अंतिम गाइड है: शीशी पर लिखे सरकारी निर्देश को पढ़ें या स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी से सत्यापित करें।
तुअर में खरपतवार नियंत्रण का Best Practical Plan (सिचुएशन के अनुसार)
किसान भाइयों की आसानी के लिए, यहाँ खेत की अलग-अलग परिस्थितियों (Situations) के हिसाब से सीधा एक्शन प्लान दिया जा रहा है:
परिस्थिति 1: अभी बुवाई पूरी हुई है, तुअर का अंकुरण नहीं हुआ है
- आपका एक्शन: यह पेंडिमेथलीन डालने का सबसे परफेक्ट समय है। बुवाई के 0 से 3 दिन के भीतर मिट्टी में हल्की नमी देखकर Pendimethalin 30% EC @ 1 L/acre को 180-220 लीटर पानी में मिलाकर फ्लैट फैन नोजल से स्प्रे कर दें। इसके बाद 30-35 दिन तक खेत को डिस्टर्ब न करें, फिर 35वें दिन एक हल्की निराई करवा दें।
परिस्थिति 2: बुवाई को 15-20 दिन हो चुके हैं, खेत में खरपतवार छोटे-छोटे (2-3 पत्ती के) हैं
- आपका एक्शन: सबसे पहले खेत में घूमकर खरपतवार का प्रकार पहचानें।
- यदि सिर्फ चौड़ी पत्ती वाले और मिक्स्ड खरपतवार हैं, तो Imazethapyr 10% SL (लगभग 240-300 ml/acre) का स्प्रे करें।
- यदि सिर्फ संकरी पत्ती वाली घास है, तो Quizalofop ethyl 5% EC (लगभग 400 ml/acre) चुनें।
- स्प्रे के समय फसल पूरी तरह हेल्दी होनी चाहिए और मिट्टी में अच्छी नमी होनी चाहिए।
परिस्थिति 3: खरपतवार बहुत बड़े (6–8 इंच या उससे अधिक) हो गए हैं
- आपका एक्शन: इस स्टेज पर किसी भी पोस्ट-इमर्जेंस केमिकल दवा का छिड़काव न करें, क्योंकि इससे घास पूरी तरह मरेगी नहीं और आपकी तुअर को तगड़ा झटका लग जाएगा। यहाँ सबसे बुद्धिमानी भरा काम यह है कि मजदूरों की सहायता से Hand Weeding (हाथ से निराई) करवाएं या कतारों के बीच Wheel Hoe / Cultivator चलाकर बड़ी घास को उखाड़ दें।
किसान अक्सर ये 5 बड़ी गलतियां करते हैं
- गलती 1 (बुवाई के कई दिनों बाद Pendimethalin डालना): पेंडिमेथलीन एक प्री-इमर्जेंस दवा है। अगर इसे बुवाई के 4-5 दिन बाद डाला जाए, तो यह तुअर के अंकुर को ही झुलसा देगी।
- गलती 2 (खड़ी फसल के बीच Glyphosate का प्रयोग): खड़ी फसल में ग्लाइफोसेट का थोड़ा सा भी ड्रिफ्ट उड़कर तुअर पर गया, तो पूरी फसल बैठ जाती है।
- गलती 3 (दवा के टैंक में खाद या कीटनाशक मिक्स करना): पोस्ट-इमर्जेंस दवाओं के साथ ऐसा करने पर केमिकल रिएक्शन के कारण फसल पूरी तरह झुलस जाती है।
- गलती 4 (कम पानी में हर्बीसाइड का स्प्रे करना): 1 एकड़ खेत में हर्बीसाइड डालते समय कम से कम 150 से 200 लीटर पानी का उपयोग होना चाहिए, अन्यथा दवा बहुत गाढ़ी होकर फसल जला देती है।
- गलती 5 (दवा डालने के तुरंत बाद मिट्टी की गुड़ाई कर देना): इससे मिट्टी पर बनी दवा की अदृश्य रासायनिक परत टूट जाती है और खरपतवार दोबारा उग आते हैं।
तुअर खरपतवार नियंत्रण का 45 दिन का संपूर्ण Calendar
इस आसान टाइमलाइन कैलेंडर को नोट कर लें और अपनी फसल की बोनी की तारीख के हिसाब से इसे मैनेज करें:
| फसल के दिन (DAS) | खेत में क्या देखें | आपको क्या कदम उठाना है |
| 0 दिन | बुवाई का कार्य संपन्न | खेत का समतलीकरण और मिट्टी में नमी की मात्रा की जांच करें। |
| 0 से 3 दिन | फसल का अंकुरण अभी नहीं हुआ है | योजना के अनुसार Pendimethalin 30% EC का प्री-इमर्जेंस स्प्रे पूरा करें। |
| 7 से 10 दिन | तुअर का अंकुरण बाहर आ गया है | पौधों की संख्या, जलभराव की स्थिति और मिट्टी की पपड़ी की जांच करें। |
| 15 से 20 दिन | खेत में छोटे-छोटे खरपतवार दिखने लगे हैं | खरपतवारों को बारीकी से देखें कि वे संकरी पत्ती वाले हैं या चौड़ी पत्ती वाले। |
| 20 से 25 दिन | खरपतवार 2-4 पत्ती की सक्रिय अवस्था में हैं | आवश्यकतानुसार खड़ी फसल में डालने वाली Selective Post-emergence दवा का स्प्रे करें। |
| 30 से 35 दिन | दवाओं से बचे हुए जिद्दी खरपतवार | लेबर की मदद से एक हल्की Hand Weeding या साइकिल वीडर चलाकर खेत पूरी तरह साफ करें। |
| 40 से 50 दिन | खरपतवारों की देर से आने वाली नई खेप | कतारों के बीच Interculture (डोरा/कुदाल) चलाएं ताकि मिट्टी ढीली हो और बचे खरपतवार साफ हों। |
| 50 दिन के बाद | तुअर की घनी कैनोपी (झाड़) | अब फसल खुद घास को दबा देगी; यदि कोई बड़ा खरपतवार दिखे तो उसे बीज बनने से पहले हाथ से उखाड़ दें। |
तुअर में दवा चुनने का आसान Quick Formula
अगर आपको अभी भी बाजार जाते समय कोई कन्फ्यूजन हो, तो यह सिंपल फॉर्मूला हमेशा याद रखें:
- बुवाई के तुरंत बाद (0-3 दिन): आँख बंद करके केवल Pendimethalin का चुनाव करें।
- खेत में सिर्फ संकरी पत्ती वाली घास हो: Quizalofop ethyl जैसी ग्रास-विशिष्ट दवा लाएं।
- खेत में चौड़ी पत्ती और मिश्रित खरपतवार हों: विशेषज्ञ की सलाह से Imazethapyr पर जाएं।
- यदि खरपतवार बहुत बड़े और मजबूत हो चुके हैं: केमिकल पर पैसा बर्बाद न करें, पहले निराई करवाएं।
- उन्नत बीजों का चुनाव: बुवाई के समय हमेशा अच्छी वैरायटी का चयन करें, जिसके लिए आप अरहर की टॉप किस्में 2026 की पूरी सूची देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. तुअर में Pendimethalin दवा का छिड़काव कब करना चाहिए?
Pendimethalin का इस्तेमाल तुअर की बुवाई के तुरंत बाद यानी 0 से 3 दिन के भीतर (अंकुरण से पहले) प्री-इमर्जेंस के रूप में किया जाना चाहिए।
2. तुअर की फसल में पहली मैनुअल निराई कब करनी सबसे अच्छी होती है?
अगर आपने बुवाई पर कोई Chemical दवा नहीं डाली है, तो पहली निराई बुवाई के 18–22 दिन के भीतर और दूसरी निराई 32–38 दिन पर करनी चाहिए।
3. क्या हम खड़ी तुअर की फसल में घास मारने के लिए Glyphosate का उपयोग कर सकते हैं?
बिल्कुल नहीं। ग्लाइफोसेट एक नॉन-सिलेक्टिव हर्बीसाइड है जो तुअर के पौधों को भी पूरी तरह जलाकर नष्ट कर सकता है।
4. तुअर में Imazethapyr दवा डालने का सही समय और तरीका क्या है?
Imazethapyr का स्प्रे बुवाई के 15–25 दिन बाद किया जाता है, जब खेत में उगे हुए खरपतवार अपनी शुरुआती 2–3 पत्तियों की छोटी अवस्था में हों।
निष्कर्ष: शुरुआत साफ, तो आधी जीत पक्की!
तुअर की खेती में खरपतवार नियंत्रण का असली खेल बुवाई के शुरुआती 30 से 45 दिनों के भीतर ही खत्म हो जाता है। अगर इस नाजुक समय में आपने अपनी फसल को घास के चंगुल से बचा लिया, तो तुअर का पौधा जमीन में अपनी जड़ों का बहुत गहरा और मजबूत नेटवर्क तैयार कर लेता है। तना मजबूत होने से आगे चलकर उसमें बंपर शाखाएं आती हैं, जिससे फूल और फलियों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होती है।
हमेशा याद रखें: हर्बीसाइड्स के इस्तेमाल में कभी भी जल्दबाजी या देखा-देखी न करें। सही दवा, सही डोज, सही समय, सही नोजल और स्वस्थ फसल — ये पांच बातें ही आपकी फसल की सुरक्षा की असली चाबी हैं।

