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धान की रोपाई के 11 दिन बाद पहली खाद का डोज़

हमारी धान की रोपाई को आज पूरे 11 दिन हो चुके हैं। पौधे खेत में अच्छी तरह स्थापित होने लगे हैं और अब समय था धान में पहला खाद का डोज़ देने का।

इस पहले डोज़ में हमने प्रति एकड़ 35 किलो DAP और 30 किलो यूरिया का उपयोग किया। इसके साथ Apna Power Bio-Fertilizer और सिसगोल्ड भी मिलाया गया।

सभी उत्पादों को अच्छी तरह मिलाने के बाद पूरे खेत में डाल दिया गया।

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धान में पहला खाद का डोज़ कब दिया?

हमने धान की रोपाई के 11 दिन बाद पहला खाद का डोज़ दिया।

रोपाई के बाद यह धान की शुरुआती बढ़वार का समय होता है। इस समय हमारा उद्देश्य पौधों की जड़ों के विकास, हरियाली और अच्छे कल्ले निकलने में सहायता करना था।

प्रति एकड़ इस्तेमाल की गई खाद

धान के इस पहले खाद के डोज़ में हमने प्रति एकड़ निम्न मात्रा का उपयोग किया:

  • DAP – 35 किलो प्रति एकड़
  • यूरिया – 30 किलो प्रति एकड़
  • Apna Power Bio-Fertilizer
  • सिसगोल्ड

DAP, यूरिया, Apna Power Bio-Fertilizer और सिसगोल्ड को पहले अच्छी तरह मिलाया गया। इसके बाद तैयार मिश्रण को पूरे खेत में समान रूप से डाल दिया गया।

DAP का उपयोग क्यों किया?

इस पहले डोज़ में हमने प्रति एकड़ 35 किलो DAP का उपयोग किया।

DAP का इस्तेमाल धान की शुरुआती बढ़वार और जड़ों को मजबूत बनाने में सहायता के उद्देश्य से किया गया। रोपाई के बाद मजबूत जड़ें पौधों को खेत में अच्छी तरह स्थापित होने में मदद करती हैं।

हमारी कोशिश थी कि धान के पौधों को शुरुआत से अच्छा पोषण मिले और उनकी जड़ों का विकास बेहतर हो।

यूरिया का उपयोग क्यों किया?

DAP के साथ प्रति एकड़ 30 किलो यूरिया भी मिलाया गया।

यूरिया पौधों को नाइट्रोजन उपलब्ध कराने में मदद करता है। इसका उपयोग धान के पौधों की शुरुआती हरियाली और बढ़वार में सहायता के उद्देश्य से किया गया।

रोपाई के 11 दिन बाद पौधों को तेजी से बढ़ने के लिए पोषण की जरूरत होती है। इसी कारण पहले खाद के डोज़ में यूरिया को शामिल किया गया।

Apna Power Bio-Fertilizer का उपयोग

DAP और यूरिया के साथ Apna Power Bio-Fertilizer भी मिलाया गया।

इसका उपयोग धान की जड़ों के विकास और मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में सहायता के उद्देश्य से किया गया।

अच्छी जड़ों वाला पौधा मिट्टी से पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से ग्रहण कर सकता है। इसलिए पहले खाद के डोज़ में Apna Power Bio-Fertilizer को भी शामिल किया गया।

सिसगोल्ड का उपयोग

इस मिश्रण में सिसगोल्ड का भी उपयोग किया गया।

सिसगोल्ड को धान की शुरुआती ग्रोथ और अच्छे कल्ले बनने में सहायता के उद्देश्य से मिलाया गया।

धान की फसल में अच्छे और मजबूत कल्ले बनना आगे की फसल के लिए महत्वपूर्ण होता है। हमारी कोशिश है कि पौधों को शुरुआती समय में ऐसा पोषण मिले, जिससे उनकी बढ़वार और कल्ले बनने की प्रक्रिया को सहायता मिल सके।

सभी उत्पादों को मिलाकर खेत में डाला

सबसे पहले प्रति एकड़ 35 किलो DAP और 30 किलो यूरिया लिया गया। इसके बाद इसमें Apna Power Bio-Fertilizer और सिसगोल्ड मिलाया गया।

सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाने के बाद इस मिश्रण को पूरे धान के खेत में डाल दिया गया।

अच्छी तरह मिलाने का उद्देश्य यह था कि खेत में खाद डालते समय सभी उत्पाद एक साथ पहुंचें और पूरे खेत में मिश्रण समान रूप से डाला जा सके।

इस खाद के डोज़ से हमारी क्या उम्मीद है?

इस पहले खाद के डोज़ का मुख्य उद्देश्य धान की शुरुआती बढ़वार में सहायता करना है।

हम इस डोज़ से निम्न परिणामों की उम्मीद कर रहे हैं:

  • धान की जड़ों का बेहतर विकास
  • पौधों की शुरुआती बढ़वार में सहायता
  • पौधों में अच्छी हरियाली
  • पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण
  • अच्छे और ज्यादा कल्ले बनने में सहायता

हालांकि इसका वास्तविक परिणाम खेत में पौधों की बढ़वार देखने के बाद ही पता चलेगा।

अगले 10 से 15 दिनों में देखेंगे परिणाम

धान में पहला खाद का डोज़ डालने के बाद अब हम अगले 10 से 15 दिनों तक फसल में होने वाले बदलाव को देखेंगे।

इस दौरान मुख्य रूप से पौधों की हरियाली, बढ़वार, जड़ों की मजबूती और नए कल्लों पर ध्यान दिया जाएगा।

अगले अपडेट में हम दिखाएंगे कि इस खाद के डोज़ के बाद धान की फसल में कितना बदलाव दिखाई दिया और पौधों में कितने अच्छे कल्ले निकले।

निष्कर्ष

हमारी धान की रोपाई को 11 दिन पूरे होने के बाद हमने पहला खाद का डोज़ दिया।

इसमें प्रति एकड़ 35 किलो DAP और 30 किलो यूरिया के साथ Apna Power Bio-Fertilizer और सिसगोल्ड का उपयोग किया गया। सभी उत्पादों को अच्छी तरह मिलाकर पूरे खेत में डाल दिया गया।

इस डोज़ का उद्देश्य धान की जड़ों के विकास, शुरुआती बढ़वार, पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण और अच्छे कल्ले बनने में सहायता करना है।

अब अगले 10 से 15 दिनों में इसका वास्तविक परिणाम खेत में दिखाई देगा। धान में होने वाले बदलाव और कल्लों की स्थिति की पूरी जानकारी अगले अपडेट में साझा की जाएगी।

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Devendra Singh Thakur

Devendra Singh Thakur किसान, कृषि विषयों के लेखक एवं संस्थापक — Smart KisanDevendra Singh Thakur एक किसान, कृषि विषयों के लेखक और Smart Kisan के संस्थापक हैं। वे फसल प्रबंधन, बीज किस्मों, उर्वरक एवं सुरक्षित कीट-रोग प्रबंधन, कृषि मशीनरी और सरकारी कृषि योजनाओं से जुड़ी उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में साझा करते हैं। लेख तैयार करते समय आधिकारिक कृषि संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, उत्पाद के स्वीकृत लेबल और सरकारी पोर्टलों को प्राथमिकता दी जाती है।

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