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Pusa 1718 Dhan Variety: धान की इस वैरायटी से पाएं बम्पर पैदावार और तगड़ा मुनाफा

क्या आप भी हर साल धान की फसल में लगने वाली बीमारियों से परेशान हैं? क्या ब्लास्ट (Blast) और झुलसा रोग (Bacterial Leaf Blight) आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर देते हैं?

आप अकेले नहीं हैं। भारत के लाखों धान किसान हर साल महंगी-महंगी फफूंदनाशक दवाइयां छिड़कने के बाद भी अपनी आधी फसल गंवा देते हैं। लागत बढ़ती जाती है और मुनाफा लगातार घटता जाता है। ऐसे में एक ऐसी वैरायटी का होना जरूरी है जो न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ पैदावार दे, बल्कि बीमारियों से लड़ने में भी सुपरमैन हो।

यहीं पर काम आती है Pusa 1718 Dhan Variety। बासमती रिसर्च के गढ़ यानी भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा नई दिल्ली द्वारा तैयार की गई यह वैरायटी आज के समय में किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस बेहद डिटेल्ड ब्लॉग में हम इस वैरायटी की ए टू जेड जानकारी लेंगे ताकि आप सही फैसला कर सकें।

Pusa 1718 Dhan Variety आखिर क्या है और इसे क्यों बनाया गया?

सरल शब्दों में कहें तो पूसा 1718, भारत की सबसे मशहूर बासमती वैरायटी ‘पूसा बासमती 1121’ का ही एक सुधरा हुआ और एडवांस रूप है। पूसा 1121 अपने लंबे दानों और लाजवाब खुशबू के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है, लेकिन पिछले कुछ सालों में उसमें ‘झुलसा रोग’ (BBL) बहुत ज्यादा लगने लगा था।

वैज्ञानिकों ने पूसा 1121 की इसी कमजोरी को दूर करने के लिए रिसर्च की। उन्होंने इसके अंदर बीमारियों से लड़ने वाले स्पेशल जींस डाले और तैयार हुई पूसा 1718। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बिना किसी एक्स्ट्रा खर्च के फसल को गंभीर बीमारियों से बचाती है।

यह वैरायटी उन सभी इलाकों के लिए बेस्ट है जहां बासमती की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के किसानों के बीच यह वैरायटी तेजी से अपनी जगह बना रही है।

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पूसा 1718 धान की सबसे बड़ी विशेषताएं (Key Features)

इस वैरायटी को अपने खेत में लगाने से पहले आपको इसकी कुछ खासियतों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए। ये ऐसी बातें हैं जो इसे दूसरी आम वैरायटियों से बिल्कुल अलग बनाती हैं।

1. बीमारियों के खिलाफ फौलादी ढाल

पूसा 1718 को खास तौर पर बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (झुलसा रोग) के प्रति प्रतिरोधी बनाया गया है। जिस खेत में दूसरी वैरायटियां इस बीमारी के आगे घुटने टेक देती हैं, वहां यह शान से हरी-भरी खड़ी रहती है। इससे आपका हजारों रुपए का पेस्टिसाइड का खर्च बच जाता है।

2. मजबूत तना और गिरने की समस्या से मुक्ति

पूसा 1121 की एक बड़ी दिक्कत यह थी कि उसकी लंबाई ज्यादा होने के कारण तेज हवा या बारिश में फसल खेत में गिर (lodging) जाती थी। पूसा 1718 का पौधा थोड़ा छोटा और इसका तना बेहद मजबूत होता है। हवा चलने पर भी यह आसानी से नहीं गिरती, जिससे पैदावार का नुकसान नहीं होता।

3. दाने की क्वालिटी और शानदार खुशबू

पकने के बाद इसके दाने बिल्कुल पूसा 1121 जैसे ही लंबे, पतले और खुशबूदार होते हैं। पकने के बाद चावल टूटता नहीं है और एकदम खिला-खिला बनता है। इसी वजह से मंडियों में इसका रेट भी बहुत शानदार मिलता है।

पूसा 1718 बनाम पूसा 1121: एक सीधा मुकाबला

कई किसान भाई इस उलझन में रहते हैं कि इन दोनों में से कौन सी वैरायटी बेहतर है। आइए इस साफ-सुथरी टेबल के जरिए दोनों का फर्क और खूबियां समझते हैं:

फीचर्स / खूबियांपूसा 1121 (Pusa 1121)पूसा 1718 (Pusa 1718)
पकने का समयलगभग 140 से 145 दिनलगभग 135 से 140 दिन (5 दिन कम)
पौधे की लंबाई120 सेंटीमीटर (ज्यादा लंबी)105 से 110 सेंटीमीटर (मध्यम)
फसल गिरने का खतराबहुत ज्यादा (तेज हवा में रिस्क)बहुत ही कम (मजबूत तना)
झुलसा रोग से बचावबिल्कुल नहीं (जल्दी बीमारी आती है)100% प्रतिरोधी (बीमारी नहीं आती)
औसत पैदावार20 से 22 क्विंटल प्रति एकड़24 से 26 क्विंटल प्रति एकड़
मार्केट डिमांडइंटरनेशनल मार्केट में बहुत हाईपूसा 1121 के बराबर ही हाई रेट

पूसा 1718 की नर्सरी (पनीरी) तैयार करने का सही तरीका

एक शानदार फसल की शुरुआत हमेशा एक मजबूत और स्वस्थ नर्सरी से होती है। पूसा 1718 की पनीरी तैयार करते समय आपको इन स्टेप्स का पालन करना चाहिए।

सही समय का चुनाव

इस वैरायटी की नर्सरी डालने का सबसे बेस्ट समय 20 मई से 15 जून के बीच का होता है। बहुत जल्दी नर्सरी डालने से फसल समय से पहले पक सकती है और पैदावार पर असर पड़ सकता है।

बीज की मात्रा और उपचार (Seed Treatment)

  • एक एकड़ की रोपाई के लिए लगभग 5 से 6 किलोग्राम साफ बीज की जरूरत होती है।
  • बोने से पहले बीज का उपचार जरूर करें। इसके लिए बीज को 10 लीटर पानी में 10 ग्राम बाविस्टिन (Bavistin) और 1 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन (Streptocycline) मिलाकर 12 से 15 घंटे के लिए भिगो दें।
  • ऐसा करने से शुरुआती दिनों में लगने वाली फंगस और बैक्टीरिया जनित बीमारियों का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाता है।

नर्सरी की देखभाल

नर्सरी में बुवाई के बाद हल्का पानी देकर नमी बनाए रखें। जब पनीरी 15 दिन की हो जाए, तो उसमें थोड़ा यूरिया और जिंक सल्फेट डाल दें ताकि पौधे एकदम गहरे हरे और मजबूत बनें। 21 से 25 दिन की पनीरी मुख्य खेत में रोपाई के लिए बिल्कुल तैयार हो जाती है।

खेत की तैयारी और रोपाई का प्रैक्टिकल गाइड

जब आपकी नर्सरी तैयार हो जाए, तो मुख्य खेत की तैयारी में कोई कसर न छोड़ें। अच्छी जुताई ही मिट्टी की ताकत को बढ़ाती है।

खेत को तैयार करना

  • सबसे पहले खेत की एक या दो बार अच्छी गहरी जुताई करें।
  • खेत में पानी भरकर कद्दू (Puddling) अच्छे से करें। कद्दू करने से मिट्टी के महीन छिद्र बंद हो जाते हैं जिससे पानी ज्यादा दिनों तक खेत में रुका रहता है।
  • लेजर लैंड लेवलर से खेत को पूरी तरह समतल जरूर कर लें ताकि पूरे खेत में पानी बराबर मात्रा में पहुंचे।

सही दूरी पर रोपाई

रोपाई करते समय मजदूरों पर खास नजर रखें। अक्सर मजदूर जल्दी के चक्कर में पौधे दूर-दूर लगा देते हैं।

  • लाइन से लाइन की दूरी 20 सेंटीमीटर होनी चाहिए।
  • पौधे से पौधे की दूरी 15 सेंटीमीटर रखें।
  • एक जगह पर कम से कम 2 से 3 स्वस्थ पौधे ही लगाएं। ज्यादा गहरे में रोपाई न करें, 2-3 सेंटीमीटर की गहराई ही बेस्ट होती है।

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खाद और उर्वरक का सही मैनेजमेंट (Fertilizer Schedule)

बासमती धान को बहुत ज्यादा यूरिया की जरूरत नहीं होती। ज्यादा यूरिया डालने से पौधा जरूरत से ज्यादा लंबा हो जाता है और उस पर कीड़ों का हमला बढ़ जाता है। प्रति एकड़ के हिसाब से यह संतुलित चार्ट अपनाएं:

1. बेसल डोज (रोपाई के समय या तुरंत बाद)

  • डीएपी (DAP): 30 किलोग्राम या सिंगल सुपर फास्फेट (SSP): 75 किलोग्राम
  • म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP): 20 किलोग्राम
  • जिंक सल्फेट (33%): 10 किलोग्राम (धान में जिंक डालना बेहद जरूरी है, वरना खैरा रोग लग सकता है)

2. पहला टॉप ड्रेसिंग (रोपाई के 20-25 दिन बाद)

  • यूरिया: 30 किलोग्राम
  • इसके साथ आप चाहें तो कोई अच्छा ग्रोथ प्रमोटर या दानेदार जाइम मिला सकते हैं।

3. दूसरा टॉप ड्रेसिंग (रोपाई के 40-45 दिन बाद)

  • यूरिया: 30 किलोग्राम
  • ध्यान रहे कि इसके बाद खेत में यूरिया का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, खासकर जब धान में बालियां बनने की स्टेज (Goot stage) शुरू होने वाली हो।

पानी का सही मैनेजमेंट और खरपतवार नियंत्रण

धान का मतलब यह नहीं है कि खेत को हमेशा गहरे पानी में डुबाकर रखा जाए। पानी का सही इस्तेमाल ही फसल को दमदार बनाता है।

पानी कब और कितना दें?

  • रोपाई के शुरुआती 15 से 20 दिनों तक खेत में 2-3 इंच पानी लगातार बनाकर रखें। इससे नए कल्ले (Tillers) बहुत तेजी से निकलते हैं और खरपतवार भी नहीं उग पाते।
  • इसके बाद खेत को थोड़ा सूखने दें और फिर पानी दें। इसे ‘अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग’ कहते हैं। इससे जड़ों को ऑक्सीजन मिलती है और जड़ें गहराई तक जाती हैं।
  • बालियां निकलते समय और दाना भरते समय खेत में सूखा बिल्कुल नहीं पड़ना चाहिए। इस दौरान नमी का होना सबसे जरूरी है।

खरपतवारों का सफाया

अगर खेत में खरपतवार उग आए हैं, तो वे आपकी दी हुई आधी खाद खा जाएंगे। इसके लिए:

  • रोपाई के 0 से 3 दिन के अंदर Pretilachlor 50% EC की 500 ml मात्रा को रेत में मिलाकर प्रति एकड़ खेत में समान रूप से बिखेर दें।
  • यदि बाद में मोथा या सांवा घास उग आए, तो रोपाई के 20-25 दिन बाद Bispyribac Sodium 10% SC (Nominee Gold) की 80-100 ml मात्रा का साफ पानी में मिलाकर स्प्रे करें। स्प्रे करते समय खेत का पानी निकाल दें और 48 घंटे बाद दोबारा पानी भरें।

पूसा 1718 में लगने वाले कीड़े और उनका देसी व केमिकल इलाज

यद्यपि यह वैरायटी बीमारियों के खिलाफ मजबूत है, फिर भी कुछ हानिकारक कीड़े इस पर हमला कर सकते हैं। समय रहते इनकी पहचान और इलाज जरूरी है।

1. तना छेदक (Stem Borer)

यह कीड़ा धान के तने के अंदर घुसकर उसे अंदर से खा जाता है, जिससे बीच की पत्ती सूख जाती है (Dead heart)। बालियां आने पर वे सफेद रंग की निकलती हैं जिनमें दाना नहीं होता।

  • इलाज: रोपाई के 25-30 दिन बाद खेत में Cartap Hydrochloride 4G की 7-8 किलोग्राम मात्रा प्रति एकड़ के हिसाब से डालें, या फिर Chlorantraniliprole (Ferterra/Coragen) का इस्तेमाल करें।

2. पत्ती लपेटक (Leaf Folder)

यह सुंडी पत्ती को दोनों तरफ से लपेटकर अंदर बैठ जाती है और उसके हरे हिस्से को खुरच कर खा जाती है। पत्तियां सफेद रंग की दिखने लगती हैं।

  • इलाज: इसका हमला दिखने पर Fipronil 5% SC की 400 ml मात्रा या Flubendiamide (Fame) की 20 ml मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें।

3. भूरा पादप फुदका (BPH – चेपा या तेला)

यह कीड़ा पौधे के निचले हिस्से में तने पर बैठता है और उसका रस चूसता है। इसका हमला होने पर पूरा का पूरा खेत अचानक जलकर भूरा हो जाता है जिसे ‘हॉपर बर्न’ कहते हैं।

  • इलाज: खेत के निचले हिस्से की लगातार निगरानी करें। इसका असर दिखने पर Pymetrozine 50% WDG (Chess) की 120 ग्राम मात्रा या Dinotefuran 20% SG (Token) की 100 ग्राम मात्रा का तने के पास अच्छे से छिड़काव करें।

फसल की कटाई, मड़ाई और शानदार पैदावार

पूसा 1718 धान की फसल रोपाई के बाद लगभग 110 से 115 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। जब खेत की 90% बालियां सुनहरे पीले रंग की हो जाएं, तो पानी लगाना बंद कर दें और फसल की कटाई शुरू करें।

कटाई के समय दानों में नमी लगभग 20% होनी चाहिए। ज्यादा सूखने पर कटाई करने से मिलिंग के समय चावल के दाने टूट सकते हैं। अगर आपने सही वैज्ञानिक तरीके से खेती की है, तो आप आराम से 24 से 28 क्विंटल प्रति एकड़ तक की बम्पर पैदावार ले सकते हैं। मंडियों में इसका आकर्षक रेट होने के कारण यह सीधे तौर पर आपकी जेब में मोटा मुनाफा डालती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या पूसा 1718 एक सरकारी सर्टिफाइड वैरायटी है और इसका बीज कहां मिलेगा?

हां, यह पूरी तरह से IARI (पूसा संस्थान, नई दिल्ली) द्वारा विकसित की गई प्रामाणिक वैरायटी है। इसका असली बीज आपको किसी भी सरकारी कृषि केंद्र, पूसा संस्थान के बीज काउंटर या किसी भरोसेमंद रजिस्टर्ड बीज डीलर से आसानी से मिल जाएगा।

Q2. क्या पूसा 1718 में भी गर्दन तोड़ (Blast) रोग लग सकता है?

पूसा 1718 मुख्य रूप से झुलसा रोग (Bacterial Leaf Blight) के लिए प्रतिरोधी है। गर्दन तोड़ (Blast) रोग के प्रति इसमें मध्यम प्रतिरोधक क्षमता है। अगर मौसम में बहुत ज्यादा नमी या धुंध हो, तो एहतियात के तौर पर एक हल्का फंगिसाइड स्प्रे कर देना बेहतर रहता है।

Q3. क्या पूसा 1718 का चावल खाने में पूसा 1121 जैसा ही स्वादिष्ट होता है?

बिल्कुल। इसके दाने की लंबाई, चौड़ाई, पकने के बाद का फैलाव और इसकी सोंधी खुशबू हूबहू पूसा 1121 जैसी ही होती है। खाने वाले को इन दोनों के स्वाद में कोई अंतर महसूस नहीं होता।

Q4. इस वैरायटी में यूरिया का इस्तेमाल कब बंद कर देना चाहिए?

धान की फसल में रोपाई के 45 दिनों के बाद यूरिया का इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। इसके बाद यूरिया डालने से पौधे की वानस्पतिक वृद्धि ज्यादा होती है जिससे कीड़ों और बीमारियों का हमला बढ़ जाता है और बालियां कमजोर निकलती हैं।

Q5. क्या हम पूसा 1718 की सीधी बुवाई (DSR) कर सकते हैं?

जी हां, पूसा 1718 की सीधी बुवाई (Direct Seeded Rice) भी की जा सकती है। बस ध्यान रहे कि सीधी बुवाई में खरपतवारों का प्रबंधन बहुत मजबूत होना चाहिए, क्योंकि शुरुआत में खेत सूखा रहने से घासें ज्यादा उगती हैं।

अपना कीमती फीडबैक साझा करें

Pusa 1718 Dhan Variety आज के दौर में कम लागत में बासमती की खेती करने का सबसे बेहतरीन और सुरक्षित जरिया है। अगर आप बीमारियों पर होने वाले फिजूल खर्च को रोकना चाहते हैं और अपनी पैदावार को एक नए स्तर पर ले जाना चाहते हैं, तो इस सीजन में अपने खेत के एक हिस्से में इस वैरायटी को जरूर मौका दें। सही देखरेख और सही समय पर सही खाद-पानी का कॉम्बिनेशन आपको निराश नहीं करेगा।

क्या आपने पहले कभी पूसा 1718 या 1121 वैरायटी लगाई है? आपका पैदावार का अनुभव कैसा रहा? या खेती से जुड़ा आपका कोई और सवाल है? नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर हमसे जरूर शेयर करें। अगर आपको यह जानकारी मददगार लगी हो, तो अपने किसान ग्रुप्स और वॉट्सऐप पर इसे शेयर करना बिल्कुल न भूलें। खेती-किसानी से जुड़ी ऐसी ही प्रैक्टिकल जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहें!

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