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JS 2117 Soybean Variety in Hindi: कम दिनों में छप्परफाड़ पैदावार देने वाली इस नई किस्म का पूरा सच

क्या आप भी हर साल सोयाबीन की बुवाई तो बहुत उम्मीद के साथ करते हैं, लेकिन ऐन वक्त पर कभी सूखा पड़ने, कभी अचानक तेज बारिश होने या फिर पीला मोज़ेक वायरस (Yellow Mosaic Virus) के हमले से आपकी उम्मीदों पर पानी फिर जाता है? मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के सोयाबीन किसानों के सामने आज सबसे बड़ी सिरदर्दी यही है कि ऐसी कौन सी वैरायटी चुनी जाए जो कम दिनों में पककर तैयार भी हो जाए, जिसमें बीमारियां न लगें और कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई करते वक्त फलियां खेत में बिखरकर बर्बाद न हों।

अगर आप भी पुरानी पड़ चुकी वैरायटीज के कमजोर होते परफॉर्मेंस और उनके लगातार घटते उत्पादन से बुरी तरह परेशान हो चुके हैं, तो देश के टॉप कृषि वैज्ञानिकों ने इसका एक बेहद तगड़ा और सटीक तोड़ निकाल लिया है। आज हम बात करने वाले हैं सोयाबीन की एक बेहद शानदार, आधुनिक और रिकॉर्डतोड़ उत्पादन देने वाली किस्म के बारे में—JS 2117 Soybean Variety in Hindi

इस ब्लॉग पोस्ट में हम कोई हवा-हवाई या किताबी बातें नहीं करेंगे। एक किसान भाई के तौर पर आपको जमीन पर काम करते समय किन प्रैक्टिकल बातों का ख्याल रखना है, इस वैरायटी की कमियां क्या हैं, खूबियां क्या हैं, बीज की सही मात्रा कितनी डालनी है और बुवाई से लेकर कटाई तक का सही तरीका क्या है, इन सब पर बिल्कुल बारीकी से और खुलकर चर्चा करेंगे। चलिए बिना समय गंवाए सीधे मुद्दे की बात शुरू करते हैं।

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आखिर क्या है JS 2117 सोयाबीन वैरायटी? (An Overview)

JS 2117 Soybean Variety in Hindi को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV), जबलपुर के वैज्ञानिकों द्वारा विशेष रिसर्च के बाद विकसित किया गया है। इसे मुख्य रूप से देश के मध्य क्षेत्र (Central Zone) यानी मध्य प्रदेश, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों की मिट्टी और वहां के बदलते मौसम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

यह वैरायटी मुख्य रूप से एक ‘शॉर्ट से मीडियम ड्यूरेशन’ (कम से मध्यम समय) वाली किस्म है। यह मात्र 95 से 100 दिनों के भीतर पूरी तरह से पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। कम समय की वैरायटी होने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि मानसून की आखिरी बारिश अगर जल्दी भी खत्म हो जाए, तो भी इस फसल पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। साथ ही, किसानों को अगली फसल जैसे गेहूं, चना या आलू की अगेती बुवाई के लिए खेत बिल्कुल सही समय पर खाली मिल जाता है।

खेत में JS 2117 सोयाबीन को कैसे पहचानें? इसकी मुख्य विशेषताएं

बाजार में नकली बीजों का धंधा बहुत जोरों पर चलता है। ऐसे में जब आप अपने खेत में यह वैरायटी लगाएं, या किसी दूसरे के खेत में देखें, तो आपको इसकी असली पहचान पता होनी चाहिए। इसकी कुछ खास शारीरिक बनावट नीचे दी गई है:

  • फूलों का रंग: बुवाई के लगभग 35 से 38 दिनों के बाद इस किस्म के पौधों में सफेद रंग के सुंदर फूल आने लगते हैं। फूलों का सफेद होना इसकी एक बहुत बड़ी पहचान है।
  • पत्तियों का आकार: इसकी पत्तियां हल्के से लेकर गहरे हरे रंग की होती हैं और इनका आकार चौड़ा व अंडाकार (Oval) होता है, जो धूप को बेहतर तरीके से सोखकर पौधों का अच्छा विकास करती हैं।
  • फलियों की बनावट: इसकी फलियां हल्की भूरी और चिकनी होती हैं। ज्यादातर फलियों में 3 दाने बहुत ही मजबूत और बराबर साइज के बनते हैं।
  • पौधे की बनावट और ऊंचाई: इस वैरायटी का पौधा सीधा और ऊपर की तरफ बढ़ता है। इसका तना काफी मजबूत होता है, जिसकी वजह से तेज हवा चलने या भारी बारिश होने पर भी फसल खेत में आड़ी ( Lodging ) नहीं गिरती।

प्रति एकड़ पैदावार और समय अवधि (Yield & Timeline)

खेती-किसानी में सारा गणित आकर रुकता है दो ही चीजों पर—पहला समय और दूसरा पैदावार। आइए एक आसान टेबल के जरिए JS 2117 के इस पूरे गणित को समझते हैं:

पैरामीटर (Parameter)विवरण और आंकड़े (Details)
कुल समय अवधि (Crop Duration)95 से 100 दिन
औसत पैदावार (Average Yield)10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़
अधिकतम पैदावार (Maximum Yield)14 से 16 क्विंटल प्रति एकड़ (बेहतर खाद-पानी प्रबंधन के साथ)
तेल की मात्रा (Oil Content)लगभग 18.5% से 19.5%
दाना का प्रकार (Grain Type)मध्यम-बड़ा आकार, पीला, चमकदार और वजनदार दाना

जरूरी नोट: यदि आप पारंपरिक छिटकाव विधि को छोड़कर ब्रॉड बेड फरो (BBF) यानी बेड बनाकर या रिज एंड फरो (नाली और मेड़) विधि से इसकी बुवाई करते हैं, तो हवा और धूप का सही तालमेल मिलने से इसकी पैदावार आसानी से 15 क्विंटल प्रति एकड़ के पार पहुंच सकती है।

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JS 2117 सोयाबीन के सबसे बड़े फायदे (Why It’s the Best Choice)

मार्केट में आज दर्जनों वैरायटीज मौजूद हैं, फिर भी प्रगतिशील किसान इस किस्म को अपने खेतों में इतनी तेजी से क्यों अपना रहे हैं? इसके पीछे 4 सबसे बड़े और प्रैक्टिकल कारण हैं:

1. पीला मोज़ेक (YMV) और कीटों के प्रति कड़ा रेजिस्टेंस

पुरानी वैरायटीज जैसे JS 9560 या JS 335 में अब पीला मोज़ेक वायरस बहुत तेजी से हमला करता है, जिससे पूरी की पूरी फसल पीली पड़कर सूख जाती है। JS 2117 Soybean Variety in Hindi की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह पीला मोज़ेक वायरस (Yellow Mosaic Virus), राइजोक्टोनिया रूट रॉट (जड़ सड़न) और गर्डल बीटल जैसे खतरनाक कीटों के प्रति बहुत ज्यादा सहनशील है। इससे आपका कीटनाशकों (Pesticides) पर होने वाला हजारों रुपये का फालतू खर्च बच जाता है।

2. कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई के लिए सबसे बेस्ट

आजकल गांवों में मजदूरों की भारी किल्लत है, इसलिए ज्यादातर किसान भाई कंबाइन हार्वेस्टर से ही सोयाबीन कटवाना पसंद करते हैं। कई कम दिन वाली किस्मों की फलियां जमीन से बिल्कुल सटकर लगती हैं, जिससे हार्वेस्टर से कटाई करते समय नीचे की बहुत सारी फलियां कटने से छूट जाती हैं। लेकिन JS 2117 में पहली फली जमीन से लगभग 12 से 15 सेंटीमीटर ऊपर लगती है। इसका सीधा फायदा यह होता है कि हार्वेस्टर बिना किसी नुकसान के पूरी फसल को नीचे से साफ काट लेता है।

3. फलियां चटकने की कोई समस्या नहीं (Non-Shattering Habit)

अक्सर देखा जाता है कि फसल पकने के बाद अगर 4-5 दिन भी कटाई में देरी हो जाए, तो कई किस्मों की फलियां खेत में ही चटक जाती हैं और दाने जमीन पर बिखर जाते हैं। JS 2117 में नॉन-शैटरींग का बेहतरीन गुण है। यह पकने के बाद भी कम से कम 8 से 10 दिनों तक खेत में बिना किसी नुकसान के खड़ी रह सकती है, जिससे आपको कटाई के लिए पूरा समय मिल जाता है।

4. सूखा और भारी बारिश दोनों झेलने की क्षमता

मौसम का आजकल कोई भरोसा नहीं रहा। कभी बुवाई के बाद 20 दिन तक सूखा पड़ जाता है, तो कभी लगातार एक हफ्ता पानी बरसता है। इस वैरायटी का रूट सिस्टम (जड़ें) काफी गहरा और फैला हुआ होता है। यह जमीन के भीतर से नमी खींचकर कम पानी में भी दानों को पूरा आकार दे देती है, और अगर खेत में कुछ समय के लिए पानी भर भी जाए, तो इसकी मजबूत जड़ें सड़ती नहीं हैं।

बुवाई का वैज्ञानिक तरीका और स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

अगर आप सिर्फ सही बीज खरीदकर ले आते हैं और बुवाई के पुराने ढर्रे को नहीं बदलते, तो आपको कभी भी पूरा उत्पादन नहीं मिलेगा। JS 2117 सोयाबीन से बंपर पैदावार लेने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को ध्यान से फॉलो करें:

1.खेत की तैयारी और सही बेसल डोज:जून का पहला हफ्ता.

मानसून आने से पहले अपने खेत की एक बार कल्टीवेटर या डिस्क हैरो से अच्छी जुताई कर लें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। आखिरी जुताई के समय प्रति एकड़ 2 बैग सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) और 20 किलो मयूरिएट ऑफ पोटाश (MOP) खेत में जरूर मिला दें। सोयाबीन को अलग से ज्यादा नाइट्रोजन की जरूरत नहीं होती, इसलिए शुरुआती यूरिया देने से बचें।

2.बुवाई का बिल्कुल सही समय (Sowing Window):15 जून से 5 जुलाई.

जब आपके इलाके में अच्छी मानसून की बारिश हो जाए और खेत की मिट्टी में कम से कम 3 से 4 इंच तक गहराई तक अच्छी नमी (ओला) आ जाए, तभी बुवाई की शुरुआत करें। सूखी या कम नमी वाली मिट्टी में बुवाई करने से बीज सड़ सकता है।

3.बीज उपचार का कड़ा नियम (Seed Treatment):बुवाई से 2 घंटे पहले.

इस स्टेप को कभी भी मिस न करें। सबसे पहले फंगस से सुरक्षा के लिए कारबॉक्सिन + थिरम (जैसे विटावैक्स पावर) या पेनफ्लूफेन + ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन (एवरगोल प्राइमी) @ 2 ग्राम प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचारित करें। इसके ठीक बाद, नाइट्रोजन फिक्सेशन बढ़ाने के लिए राइजोबियम कल्चर और पीएसबी (PSB) कल्चर 5-5 ग्राम प्रति किलो बीज में मिलाकर छायादार जगह पर सुखा लें।

4.लाइन से लाइन और बीज की सही दूरी:सीड ड्रिल सेटिंग.

बुवाई करते समय सीड ड्रिल की कतार से कतार (Line to Line) की दूरी 16 से 18 इंच के बीच रखें। पौधे से पौधे की दूरी लगभग 4 से 5 सेंटीमीटर होनी चाहिए। ध्यान रहे कि बीज मिट्टी में 3 से 4 सेंटीमीटर से ज्यादा गहरा न गिरे, नहीं तो अंकुरण बहुत कमजोर होगा।

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बीज दर (Seed Rate) का सही और सटीक गणित

अधिकतर किसान भाई सोचते हैं कि खेत में जितना ज्यादा बीज डालेंगे, फसल उतनी ही घनी होगी और पैदावार उतनी ही ज्यादा मिलेगी। यह बिल्कुल गलत सोच है। ज्यादा घना होने पर पौधे धूप और हवा के लिए आपस में लड़ने लगते हैं, जिससे उनका तना तो लंबा हो जाता है लेकिन उन पर फलियां बहुत कम आती हैं।

  • सामान्य कतार विधि (सीड ड्रिल) के लिए: JS 2117 का दाना मध्यम से थोड़ा बड़ा होता है, इसलिए इसके लिए 32 से 35 किलोग्राम प्रति एकड़ का बीज बिल्कुल पर्याप्त और सटीक है।
  • बेड विधि (BBF) के लिए: अगर आप मेड़ या बेड बनाकर बो रहे हैं, तो आप 28 से 30 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज दर रखकर भी बहुत ही शानदार और रिकॉर्ड उत्पादन हासिल कर सकते हैं।

काम की सलाह: बाजार से लाए गए या घर के रखे हुए बीज को खेत में डालने से पहले उसका जर्मिनेशन टेस्ट (अंकुरण जांच) जरूर कर लें। एक सूती बोरी या अखबार में 100 दाने लपेटकर नमी दें। अगर 70 से ज्यादा दाने अंकुरित होते हैं, तभी ऊपर बताई गई बीज दर का पालन करें। अगर अंकुरण कम है, तो बीज की मात्रा थोड़ी बढ़ा दें।

खरपतवार और कीट प्रबंधन (Weed & Pest Management)

सोयाबीन की फसल के पहले 30 दिन बहुत नाजुक होते हैं। अगर इस दौरान खेत को खरपतवार (घास-फूस) से मुक्त नहीं रखा गया, तो आपकी पैदावार 45% तक घट सकती है।

खरपतवार नियंत्रण के अचूक उपाय

  1. बुवाई के तुरंत बाद (Pre-Emergence): बुवाई के 72 घंटे के भीतर, जब फसल और घास न उगी हो, तब Diclosulam (जैसे स्ट्रांगआर्म) 12.4 ग्राम प्रति एकड़ या Pendimethalin का छिड़काव करें। यह चौड़ी और संकरी पत्ती के कचरे को उगने ही नहीं देता।
  2. खड़ी फसल में (Post-Emergence): अगर शुरुआती स्प्रे छूट गया है और फसल 20-25 दिन की हो गई है, तो खरपतवार की 2 से 4 पत्ती की अवस्था में Imazethapyr या Quizalofop-p-ethyl का स्प्रे करें। ध्यान रहे, स्प्रे के समय खेत में अच्छी नमी होनी चाहिए।

मुख्य कीट और उनका समय पर इलाज

  • गर्डल बीटल और तंबाकू की इल्ली: ये पत्तों और तनों को खाकर पौधे को खोखला कर देते हैं। इनसे बचाव के लिए फसल में फूल आने की शुरुआती स्टेज पर ही Chlorantraniliprole (कोराजन) @ 60 ml प्रति एकड़ या Emamectin Benzoate @ 80 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 150-200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
  • रस चूसक कीट (सफेद मक्खी/थ्रिप्स): यही कीट खेतों में पीला मोज़ेक फैलाते हैं। इनके लिए शुरुआती स्टेज में ही Thiamethoxam या Acetamiprid का छिड़काव करें।

रासायनिक खादों का सही तालमेल (Fertilizer Schedule)

सोयाबीन को यूरिया की तुलना में फास्फोरस और सल्फर की सबसे ज्यादा जरूरत होती है क्योंकि यह एक तेल वाली फसल है। नीचे दी गई टेबल के हिसाब से ही अपने खेत में खाद डालें:

खाद का नाम (Fertilizer)प्रति एकड़ सही मात्रादेने का सबसे सही समय
सिंगल सुपर फास्फेट (SSP)100 किलोग्राम (2 बैग)खेत की आखिरी जुताई के समय
मयूरिएट ऑफ पोटाश (MOP)20 से 25 किलोग्रामबुवाई के समय बेसल डोज के रूप में
सल्फर (Bentonite Sulphate 90%)10 किलोग्रामबुवाई के वक्त (अगर एसएसपी का इस्तेमाल न किया हो)
जिंक सल्फेट (Zinc Sulphate)10 किलोग्राममिट्टी तैयार करते समय (हर 3 साल में एक बार)

किसान भाई इन 3 बड़ी गलतियों से हमेशा बचें

  • फूल आने के समय कड़ा स्प्रे करना: जब आपकी सोयाबीन की फसल में सफेद फूल पूरी तरह से खिल चुके हों, उस दौरान खेत में कोई भी बहुत तेज या कड़क केमिकल फंगीसाइड या इंसेक्टिसाइड का हैवी स्प्रे न करें। इससे फूल झड़ने (Flower Drop) की समस्या हो सकती है। जो भी हैवी स्प्रे करना हो, वह फूल आने से पहले या फलियां बनते समय करें।
  • खेत में जलभराव की अनदेखी: सोयाबीन को नमी पसंद है, लेकिन जड़ों में पानी का जमा होना इसके लिए जहर जैसा है। खेत के चारों तरफ पानी निकासी (Drainage) का अच्छा रास्ता बनाएं ताकि भारी बारिश का पानी खेत में ठहरे नहीं।
  • बिना बीज उपचार के बुवाई: बिना दवा मिलाए सीधे बीज बोने से जमीन के भीतर मौजूद फंगस बीज को अंकुरित होने से पहले ही सड़ा देते हैं, जिससे खेत खाली-खाली नजर आता है।

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अंतिम बात: क्या आपको JS 2117 लगानी चाहिए?

बदलते मौसम, लगातार बढ़ती बीमारियों और मजदूरों की किल्लत के इस दौर में JS 2117 Soybean Variety in Hindi किसानों के लिए एक बेहतरीन वरदान साबित हो सकती है। यह किस्म न सिर्फ आपका रिस्क कम करती है, बल्कि कम दिनों में पककर आपको एक कड़क और भारी उत्पादन देती है, जिससे आपकी जेब में सीधे ज्यादा मुनाफा आता है। अगर आप इस बार अपनी सोयाबीन की खेती से एक नया रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं, तो वैज्ञानिक तरीके से इस वैरायटी को अपने खेत के एक हिस्से में जरूर आजमाएं।

क्या आपने इस साल अपने खेत में JS 2117 लगाने की तैयारी कर ली है? या आपका सोयाबीन की खेती से जुड़ा कोई और सवाल है? नीचे कमेंट बॉक्स में हमसे जरूर पूछें। खेती-किसानी से जुड़ी ऐसी ही पूरी तरह प्रैक्टिकल और जमीनी जानकारियों के लिए हमसे जुड़े रहें। आपकी फसल अच्छी हो और आपको सही दाम मिले, यही हमारी कामना है!

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. JS 2117 सोयाबीन की वैरायटी कितने दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार होती है?

यह किस्म बुवाई के बाद मात्र 95 से 100 दिनों के भीतर पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है, जिससे इसके बाद गेहूं या चने की बुवाई बिल्कुल सही समय पर की जा सकती है।

Q2. इस वैरायटी के फूलों का रंग कैसा होता है और इसे कैसे पहचानें?

JS 2117 सोयाबीन की सबसे बड़ी पहचान यह है कि इसमें सफेद रंग के फूल आते हैं। इसके पौधे सीधे और मजबूत तने वाले होते हैं, और इसकी फलियां चिकनी होती हैं।

Q3. क्या JS 2117 को कंबाइन हार्वेस्टर से आसानी से काटा जा सकता है?

जी हां, बिल्कुल। इस वैरायटी में पहली फली जमीन से काफी ऊपर (लगभग 12-15 सेमी) लगती है, जिससे हार्वेस्टर से कटाई करते समय फलियों का कोई नुकसान नहीं होता।

Q4. क्या यह वैरायटी पीला मोज़ेक वायरस (YMV) को झेल सकती है?

हां, JS 2117 को पीला मोज़ेक वायरस (Yellow Mosaic Virus) और जड़ सड़न (Root Rot) जैसी खतरनाक बीमारियों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी और सहनशील बनाया गया है।

Q5. JS 2117 सोयाबीन की प्रति एकड़ औसत पैदावार कितनी मिल जाती है?

सामान्य मौसम और सही देखरेख में इसकी औसत पैदावार 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। अगर मौसम पूरी तरह अनुकूल रहे और आधुनिक बेड विधि अपनाई जाए, तो यह 15-16 क्विंटल तक भी पहुंच सकती है।

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