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मक्का में शुरुआती अवस्था में पत्ते कट रहे हैं तो क्या करें?

मक्के की खेती करने वाले किसानों के लिए फसल की शुरुआती अवस्था बेहद संवेदनशील होती है। शुरुआत में मक्का बीज उपचार सही से करने के बावजूद, बीज बुवाई के 10 से 20 दिन बाद ही अगर आपको मक्का के पत्तों में छेद दिखाई देने लगें या पत्ते कटे हुए मिलें, तो यह एक गंभीर चेतावनी है। शुरुआत में ही ध्यान न देने पर पूरी फसल बर्बाद हो सकती है और अच्छी से अच्छी मक्का की हाइब्रिड किस्में लगाने के बावजूद पैदावार में भारी कमी आ सकती है।

आज हम बात करेंगे कि मक्का में पत्ते क्यों कटते हैं और इसे तुरंत रोकने के लिए कौन से कारगर उपाय अपनाने चाहिए। आप कुछ आसान जैविक और रासायनिक तरीकों से अपनी फसल को बचा सकते हैं।

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मक्का के पत्ते कटने के मुख्य कारण

शुरुआती अवस्था में मक्का की फसल पर मुख्य रूप से दो खतरनाक कीटों का हमला होता है। इन्हीं की वजह से पत्ते कटे-फटे नजर आते हैं:

  • फॉल आर्मीवर्म (Fall Armyworm): यह मक्का का सबसे खतरनाक दुश्मन है। यह कीट रात के समय हमला करता है और पौधे के बीच वाले हिस्से (पोंगे) में छिपकर नए पत्तों को खाता रहता है।
  • तना छेदक (Stem Borer): यह कीट पौधे के तने के अंदर घुस जाता है। यह अंदर ही अंदर पौधे को खोखला कर देता है, जिससे पत्ते सूखने और कटने लगते हैं।

कीटों के हमले की सही पहचान कैसे करें?

सही इलाज के लिए बीमारी की पहचान होना सबसे ज्यादा जरूरी है। आप अपने खेत में जाकर इन लक्षणों पर गौर करें:

  • पत्तों पर सफेद धारियां: शुरुआती दौर में कीड़े पत्तों की ऊपरी सतह को खुरच कर खाते हैं, जिससे पत्तों पर सफेद या पारदर्शी धारियां बन जाती हैं।
  • पत्तों में बड़े छेद: जैसे-जैसे सुंडी (इल्ली) बड़ी होती है, वह पत्तों को किनारों से और बीच से खाना शुरू कर देती है।
  • पोंगे में बुरादा (Frass): मक्का के बीच वाले हिस्से (गोभ या पोंगे) में अगर आपको लकड़ी के बुरादे या गीली मिट्टी जैसा पदार्थ दिखे, तो समझ लें कि फॉल आर्मीवर्म अंदर मौजूद है।

मक्का में पत्ते कटने से रोकने के उपाय

अगर खेत में 5 से 10 प्रतिशत पौधों में भी ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत बचाव के कदम उठाने चाहिए। आप अपनी सुविधा के अनुसार नीचे दिए गए उपाय अपना सकते हैं।

1. जैविक और प्रारंभिक उपाय (Organic Control)

अगर कीटों का हमला अभी शुरू ही हुआ है, तो आप रसायनों के बिना भी इन्हें रोक सकते हैं। ये तरीके पर्यावरण और फसल दोनों के लिए सुरक्षित हैं।

  • नीम के तेल का स्प्रे: 1500 PPM वाला नीम का तेल (Neem Oil) लें। इसकी 50ml मात्रा को 15 लीटर पानी में मिलाकर शाम के समय स्प्रे करें।
  • रेत और राख का इस्तेमाल: मक्के के पोंगे (Whorl) में सूखी रेत या लकड़ी की राख भर दें। इससे सुंडी का दम घुट जाता है और वह पोंगे को खा नहीं पाती।
  • फेरोमोन ट्रैप (Pheromone Traps): एक एकड़ खेत में 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं। यह नर कीटों को फंसाकर उनकी आबादी को बढ़ने से रोकता है।

2. रासायनिक उपाय (Chemical Control)

जब कीटों का प्रकोप ज्यादा हो और जैविक नियंत्रण काम न कर रहा हो, तब रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल करना जरूरी हो जाता है। हमेशा अच्छी कंपनी की दवाओं का ही प्रयोग करें।

  • इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (Emamectin Benzoate): यह दवा फॉल आर्मीवर्म के लिए बहुत असरदार है। इसकी 80 ग्राम मात्रा को 150 लीटर पानी में घोलकर एक एकड़ में स्प्रे करें।
  • स्पिनेटोरम 11.7% SC (Spinetoram): यह एक बहुत ही शक्तिशाली दवा है जो सुंडी को तुरंत मारती है। इसकी 100ml मात्रा को प्रति एकड़ के हिसाब से इस्तेमाल करें।
  • क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC (Chlorantraniliprole): यह दवा लंबे समय तक फसल को सुरक्षित रखती है। इसकी 60ml मात्रा को 150 लीटर पानी के साथ प्रति एकड़ खेत में छिड़कें।

स्प्रे करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

दवा का असर तभी होगा जब आप उसे सही तरीके से खेत में डालेंगे। स्प्रे करते समय कुछ सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है।

  • स्प्रे का सही समय: फॉल आर्मीवर्म रात में सक्रिय होता है। इसलिए हमेशा शाम के समय (4 बजे के बाद) ही दवाओं का छिड़काव करें।
  • दवा का सही दिशा में छिड़काव: स्प्रे का नोजल मक्का के पौधे के बिल्कुल बीच (पोंगे/गोभ) की तरफ रखें। दवा पौधे के अंदर जानी चाहिए क्योंकि कीड़ा वहीं छिपा होता है।
  • सुरक्षा किट पहनें: किसी भी रासायनिक दवा का इस्तेमाल करते समय मास्क और दस्ताने जरूर पहनें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. मक्का में फॉल आर्मीवर्म का हमला सबसे ज्यादा कब होता है?

बुवाई के 10 से 40 दिन के भीतर फॉल आर्मीवर्म का खतरा सबसे अधिक रहता है। यह कीट पौधे की शुरुआती बढ़त के समय ही पोंगे में घुसकर नए पत्तों को खाना शुरू कर देता है।

Q2. मक्का के पत्ते खाने वाले कीड़े की सबसे सस्ती और अच्छी दवा कौन सी है?

शुरुआती अवस्था के लिए ‘इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG’ सबसे किफायती और असरदार दवा मानी जाती है। यह बाजार में आसानी से मिल जाती है और सुंडी पर तुरंत असर करती है।

Q3. क्या मक्के में यूरिया के साथ कीटनाशक मिलाकर डाल सकते हैं?

हाँ, बहुत से किसान यूरिया (विशेषकर जब वे मक्का में पहली खाद दे रहे होते हैं) में ‘कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4G’ या ‘फिप्रोनिल 0.3% GR’ दानेदार कीटनाशक मिलाकर जड़ों के पास देते हैं। यह तना छेदक कीटों को रोकने में काफी मदद करता है।

Q4. कीटनाशक का स्प्रे करने के कितने दिन बाद असर दिखता है?

अगर आपने सही दवा को सीधे पौधे के पोंगे में स्प्रे किया है, तो 24 से 48 घंटे के भीतर सुंडी मरना शुरू हो जाती है और फसल में नया स्वस्थ पत्ता निकलने लगता है।

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Team Smart Kisan

Maneesh Thakur Agriculture Expert & Consultant | Founder, Smart KisanManeesh Thakur कृषि क्षेत्र से जुड़े लेखक एवं कृषि सलाहकार हैं। वे फसल प्रबंधन, उन्नत बीज किस्मों, उर्वरक प्रबंधन, कृषि मशीनरी और सरकारी कृषि योजनाओं पर हिंदी में जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य किसानों तक सरल, व्यावहारिक और शोध-आधारित जानकारी पहुंचाना है ताकि किसान बेहतर निर्णय लेकर अपनी खेती को अधिक लाभदायक बना सकें। 📌 Founder: SmartKisan.co.in

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