बारिश के मौसम में सोयाबीन की फसल तेजी से बढ़ती है। लेकिन इसी दौरान कई बार किसानों को एक बड़ी और गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। अक्सर देखा जाता है कि खेत में सोयाबीन के अच्छे-खासे हरे-भरे पौधे अचानक गलकर नीचे गिरने लगते हैं।
अगर शुरुआत में ही इस बीमारी पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह पूरे खेत में फैल सकती है। इससे उत्पादन में भारी गिरावट आती है और किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। आइए समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है और इसे तुरंत कैसे रोका जा सकता है।
सोयाबीन में पौधे गलकर क्यों गिरते हैं?
सोयाबीन में पौधों के गलकर गिरने का मुख्य कारण मिट्टी में पनपने वाली फफूंद (Fungus) होती है। मध्य प्रदेश जैसी भारी काली मिट्टी वाले क्षेत्रों में लगातार बारिश के बाद जलभराव की स्थिति इस बीमारी को और बढ़ा देती है।
इस गलन रोग को मुख्य रूप से कॉलर रॉट (Collar Rot), स्टेम रॉट या तना गलन या डैम्पिंग ऑफ (Damping Off) कहा जाता है। इसके साथ ही, लगातार जलभराव से सोयाबीन में जड़ सड़न रोग का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। राइजोक्टोनिया (Rhizoctonia) और फाइटोफ्थोरा (Phytophthora) नामक फफूंद इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार होती हैं।
सोयाबीन गलन रोग के मुख्य लक्षण
खेत में सही समय पर बीमारी की पहचान करना सबसे जरूरी है। आप इन लक्षणों से फफूंद जनित गलन रोग को पहचान सकते हैं:
- तने पर धब्बे: जमीन की सतह के पास वाले तने (कॉलर) पर गहरे भूरे या काले रंग के धब्बे बन जाते हैं।
- पत्तियों का पीलापन: जड़ें और तना खराब होने के कारण पौधे को पोषण नहीं मिलता, जिससे पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती हैं। (अगर आपके खेत में यह समस्या है तो सोयाबीन में पीलापन के कारण और उपाय भी अवश्य जानें।)
- पौधों का गिरना: तना कमजोर होकर सड़ जाता है और पौधा बीच से टूटकर या गलकर जमीन पर गिर जाता है।
पौधे गलने से रोकने के अचूक उपाय
इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए तुरंत सही कदम उठाना आवश्यक है। यहाँ कुछ बेहद असरदार रासायनिक और कृषि तकनीकी उपाय दिए गए हैं:
1. जल निकासी की उचित व्यवस्था (Water Management)
खेत में पानी का भराव फफूंद के पनपने का सबसे बड़ा कारण है। इसलिए सुनिश्चित करें कि खेत से अतिरिक्त पानी बाहर निकलने की उचित व्यवस्था (Drainage) हो। मेड़ बनाकर या नालियां निकालकर पानी को तुरंत बाहर निकालें।
2. सही फफूंदनाशक का छिड़काव (Chemical Control)
अगर बीमारी खेत में दिखना शुरू हो गई है, तो तुरंत अच्छे फफूंदनाशक (Fungicide) का स्प्रे करें। आप अपनी फसल की स्थिति के अनुसार निम्नलिखित में से किसी एक दवा का प्रयोग कर सकते हैं:
- Tebuconazole 10% + Sulphur 65% WG: यह एक बेहतरीन फफूंदनाशक है जो गलन के साथ-साथ पीलापन भी दूर करता है। इसका इस्तेमाल 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से करें।
- Pyraclostrobin 20% WG: यह दवा जड़ों और तने की फफूंद को तेजी से खत्म करती है।
- Carbendazim 12% + Mancozeb 63% WP (Saaf): यह एक भरोसेमंद और किफायती विकल्प है। इसका छिड़काव 400 से 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से किया जा सकता है।
3. भविष्य के लिए बचाव (बीज उपचार)
अगली बार बुवाई के समय सोयाबीन का सही बीज उपचार जरूर करें। थाइरम या कार्बेन्डाजिम (2-3 ग्राम प्रति किलो बीज) से बीजों को उपचारित करने से शुरुआती 30-40 दिनों तक गलन रोग नहीं लगता। इसके अलावा खेत तैयार करते समय ट्राइकोडर्मा विरिडी का इस्तेमाल मिट्टी को स्वस्थ बनाता है।
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Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1: सोयाबीन में तना गलन रोग की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?
Ans: तना गलन रोकने के लिए टेबुकोनाज़ोल (Tebuconazole) या पाइराक्लोस्ट्रोबिन (Pyraclostrobin) आधारित फफूंदनाशक का स्प्रे सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है।
Q2: क्या खेत में पानी भरा रहने से सोयाबीन के पौधे गलते हैं?
Ans: जी हाँ, जलभराव के कारण मिट्टी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और हानिकारक फफूंद तेजी से बढ़ती है। यही फफूंद तने को सड़ाकर गिरा देती है।
Q3: गलन रोग के कारण पत्तियां पीली क्यों पड़ने लगती हैं?
Ans: जब तना और जड़ें गलने लगती हैं, तो पौधे को जमीन से आवश्यक पोषक तत्व और पानी मिलना बंद हो जाता है। इस भुखमरी के कारण पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं।
Q4: फफूंदनाशक दवा का छिड़काव कब करना चाहिए?
Ans: जैसे ही आपको खेत में 2-3% पौधे गलकर गिरते हुए दिखाई दें, बिना देरी किए तुरंत दवा का स्प्रे कर देना चाहिए ताकि बीमारी अन्य स्वस्थ पौधों तक न फैले।

