मानसून की बारिश किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होती। लेकिन जब यही बारिश जरूरत से ज्यादा होने लगे, तो यह खड़ी फसलों के लिए बहुत बड़ा खतरा बन जाती है।
कई बार सही जानकारी न होने की वजह से किसान बारिश के दौरान कुछ ऐसे काम कर बैठते हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। अगर आप खेती करते हैं, तो यह जानना बहुत जरूरी है कि मौसम खराब होने पर खेतों में क्या करना है और क्या बिल्कुल नहीं करना है। मौसम विभाग द्वारा जारी होने वाली ICAR की सबसे महत्वपूर्ण सलाह में भी विपरीत मौसम में सावधानी बरतने के बारे में विशेष निर्देश दिए जाते हैं।
इस लेख में हम सीधी और सटीक जानकारी देंगे कि भारी बारिश में कौन-से कृषि कार्य रोक देने चाहिए, ताकि आपकी मेहनत और पूंजी दोनों सुरक्षित रह सकें।
भारी बारिश के दौरान तुरंत रोक दें ये 5 कृषि कार्य
जब मौसम विभाग भारी बारिश का अलर्ट जारी करे, तो खेतों में कुछ कामों को बिना किसी देरी के बंद कर देना चाहिए। यहाँ उन प्रमुख कार्यों की सूची दी गई है:
1. कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव
भारी बारिश के दौरान या ठीक पहले खेतों में किसी भी तरह की दवा, कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव बिल्कुल न करें। बारिश के तेज पानी के साथ यह सब तुरंत धुल जाएगा और आपकी पूरी लागत बेकार चली जाएगी।
उदाहरण के लिए, यदि आपने खेतों में अभी-अभी बुवाई की है, तो तुअर बुवाई के बाद खरपतवार नियंत्रण के लिए कीटनाशक या हर्बिसाइड डालने का काम बारिश रुकने के बाद ही करें। रसायनों के बहकर नदी-नालों में जाने से हमारे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। मौसम पूरी तरह साफ होने और पौधों की पत्तियों के सूखने के बाद ही छिड़काव की योजना बनाएं।
2. खेतों की गहरी जुताई और बुवाई
लगातार बारिश के बीच या खेत में पानी भरा होने पर ट्रैक्टर से जुताई करने से मिट्टी की संरचना बुरी तरह बिगड़ जाती है। ज्यादा गीली मिट्टी में ट्रैक्टर चलने से मिट्टी दबकर कठोर हो जाती है, जिससे जड़ों का विकास रुक जाता है।
यदि आप अभी फसलों की बुवाई करने की सोच रहे हैं और भारी बारिश का अंदेशा है, तो यह जरूर जान लें कि क्या 7 जुलाई के बाद सोयाबीन बुवाई करना आपके लिए सही रहेगा या नहीं। भारी बारिश में नए बीज बोने से बीज पानी में बह सकते हैं या ज्यादा नमी के कारण खेत में ही सड़ सकते हैं। इसलिए, खेत की मिट्टी जब तक भुरभुरी और हल्की न हो जाए, तब तक बुवाई का काम टाल दें।
3. सिंचाई का काम (खेतों में पानी देना)
यह बहुत सामान्य सी बात है, लेकिन कई बार किसान पहले से तय रूटीन या बिजली आने के हिसाब से ट्यूबवेल चला देते हैं। जब मौसम विभाग ने बारिश की संभावना जताई हो, तो सिंचाई का काम पूरी तरह से रोक देना चाहिए।
खेतों में ज्यादा पानी भरने (जलभराव) से फसलों की जड़ें गलने लगती हैं और उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। अगर सोयाबीन जैसी फसलों में बुवाई के तुरंत बाद मूसलाधार बारिश हो जाए, तो किसानों को सोयाबीन बुवाई के बाद पहली बारिश के दौरान जल निकासी पर विशेष ध्यान देना चाहिए, नहीं तो पूरी की पूरी फसल कुछ ही दिनों में पीली पड़कर सूख सकती है।
4. फसलों की कटाई (Harvesting)
अगर आपकी फसल पककर कटाई के लिए तैयार है और भारी बारिश का अलर्ट है, तो कटाई का काम तुरंत रोक दें। कटी हुई फसल अगर खेत में पानी में पड़ी रह गई, तो वह अंकुरित हो सकती है या पूरी तरह बर्बाद हो सकती है।
अगर कुछ फसल कट चुकी है, तो उसे तुरंत किसी सुरक्षित और सूखे स्थान पर ले जाएं या वाटरप्रूफ तिरपाल से कसकर ढक दें। नमी के कारण अनाज में फफूंद लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
5. निराई-गुड़ाई का काम (Weeding)
खेतों में बहुत ज्यादा कीचड़ या पानी होने पर खरपतवार निकालने (निराई-गुड़ाई) का काम नहीं करना चाहिए। बहुत ज्यादा गीली मिट्टी में निराई करने से मुख्य फसल की जड़ें हिल सकती हैं और पौधे उखड़ सकते हैं। जैसे कि बारिश के सीजन में सोयाबीन में दूसरी निराई गुड़ाई का सही समय देखकर ही खेत में उतरना चाहिए। इसके साथ ही, बारिश के समय गीले खेतों में काम करने से सांप या जहरीले कीड़े-मकोड़ों के काटने का डर भी बना रहता है, जो किसान की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
भारी बारिश में किसानों के लिए जरूरी बचाव के उपाय
कुछ सावधानियां अपनाकर आप भारी बारिश से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं। इन महत्वपूर्ण बातों का खास ध्यान रखें:
- जल निकासी का प्रबंध करें: खेतों में पानी बिल्कुल रुकने न दें। जलभराव को रोकने के लिए खेत के चारों तरफ और बीच में ढलान के अनुसार गहरी नालियां जरूर बनाएं।
- बीज और खाद को सुरक्षित रखें: खेत या खुले में रखे यूरिया, डीएपी और बीजों के कट्टों को तुरंत किसी ऊंचे और पक्के गोदाम में शिफ्ट करें।
- मौसम की जानकारी रखें: कृषि विभाग और मौसम विभाग की चेतावनियों पर लगातार नजर बनाए रखें। आजकल मोबाइल ऐप्स के जरिए सटीक मौसम की जानकारी आसानी से मिल जाती है।
खेती में बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है
खेती का काम काफी हद तक मौसम के मिजाज पर निर्भर करता है। भारी बारिश में कृषि कार्य समझदारी से रोक देने से आप अपनी फसल को बर्बाद होने से बचा सकते हैं। हमेशा याद रखें, मौसम के अनुसार सही समय पर सही निर्णय लेना ही एक जागरूक और सफल किसान की असली पहचान है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. भारी बारिश में खेत में खाद या यूरिया क्यों नहीं डालना चाहिए?
भारी बारिश में खाद या यूरिया डालने से वह मिट्टी में घुलने के बजाय पानी के साथ बहकर खेत से बाहर निकल जाता है। इससे पौधों को कोई फायदा नहीं मिलता और किसान का सीधा आर्थिक नुकसान होता है।
Q2. जलभराव से फसलों को तुरंत कैसे बचाएं?
जलभराव से बचाने के लिए खेतों में पानी निकलने (Drainage) की मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए। खेत के निचले हिस्सों को खोल दें और गहरी नालियां बनाकर अतिरिक्त पानी को पंप या प्राकृतिक ढलान के जरिए बाहर निकालें।
Q3. क्या बारिश रुकने के तुरंत बाद कीटनाशक का स्प्रे कर सकते हैं?
नहीं, बारिश रुकने के तुरंत बाद स्प्रे बिल्कुल न करें। जब तक पौधों की पत्तियां पूरी तरह सूख न जाएं और धूप न निकल आए, तब तक कीटनाशक का इस्तेमाल करने से बचें, अन्यथा दवा का असर नहीं होगा।
Q4. बारिश के मौसम में खेत में जाते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
बारिश में खेत की मेड़ों, बिलों और झाड़ियों में पानी भरने के कारण सांप और बिच्छू बाहर आ जाते हैं। इसलिए खेत में जाते समय हमेशा घुटनों तक आने वाले रबर बूट्स (जूते) पहनें और सुरक्षा के लिए हाथ में एक डंडा जरूर रखें।

