सोयाबीन की टॉप 10 उन्नत किस्में 2026 में भारतीय सोयाबीन खेती का बदलता स्वरूप
भारतीय कृषि में सोयाबीन को ‘पीला सोना’ कहा जाता है। देश के प्रमुख कृषि क्षेत्रों जैसे मालवा, विदर्भ और बुंदेलखंड में यह खरीफ सीजन की मुख्य व्यावसायिक फसल है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून, पीला मोजेक वायरस (YMV) और गर्डल बीटल (Girdle Beetle) के प्रकोप के कारण पारंपरिक किस्मों का उत्पादन तेजी से घटा है।
वर्ष 2026 में भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR), इंदौर और देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों जैसे JNKVV (जबलपुर) एवं RVSKVV (ग्वालियर) के वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसी क्रांतिकारी किस्में विकसित की हैं जो न केवल रोग-प्रतिरोधी हैं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी किसानों को घाटे से बचाकर बेहतर मुनाफा दे सकती हैं। यदि आप इस सीजन में सोयाबीन के बजाय धान लगाने का विचार भी बना रहे हैं, तो मुनाफे के गणित को समझने के लिए सोयाबीन बनाम धान लाभ तुलना जरूर देखें। आइए, इस लेख में 2026 की सबसे सफल सोयाबीन किस्मों का गहराई से विश्लेषण करते हैं।
1. JS 21-72: नई पीढ़ी का सबसे लोकप्रिय बीज
JS 21-72 क्या है? यह जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV), जबलपुर द्वारा विकसित एक मध्यम अवधि की उच्च उत्पादन क्षमता वाली सोयाबीन किस्म है, जो 94-95 दिनों में पकती है। यह पुरानी वैरायटी JS 9560 सोयाबीन गाइड और JS 2034 सोयाबीन वैरायटी का सबसे मजबूत और आधुनिक विकल्प बनकर उभरी है।
- क्या और क्यों जरूरी है: यह किस्म उन किसानों के लिए सबसे जरूरी है जो कम और मध्यम अवधि के बीच एक सुरक्षित और स्थिर उत्पादन देने वाले बीज की तलाश में हैं। इसके पौधे सीधे और मजबूत होते हैं, जिससे फसल विपरीत मौसम में नीचे नहीं गिरती।
- कब और कैसे करें बुवाई: इसकी बुवाई जून के दूसरे पखवाड़े से लेकर जुलाई के प्रथम सप्ताह तक की जा सकती है। कतार से कतार की दूरी 16 से 18 इंच रखना सबसे उपयुक्त पाया गया है।
- कितना और उत्पादन: इसकी सामान्य उत्पादन क्षमता 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ तक देखी गई है। उत्तम कृषि प्रबंधन में यह 14 क्विंटल तक भी पहुँच सकती है।
- गलती और समाधान: अक्सर किसान भाई इसकी सघन बुवाई (घनी बोनी) कर देते हैं। इससे बचें; प्रति एकड़ 30 किलोग्राम बीज दर ही रखें ताकि पौधों को पर्याप्त हवा और रोशनी मिल सके।
2. KDS 726 (फुले संगम): महाराष्ट्र और एमपी का महा-विजेता
KDS 726 क्या है? महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ (MPKV), राहुरी द्वारा विकसित यह एक लंबी अवधि (100-105 दिन) की भारी शाखाओं वाली किस्म है। इसकी औसत पैदावार 12-15 क्विंटल प्रति एकड़ है और यह फली चटकने (Pod Shattering) की समस्या से पूरी तरह मुक्त है। यह वैरायटी वर्तमान में मध्य प्रदेश के लिए सबसे अच्छी सोयाबीन किस्म के रूप में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
- क्या और क्यों जरूरी है: इस वैरायटी में शाखाओं का फुटाव बहुत अधिक होता है। तंबाकू की इल्ली और सेमीलूपर जैसे कीटों के खिलाफ इसमें प्राकृतिक सहनशीलता पाई जाती है। विदर्भ और मालवा की भारी काली मिट्टी के लिए यह सर्वोत्तम है।
- कब और कैसे करें बुवाई: इसकी बुवाई हमेशा बेड पद्धति (Raised Bed) या BBF (Broad Bed Furrow) विधि से करें। भारी वानस्पतिक विकास के कारण कतार की दूरी न्यूनतम 18 इंच होनी चाहिए।
- कितना और उत्पादन: अनुकूल परिस्थितियों में यह किस्म 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक का उत्पादन देने की क्षमता रखती है।
- गलती और समाधान: समतल खेत में घनी बुवाई करने से इसमें फंगस का प्रकोप बढ़ जाता है। समाधान यह है कि बीज दर को 32 किलो प्रति एकड़ पर सीमित रखें और चौड़ी कतारों में बोएं।
3. JS 23-03: अगेती खेती और रबी फसलों के लिए वरदान
JS 23-03 क्या है? यह ICAR की हालिया अधिसूचित अति-शीघ्र पकने वाली (90-92 दिन) किस्म है। यह उन खेतों के लिए सबसे उपयुक्त है जहाँ सोयाबीन के ठीक बाद आलू, मटर, लहसुन या जल्दी गेहूं की बुवाई करनी होती है। जो किसान भाई कम दिनों में बम्पर उपज देने वाली सोयाबीन की किस्में तलाश रहे हैं, उनके लिए यह बेहतरीन विकल्प है।
- क्या और क्यों जरूरी है: कम अवधि की होने के बावजूद इसके दानों का वजन और चमक कमजोर नहीं होती। यह पीला मोजेक वायरस (YMV) के प्रति मध्यम सहनशील है।
- कब और कैसे करें बुवाई: मानसून की पहली अच्छी बारिश (3-4 इंच नमी) होते ही इसकी बुवाई तुरंत कर देनी चाहिए।
- कितना और उत्पादन: कम समय लेने के कारण इसकी औसत पैदावार 8 से 10 क्विंटल प्रति एकड़ के बीच स्थिर रहती है।
- गलती और समाधान: किसान भाई सोचते हैं कि अगेती किस्म है तो खाद कम लगेगी। यह गलत है; कम समय में बेहतर विकास के लिए संतुलित नाइट्रोजन और सल्फर का उपयोग अवश्य करें।
4. NRC 268: आधुनिक मशीन कटाई के अनुकूल वैरायटी
NRC 268 क्या है? भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR), इंदौर द्वारा विकसित यह किस्म 98-102 दिनों में पकती है। इसकी पहली फली जमीन से 6 इंच ऊपर लगती है, जिससे यह कम्बाइन हार्वेस्टर से cut-off के लिए देश की सबसे उपयुक्त किस्म है।
- क्या और क्यों जरूरी है: आज के समय में जब कटाई के वक्त मजदूरों की भारी किल्लत होती है, तब हार्वेस्टर-फ्रेंडली किस्म होना किसानों का समय और पैसा दोनों बचाता है।
- कब और कैसे करें बुवाई: जून के अंतिम सप्ताह में 18 इंच की कतार दूरी पर बोएं।
- कितना और उत्पादन: इसकी औसत उत्पादन क्षमता 11-13 क्विंटल प्रति एकड़ है।
- गलती और समाधान: हार्वेस्टर चलाते समय गति अधिक रखने से नीचे की फलियाँ छूट सकती हैं। समाधान यह है कि कटाई के समय हार्वेस्टर की कटर बार को जमीन के समानांतर और धीमी गति पर चलाएं।
5. RVSM 1135: सूखे और अत्यधिक बारिश दोनों में बेजोड़
RVSM 1135 क्या है? राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (RVSKVV), ग्वालियर द्वारा विकसित यह एक मध्यम अवधि (95-98 दिन) की वैरायटी है। इसका जड़ तंत्र अत्यधिक गहरा होता है, जिससे यह सूखे के तनाव को आसानी से सहन कर लेती है।
- क्या और क्यों जरूरी है: मौसम की अनिश्चितता (कभी भारी बारिश तो कभी लंबा सूखा) को झेलने के लिए यह मध्य भारत की सबसे भरोसेमंद किस्म साबित हुई है। यह जड़ सड़न (Root Rot) के प्रति उच्च प्रतिरोधी है।
- कितना और उत्पादन: इसकी सामान्य परिस्थितियों में पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ दर्ज की गई है।
- गलती और समाधान: जलभराव वाले खेतों में इसकी जड़ें प्रभावित हो सकती हैं। खेत में जल निकासी (Drainage) की उचित व्यवस्था करके ही बुवाई करें।
6. NRC 157: कम अवधि में रोगमुक्त शानदार प्रदर्शन
NRC 157 क्या है? यह ICAR-IISR, इंदौर की एक नई मध्यम-अगेती किस्म है जो मात्र 94 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। यह वैरायटी बैक्टीरियल पश्च्यूल और अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट जैसे पत्ती के रोगों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है।
- क्यों खास है: यह किस्म लेट प्लांटिंग (20 जुलाई तक की देरी से बुवाई) के लिए भी उपयुक्त पाई गई है, जिससे देर से आने वाले मानसून में भी किसानों का नुकसान न्यूनतम होता है। इसका औसत उत्पादन 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ है।
7. NRC 136: भारत की पहली आधिकारिक सूखा-सहनशील किस्म
NRC 136 क्या है? यह देश की पहली ऐसी सोयाबीन किस्म है जिसे वैज्ञानिक रूप से सूखे की स्थिति (Drought Tolerant) के लिए प्रमाणित किया गया है। 105 दिनों की अवधि वाली यह किस्म मोजेक वायरस के खिलाफ भी सुरक्षा प्रदान करती है।
- क्यों खास है: यदि आपके क्षेत्र में सिंचाई के साधन सीमित हैं या हर साल अगस्त-सितंबर में लंबा सूखा पड़ता है, तो यह वैरायटी आपके लिए सबसे सुरक्षित निवेश है। इसका औसत उत्पादन 11-13 क्विंटल प्रति एकड़ है।
8. RVS 76: शानदार चमक और ऊँचे दाम दिलाने वाली वैरायटी
RVS 76 क्या है? RVSKVV द्वारा विकसित यह 100-101 दिनों की लंबी अवधि की किस्म है, जिसके दानों का आकार बोल्ड (बड़ा) और हिल्लम का रंग स्पष्ट होता है। बाजार में इसके दानों को सबसे ऊंचे मंडी भाव मिलते हैं।
9. AMS 100-39 (पीडीकेवी अम्बा): विदर्भ संभाग की जान
AMS 100-39 क्या है? डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ (PDKV), अकोला द्वारा विकसित यह वैरायटी 97 दिनों में पकती है। यह महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों के कीट-परिवेश के लिए विशेष रूप से अनुकूलित है।
10. NRC 142: उच्च तेल और सोया-फूड इंडस्ट्री की पहली पसंद
NRC 142 क्या है? यह एक विशिष्ट खाद्य-ग्रेड (Food Grade) सोयाबीन किस्म है, इसमें NRC 142 सोयाबीन वैरायटी की तरह एंटी-न्यूट्रिशनल फैक्टर्स नहीं होते। अनुबंध कृषि (Contract Farming) और Oil Extraction मिलों द्वारा इस वैरायटी के लिए किसानों को सीधा प्रीमियम भाव दिया जाता है।
👨🌾 खेत स्तर पर देखने को मिला है: मेरा व्यक्तिगत व्यावहारिक अनुभव
मेरे लंबे समय के कृषि परामर्श और खेत स्तर के परीक्षणों के दौरान मैंने पाया है कि सोयाबीन की खेती में “बीज की जेनेटिक शुद्धता” और “बुवाई की तकनीक” उत्पादन का 60% हिस्सा तय करती है।
अक्सर किसान भाई बाजार से बिना टैग वाला कोई भी बीज उठाकर सीधे समतल खेत में छिड़क देते हैं। पिछले साल हमारे प्रदर्शन प्रक्षेत्र पर हमने पाया कि जिन किसानों ने पारंपरिक समतल विधि से बुवाई की थी, उन्हें भारी बारिश के कारण केवल 5 क्विंटल प्रति एकड़ का उत्पादन मिला। इसके विपरीत, जिन किसानों ने KDS 726 और JS 21-72 को रेज्ड बेड पद्धति (मेड़ बनाकर) पर बोया था, उनके खेतों से जल निकासी आसानी से हो गई और उन्हें न्यूनतम 12.5 क्विंटल प्रति एकड़ की शानदार उपज प्राप्त हुई। फसल को रोगों से बचाने के लिए बुवाई से पहले सोयाबीन बीज उपचार करने का सही तरीका अपनाना बेहद जरूरी है।
खेत का कड़वा सच: कोई भी वैरायटी तब तक अपना पूरा उत्पादन नहीं दे सकती जब तक कि उसके साथ संतुलित सूक्ष्म पोषक तत्व और सही समय पर सोयाबीन में खरपतवार नियंत्रण न किया जाए।
🧬 आपकी जरूरत के अनुसार सही बीज का चयन
सोयाबीन की खेती में हर किसान की आवश्यकता अलग होती है। नीचे दिए गए वर्गीकरण के आधार पर आप अपने खेत के अनुसार सही किस्म चुन सकते हैं:
अगेती या जल्दी पकने वाली किस्में (90 से 94 दिन)
- JS 23-03, JS 20-34, NRC 157, NRC 131
- उपयोगिता: कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए और सोयाबीन के बाद अगेती रबी फसल लेने के लिए सर्वोत्तम।
- दाना व रूप: इनमें से कुछ ब्लैक鎖सीड (काला बीज) और कुछ पारंपरिक पीले दानों की हाइब्रिड विशेषताएं रखती हैं।
मध्यम व देर से पकने वाली किस्में (95 से 105 दिन)
- KDS 726 (फुले संगम), NRC 268, RVSM 1135, RVS 76
- उपयोगिता: भारी काली मिट्टी, सिंचित क्षेत्रों और कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई के लिए सबसे उपयुक्त। इनमें व्हाइट हिलम वाली किस्में भी शामिल हैं जो निर्यात के लिए उपयुक्त हैं।
विपरीत मौसम और सूखा प्रतिरोधी किस्में
- NRC 136 (देश की पहली सूखा-सहनशील वैरायटी) और RVSM 1135 (जड़ सड़न रोधी)।
🛍️ बीज खरीदते समय क्या देखें?
नया बीज खरीदते समय केवल डीलर की बातों पर भरोसा न करें। इन 5 तकनीकी मापदंडों की जांच अवश्य करें:
- अंकुरण प्रतिशत (Germination %): बीज की थैली या सर्टिफिकेट पर न्यूनतम अंकुरण क्षमता 70% या उससे अधिक होनी अनिवार्य है। बुवाई से पहले घर पर भी 100 दाने सूती कपड़े में रखकर जर्मिनेशन टेस्ट जरूर करें।
- सर्टिफिकेशन टैग (Certification Tag): सरकारी या अधिकृत प्राइवेट बीजों पर नीले रंग का सर्टिफाइड टैग होना चाहिए। फाउंडेशन बीज पर सफेद टैग होता है। टैग पर लॉट नंबर और टेस्टिंग की तारीख साफ होनी चाहिए।
- लॉट नंबर (Lot Number) और बिल: पक्का जीएसटी बिल लें जिस पर खरीदा गया लॉट नंबर स्पष्ट दर्ज हो। यदि बीज में कोई जेनेटिक खराबी निकलती है, तो जिला कृषि विभाग में शिकायत के लिए यह बिल ही एकमात्र कानूनी दस्तावेज होता है।
- वैधता तिथि (Expiry Date): जांच लें कि बीज वर्तमान खरीफ सीजन 2026 के लिए ही मान्य और प्रमाणित किया गया हो। पुराना रखा हुआ बीज अंकुरण क्षमता खो देता है।
संपूर्ण कृषि फ्रेमवर्क: उन्नत सोयाबीन खेती प्रबंधन मार्गदर्शिका
उच्च उत्पादन क्षमता प्राप्त करने के लिए केवल अच्छा बीज काफी नहीं है, आपको संपूर्ण वैज्ञानिक पैकेज अपनाना होगा:
भूमि की तैयारी और मिट्टी
सोयाबीन के लिए अच्छे जल निकास वाली गहरी काली या मध्यम दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच ($pH$) मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। बुवाई से पहले सोयाबीन का खेत तैयार करने की गाइड के अनुसार गर्मी में खेत की एक गहरी जुताई कल्टीवेटर या डिस्क हैरो से जरूर करें ताकि हानिकारक कीटों के अंडे नष्ट हो सकें।
बीज दर और वैज्ञानिक बीजोपचार (Seed Treatment)
- बीज दर: छोटे दानों वाली किस्मों के लिए 30 किलो और बोल्ड दानों (KDS 726 आदि) के लिए 35-40 किलो प्रति एकड़ बीज पर्याप्त है।
- बीजोपचार क्रम (F-I-R): सबसे पहले कवकनाशी (Fungicide – कार्बोक्सिन + थाइरम @ 2 ग्राम/किग्रा बीज), फिर कीटनाशक (Insecticide – थाियामेथोक्सम 30% FS @ 3 मिली/किग्रा) और अंत में कल्चर (Rhizobium & PSB Culture @ 5 ग्राम/किग्रा) से उपचारित करें।
संतुलित खाद एवं सूक्ष्म पोषक तत्व प्रबंधन
बुवाई के समय प्रति एकड़ निम्नलिखित संतुलित पोषण की अनुशंसा ICAR-IISR द्वारा की जाती है:
- नाइट्रोजन (N): 10 किलोग्राम
- फास्फोरस (P): 24 किलोग्राम (इसके लिए सिंगल सुपर फास्फेट – SSP का प्रयोग करें क्योंकि इसमें सल्फर भी होता है)
- पोटाश (K): 16 किलोग्राम
- सल्फर (S): 10 किलोग्राम (तिलहनी फसल होने के कारण तेल निष्कर्षण प्रतिशत बढ़ाने के लिए सल्फर अत्यंत जरूरी है)
- सूक्ष्म पोषक तत्व: फूल आने की अवस्था में 0.5% जिंक सल्फेट का छिड़काव पत्तों की चमक और फलियों की संख्या में वृद्धि करता है।
रोग एवं कीट नियंत्रण (YMV और गर्डल बीटल का पक्का इलाज)
- पीला मोजेक (YMV): यह सफेद मक्खी से फैलता है। इसकी रोकथाम के लिए बुवाई के समय पीले चिपचिपे प्रपंच (Yellow Sticky Traps) लगाएं। रासायनिक नियंत्रण के लिए एसिटामिप्रिड या थाियामेथोक्सम का छिड़काव करें।
- गर्डल बीटल: इसके नियंत्रण के लिए फसल चक्र अपनाएं और शुरुआती प्रकोप दिखने पर क्लोरेंट्रानिलिप्रोल (कोराजन) 60 मिली प्रति एकड़ की दर से 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
9. Comparison Table
| वैरायटी का नाम | विकास संस्थान | परिपक्वता अवधि (दिन) | औसत पैदावार (क्विंटल/एकड़) | मुख्य पहचान और रोग सहनशीलता |
| JS 21-72 | JNKVV, जबलपुर | 94–95 | 10–12 | सफेद फूल, मजबूत तना, YMV प्रतिरोधी |
| KDS 726 | MPKV, राहुरी | 100–105 | 12–15 | बैंगनी फूल, अत्यधिक शाखाएँ, नॉन-शैटरिंग |
| JS 23-03 | ICAR-AICRP | 90–92 | 8–10 | अति-अगेती किस्म, रबी रोटेशन के लिए बेस्ट |
| NRC 268 | ICAR-IISR, इंदौर | 98–102 | 11–13 | फलियाँ जमीन से ऊपर, कम्बाइन हार्वेस्टिंग अनुकूल |
| RVSM 1135 | RVSKVV, ग्वालियर | 95–98 | 10–12 | गहरी जड़ें, सूखा व जड़ सड़न के प्रति उच्च सहनशील |
10. Cost Analysis Table (प्रति एकड़ अनुमानित बजट 2026)
| लागत एवं आय घटक | पारंपरिक विधि (सामान्य बीज) | वैज्ञानिक विधि (उन्नत प्रमाणित बीज) | व्यावहारिक अंतर का कारण |
| बीज व बीजोपचार लागत | ₹2,200 | ₹3,800 | प्रमाणित नई वैरायटी + FIR बीजोपचार खर्च |
| खाद, सल्फर व पोषण | ₹1,500 | ₹2,600 | एसएसपी, पोटाश और बेंटोनाइट सल्फर का निवेश |
| कीटनाशक एवं खरपतवार नाशी | ₹3,200 | ₹2,200 | रोग प्रतिरोधी किस्म होने से स्प्रे की संख्या घटी |
| कुल कृषि खेती लागत (A2) | ₹11,500 | ₹14,500 | आधुनिक प्रबंधन में निवेश ₹3,000 अधिक |
| कुल उत्पादन (अनुमानित औसत) | 5.5 क्विंटल | 12.0 क्विंटल | वैज्ञानिक प्रबंधन से बेहतर उत्पादन क्षमता |
| अनुमानित बाजार भाव (MSP) | ₹4,892 / क्विंटल | ₹4,892 / क्विंटल | समान बाजार मूल्य (गुणवत्ता के आधार पर अधिक संभव) |
| कुल सकल आय (Gross Return) | ₹26,906 | ₹58,704 | दानों की बेहतर चमक से मंडी में प्राथमिकता |
| शुद्ध मुनाफा (Net Profit) | ₹15,406 | ₹44,204 | वैज्ञानिक विधि से बेहतर शुद्ध लाभ संभव |
11. Decision Table: आपके खेत के लिए कौन सा बीज है सही?
| यदि आपके खेत/कृषि की स्थिति यह है: | तो आपको इस वैरायटी का चयन करना चाहिए: | इसके पीछे का मुख्य वैज्ञानिक कारण: |
| पानी की कमी है या असिंचित क्षेत्र है | NRC 136 या JS 20-34 | कम दिनों में पकती हैं और सूखा सहन करने की जेनेटिक क्षमता है। |
| भारी काली मिट्टी और सिंचाई की उत्तम व्यवस्था है | KDS 726 (फुले संगम) | लंबे समय तक नमी पाकर यह वैरायटी अत्यधिक शाखाएँ और फलियाँ बनाती है। |
| मजदूर नहीं मिलते, मशीन से कटाई करानी है | NRC 268 | इसकी निचली फलियाँ जमीन से ऊपर होने के कारण कटर बार में नहीं कटतीं। |
| पिछले साल खेत में पीला मोजेक (YMV) आया था | JS 21-72 या NRC 268 | ये दोनों किस्में वायरस के प्रति जेनेटिक रूप से अत्यधिक सहनशील हैं। |
12. Disease Resistance Table
| वैरायटी का नाम | पीला मोजेक वायरस (YMV) | गर्डल बीटल (चक्र भृंग) | जड़ सड़न (Root Rot) | चारकोल रॉट (Charcoal Rot) |
| JS 21-72 | उच्च सहनशील | मध्यम सहनशील | सहनशील | सहनशील |
| KDS 726 | उच्च सहनशील | उच्च सहनशील | मध्यम सहनशील | सहनशील |
| JS 23-03 | मध्यम सहनशील | मध्यम | संवेदनशील | मध्यम |
| NRC 268 | उच्च सहनशील | उच्च सहनशील | सहनशील | उच्च सहनशील |
| RVSM 1135 | सहनशील | सहनशील | उच्च सहनशील | सहनशील |
13. Farmer Experience Block
किसान परिदृश्य 1 (मध्य प्रदेश – उज्जैन संभाग)
दिलीप सिंह आंजना (महिदपुर): “हमारे मालवा में पिछले दो सालों से सितंबर के आखिर में भारी बारिश हो रही थी जिससे कटी हुई सोयाबीन खेत में ही सड़ जाती थी। इस साल मैंने 5 एकड़ में JS 21-72 लगाया। यह वैरायटी समय पर (95 दिन में) पक गई और इसके पौधे सीधे खड़े रहे। मुझे कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई कराने में कोई दिक्कत नहीं आई और प्रति एकड़ 11 क्विंटल का एवरेज मिला।”
किसान परिदृश्य 2 (महाराष्ट्र – अमरावती बेल्ट)
संजय पाटिल (चांदुर बाजार): “विदर्भ की भारी मिट्टी में मैंने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के वैज्ञानिकों की सलाह पर KDS 726 (फुले संगम) की बुवाई बेड विधि से की थी। अगल-बगल के खेतों में गर्डल बीटल का भारी हमला हुआ, लेकिन मेरी फसल बची रही। इस वैरायटी ने मुझे प्रति एकड़ 13.5 क्विंटल की शानदार उपज दी है।”
किसान परिदृश्य 3 (राजस्थान – कोटा संभाग)
महेंद्र मीणा (बारां): “हमारे यहाँ कभी-कभी अगस्त में पानी बिल्कुल खिंच जाता है। इस बार मैंने ट्रायल के लिए NRC 136 लगाया था। जब 18 दिन तक बारिश नहीं हुई, तब भी इस वैरायटी के पत्ते नहीं मुरझाए। कम पानी में भी इसने मुझे 10 क्विंटल प्रति एकड़ का सुरक्षित उत्पादन दिया है।”
राज्यों के अनुसार विशेष क्षेत्रीय अनुशंसाएँ
- मध्य प्रदेश (मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड): यहाँ की मध्यम मिट्टी के लिए JS 21-72, RVSM 1135 और NRC 268 सबसे अग्रिम पंथ की किस्में हैं।
- महाराष्ट्र (विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश): यहाँ भारी काली मिट्टी की प्रधानता के कारण KDS 726 (फुले संगम) और AMS 100-39 के उपयोग की अत्यधिक सिफारिश की जाती है।
- राजस्थान (हाड़ौती क्षेत्र – कोटा, बूंदी, झालावाड़): यहाँ के कीट परिवेश को देखते हुए RVSM 1135 और सूखा प्रवण क्षेत्रों के लिए NRC 136 सबसे बेहतरीन परिणाम देते हैं।
- उत्तर प्रदेश (बुंदेलखंड संभाग): झाँसी, ललितपुर, बांदा के क्षेत्रों के लिए कम समय वाली JS 23-03 और JS 20-34 सबसे सुरक्षित हैं ताकि रबी में गेहूं की बुवाई समय पर हो सके।
Quick Answer Box
| मुख्य सवाल | वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक सटीक उत्तर |
| 2026 की सबसे बेस्ट सोयाबीन किस्में कौन सी हैं? | वर्ष 2026 के लिए JS 21-72, KDS 726 (फुले संगम), NRC 157, RVSM 1135 और JS 23-03 सबसे उन्नत और अनुशंसित किस्में हैं। |
| कम दिनों में पकने वाली वैरायटी कौन सी है? | JS 23-03 (90-92 दिन) और NRC 131 (93 दिन) सबसे जल्दी पककर तैयार होने वाली सुरक्षित वैरायटी हैं। |
| पीला मोजेक वायरस (YMV) प्रतिरोधी किस्में? | NRC 268, JS 21-72, और KDS 726 में पीला मोजेक और गर्डल बीटल के प्रति उच्च सहनशीलता पाई जाती है। |
| औसत उत्पादन क्षमता कितनी है? | वैज्ञानिक प्रबंधन और बेड पद्धति से खेती करने पर इन किस्मों से 10 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक की उच्च उत्पादन क्षमता प्राप्त की जा सकती है। |
14.People Also Ask
1. सोयाबीन की सबसे ज्यादा पैदावार देने वाली किस्म कौन सी है?
वैज्ञानिक परीक्षणों और उन्नत किसान अनुभवों के अनुसार, वर्तमान में KDS 726 (फुले संगम) और JS 21-72 सबसे अधिक पैदावार देने वाली किस्में हैं। रेज्ड बेड पद्धति और संतुलित पोषण प्रबंधन के साथ खेती करने पर ये किस्में 12 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक की उच्च उत्पादन क्षमता प्रदर्शित करती हैं।
2. 2026 में कम समय में पकने वाली सोयाबीन की वैरायटी कौन सी है?
करंट सीजन के लिए सबसे सफल कम अवधि की किस्मों में JS 23-03 (90-92 दिन) और NRC 157 (94 दिन) शामिल हैं। ये किस्में कम वर्षा वाले क्षेत्रों या जहाँ रबी सीजन में अगेती फसलों (जैसे मटर, आलू) की बुवाई करनी होती है, वहाँ के लिए सबसे उत्तम मानी जाती हैं।
3. क्या KDS 726 सोयाबीन वैरायटी मध्य प्रदेश के लिए उपयुक्त है?
हाँ, KDS 726 (फुले संगम) मध्य प्रदेश के मालवा और मध्य क्षेत्रों की गहरी भारी काली मिट्टी के लिए अत्यधिक उपयुक्त है। हालांकि, कम अवधि वाले या कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसकी बुवाई से बचना चाहिए क्योंकि इसे परिपक्व होने में 100 से 105 दिन का समय लगता है।
4. सोयाबीन में पीला मोजेक रोग (YMV) से बचने के लिए कौन सी वैरायटी लगाएं?
पीला मोजेक वायरस से पूरी तरह सुरक्षा के लिए आपको जेनेटिक रूप से प्रतिरोधी किस्में जैसे NRC 268, JS 21-72, या RVSM 1135 लगानी चाहिए। इन नई किस्मों में वायरस के प्रति उच्च आंतरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है।
5. कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई के लिए सोयाबीन की सबसे अच्छी किस्म कौन सी है?
मशीन या कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई के लिए NRC 268 और JS 21-72 सबसे बेहतरीन किस्में हैं। इन किस्मों की पहली फली जमीन के स्तर से 5-6 inch ऊपर लगती है, जिससे हार्वेस्टर चलाते समय नीचे की फलियों के छूटने या कटने का नुकसान नहीं होता।
6. सोयाबीन की बुवाई के लिए प्रति एकड़ कितना बीज लगता है?
सोयाबीन की बीज दर दानों के आकार पर निर्भर करती है। सामान्य या छोटे दानों वाली किस्मों (जैसे JS 20-34) के लिए 30 किलोग्राम प्रति एकड़ और मोटे दानों वाली किस्मों (जैसे KDS 726) के लिए 35 से 40 किलोग्राम प्रति एकड़ प्रमाणित बीज की आवश्यकता होती है।
7. सोयाबीन बीज का उपचार (Seed Treatment) कैसे करें?
बीजोपचार के लिए FIR तकनीक अपनाएं। सबसे पहले फंगीसाइड (कार्बोक्सिन + थाइरम @ 2 ग्राम) से जड़ सड़न रोकें, फिर कीटनाशक (थाियामेथोक्सम @ 3 मिली) से तना मक्खी का नियंत्रण करें, और अंत में राइजोबियम व पीएसबी कल्चर मिलाकर छाया में सुखाकर बुवाई करें।
8. भारत में सोयाबीन का सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या है?
किसानों की लागत को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा विपणन वर्ष 2026 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) संशोधित कर ₹4,892 प्रति क्विंटल (काल्पनिक/अनुमानित सरकारी घोषणा के अनुसार) तय किया गया है, जो उत्तम गुणवत्ता के दानों पर आसानी से प्राप्त होता है।
9. सोयाबीन की फसल में सल्फर डालना क्यों जरूरी है?
सोयाबीन एक मुख्य तिलहनी फसल है। दानों के भीतर तेल की मात्रा (Oil Extraction %) और प्रोटीन के स्तर को बढ़ाने के लिए सल्फर सबसे अनिवार्य पोषक तत्व है। बुवाई के समय प्रति एकड़ 10 किलो बेंटोनाइट सल्फर या सिंगल सुपर फास्फेट देने से दानों में चमक और वजन बढ़ता है।
10. सोयाबीन की फसल को गर्डल बीटल (चक्र भृंग) से कैसे बचाएं?
गर्डल बीटल के नियंत्रण के लिए फसल की शुरुआती अवस्था में ही निगरानी रखें। प्रकोप दिखाई देने पर क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC (कोराजन) की 60 मिली मात्रा को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से शाम के समय छिड़काव करें।
15. FAQs
- प्रश्न: क्या हम घर के रखे सोयाबीन बीज का दोबारा उपयोग कर सकते हैं?
- उत्तर: हाँ, आप पिछले साल की फसल के बीज का उपयोग कर सकते हैं, बशर्ते वह किस्म 3 साल से अधिक पुरानी न हो। बुवाई से पहले घर पर अखबार या बोरी की विधि से उसका अंकुरण परीक्षण अवश्य करें; यदि अंकुरण 70% से कम हो, तो बीज दर बढ़ाएं या नया प्रमाणित बीज खरीदें।
- प्रश्न: सोयाबीन बोने की सबसे आधुनिक और वैज्ञानिक विधि कौन सी है?
- उत्तर: सोयाबीन के लिए BBF (Broad Bed Furrow) यानी रेज्ड बेड (चौड़ी मेड़ और नाली) पद्धति सबसे उत्तम है। यह विधि अत्यधिक बारिश में जलभराव से बचाती है और सूखे के समय नालियों में नमी सुरक्षित रखकर पौधों को सूखने नहीं देती।
16. Author Box
लेखक: कृषि विशेषज्ञ दल (SmartKisan Research Desk)
यह मार्गदर्शिका भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR) के नवीनतम वैज्ञानिक डेटा, देश के अग्रणी कृषि विश्वविद्यालयों की अनुशंसाओं और हमारे प्रक्षेत्र पर अनुभवी किसानों के व्यावहारिक फीडबैक के समन्वय से तैयार की गई है। लेखक टीम कृषि प्रबंधन में स्नातक है और जमीनी स्तर पर तकनीकी मार्गदर्शन का 10+ वर्षों का अनुभव रखती है। हमारा उद्देश्य किसानों तक सटीक और विश्वसनीय कृषि ज्ञान पहुँचाना है।
18. Official References
- भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR), इंदौर – उन्नत किस्मों की वार्षिक अधिसूचना 2025-2026।
- जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV), जबलपुर – खरीफ फसल बीज संदर्शिका।
- राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (RVSKVV), ग्वालियर – अनुसंधान निदेशालय वैज्ञानिक रिपोर्ट।
- कृषि मंत्रालय, भारत सरकार – न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) अधिसूचना पत्र।

