क्या आपकी मूंग की फसल में बार-बार पीला मोज़ेक वायरस (Yellow Mosaic Virus) लग जाता है? या फिर सही समय पर सिंचाई करने के बाद भी आपको वह मनचाहा उत्पादन नहीं मिल पा रहा है, जिसकी उम्मीद आपने बीज खरीदते समय की थी?
यह परेशानी सिर्फ आपकी नहीं है। भारत के लाखों किसान भाई हर साल घटिया या पुरानी किस्म के बीजों के कारण अपनी लागत तक नहीं निकाल पाते। अगर आप साल 2026 में खेती से अपनी कमाई को दोगुना करना चाहते हैं, तो आपको पारंपरिक बीजों को छोड़कर उन्नत तकनीकों को अपनाना होगा।
अगर आप यह सोच रहे हैं कि इस सीजन में कम पानी में होने वाली खरीफ फसलें कौन सी हैं जो आपको तगड़ा मुनाफा दे सकती हैं, तो मूंग से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। आज के इस प्रैक्टिकल गाइड में हम मूंग की टॉप 10 किस्में 2026 के बारे में विस्तार से बात करेंगे। ये ऐसी किस्में हैं जो न सिर्फ कम समय और कम पानी में पककर तैयार होती हैं, बल्कि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी सबसे कमाल की है।
मूंग की खेती में सही किस्म का चुनाव क्यों जरूरी है?
गलत बीज का चुनाव आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है। जब हम मूंग जैसी कम दिनों वाली दलहनी फसल की बात करते हैं, तो समय प्रबंधन सबसे बड़ा फैक्टर बन जाता है। यदि आप जून में बोई जाने वाली खरीफ फसलें तलाश रहे हैं, तो मूंग की सही वैरायटी चुनना सबसे महत्वपूर्ण है ताकि फसल पकने में ज्यादा समय न ले और आपकी अगली मुख्य फसल (जैसे धान) लेट न हो।
सही वैरायटी चुनने से आपका कीटनाशकों पर होने वाला खर्च लगभग आधा हो जाता है। आज के समय में मौसम का कोई भरोसा नहीं रहता। ऐसे में मजबूत और नई जेनरेशन के बीज ही इस मौसमी बदलाव को झेल सकते हैं। बाजार में मिलने वाले कई पुराने बीज अब बीमारियों के प्रति संवेदनशील हो चुके हैं। इसलिए, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थानों (ICAR) ने पिछले कुछ सालों में कई बेहतरीन रिसर्च की हैं।
मूंग की टॉप 10 किस्में 2026: पूरी लिस्ट और उनकी विशेषताएं
आइए अब एक-एक करके देश की उन बेहतरीन 10 मूंग की किस्मों के बारे में जानते हैं, जो इस साल आपके खेतों में हरियाली और जेब में खुशहाली लाने वाली हैं।
1. IPM 02-14 (विराट मूंग)
यह वैरायटी इस समय भारतीय किसानों की पहली पसंद बनी हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण इसका बहुत ही कम समय में पककर तैयार होना है।
- पकने की अवधि: यह मात्र 52 से 55 दिनों में पूरी तरह कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
- पैदावार: इससे आपको प्रति एकड़ लगभग 5 से 6 क्विंटल तक की उपज आसानी से मिल जाती…
- खासियत: यह किस्म पीला मोज़ेक वायरस के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी है। इसके पौधे छोटे होते हैं, जिससे इसकी कटाई करना बहुत आसान होता है।
2. MH 421
अगर आप गर्मी के मौसम (जायद) में मूंग लगाने की सोच रहे हैं, तो यह किस्म आपके लिए एक वरदान साबित हो सकती है।
- पकने की अवधि: यह फसल 60 से 65 दिनों के भीतर पकती है।
- पैदावार: सही देखरेख मिलने पर यह 6 से 7 क्विंटल प्रति एकड़ तक का उत्पादन दे सकती है।
- खासियत: इसके दाने मध्यम आकार के और चमकीले होते हैं। इसकी सारी फलियां एक साथ पकती हैं, जिससे लेबर का खर्च बचता है।
3. शिखा (IPM 410-3)
यह उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों के लिए एक बेहद भरोसेमंद नाम बन चुका है।
- पकने की अवधि: इसे तैयार होने में 60 से 62 दिन का समय लगता है।
- पैदावार: यह औसतन 5 से 5.5 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार देती है।
- खासियत: इसकी फलियां नीचे से ऊपर तक पूरी तरह भरी होती हैं। इसमें फली चटकने (Pod Shattering) की समस्या बिल्कुल नहीं देखी जाती।
💡 क्विक टिप: मूंग की बोआई हमेशा कतारों (Lines) में करें। कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखने से पौधों का विकास सबसे अच्छा होता है।
4. SML 668
यह वैरायटी खास तौर पर उन क्षेत्रों के लिए विकसित की गई है जहां पानी की थोड़ी कमी रहती है।
- पकने की अवधि: यह मात्र 60 दिनों में पक जाती है।
- पैदावार: प्रति एकड़ 5 क्विंटल तक उत्पादन देने में सक्षम है।
- खासियत: इसके दाने काफी मोटे और आकर्षक होते हैं। मोटे दानों के कारण दाल मिल वाले इसे हाथों-हाथ अच्छे दामों पर खरीद लेते हैं।
5. IPM 2-3 (पंत मूंग 5)
पंतनगर यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार की गई यह वैरायटी सालों से किसानों का भरोसा जीते हुए है।
- पकने की अवधि: यह फसल 65 से 70 दिन का समय लेती है।
- पैदावार: इसकी अधिकतम पैदावार 6 क्विंटल प्रति एकड़ तक दर्ज की गई है।
- खासियत: यह खरीफ (बरसात) और जायद (गर्मी) दोनों ही मौसमों के लिए बहुत अनुकूल मानी जाती है।
6. HUM 16 (मालवीय जागृति)
बीएचयू (BHU) द्वारा विकसित यह किस्म पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है।
- पकने की अवधि: यह लगभग 60 से 65 दिनों में तैयार होती है।
- पैदावार: इससे किसान भाई 5.5 से 6.5 क्विंटल प्रति एकड़ तक की उपज ले रहे हैं।
- खासियत: इसके पौधे थोड़े फैलावदार होते हैं, जो जमीन को अच्छी तरह ढक लेते हैं जिससे खेतों में नमी लंबे समय तक बनी रहती है।
7. GAM 5 (गुजरात आनंद मूंग 5)
पश्चिमी भारत और सूखे इलाकों के लिए यह एक बेहद सहनशील और टिकाऊ वैरायटी है।
- पकने की अवधि: यह 62 से 65 दिनों में पककर तैयार होती है।
- पैदावार: यह 5 से 6 क्विंटल प्रति एकड़ का स्थिर उत्पादन देती है।
- खासियत: यह अत्यधिक गर्मी और तेज धूप को आसानी से सहन कर सकती है।
8. Pusa Vishal
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा बनाई गई यह एक ऐतिहासिक किस्म है।
- पकने की अवधि: यह फसल 60 से 65 दिन में कटाई के योग्य हो जाती है।
- पैदावार: इसकी औसत पैदावार 5.5 क्विंटल प्रति एकड़ है।
- खासियत: जैसा कि नाम से ही साफ है, इसके दाने आकार में काफी बड़े होते हैं। इसकी फलियां लंबी होती हैं और एक-एक फली में 12 से 14 दाने तक पाए जाते हैं।
9. PDM 139 (सम्राट)
कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाने के लिए सम्राट किस्म का कोई मुकाबला नहीं है।
- पकने की अवधि: यह बहुत तेजी से यानी 55 से 60 दिनों में पकती है।
- पैदावार: यह प्रति एकड़ 5 क्विंटल तक आसानी से दे देती है।
- खासियत: इसका इस्तेमाल अक्सर गेहूं की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में हरी खाद (Green Manure) के रूप में और अतिरिक्त कमाई के लिए किया जाता है।
10. सुजाता (IPM 02-3)
यदि आप लेट बोआई कर रहे हैं, तो सुजाता आपके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है।
- पकने की अवधि: यह 62 से 66 दिनों में पकती है।
- पैदावार: इसका औसतन उत्पादन 5.5 क्विंटल प्रति एकड़ के आसपास रहता है।
- खासियत: यह किस्म रस चूसने वाले कीटों के हमले को काफी हद तक झेल लेती है।
मूंग की मुख्य किस्मों का तुलनात्मक अध्ययन (Comparison Table)
| किस्म का नाम | पकने का समय (दिन) | औसत पैदावार (प्रति एकड़) | सबसे मुख्य विशेषता |
| IPM 02-14 (विराट) | 52 – 55 | 5 – 6 क्विंटल | सबसे कम समय में बंपर पैदावार |
| MH 421 | 60 – 65 | 6 – 7 क्विंटल | फलियां एक साथ पकती हैं |
| शिखा | 60 – 62 | 5 – 5.5 क्विंटल | फली चटकने की कोई समस्या नहीं |
| SML 668 | 60 | 5 क्विंटल | दाल मिलों के लिए सर्वोत्तम मोटे दाने |
| IPM 2-3 | 65 – 70 | 6 क्विंटल | दोनों मौसमों (जायद व खरीफ) के लिए फिट |
| HUM 16 | 60 – 65 | 5.5 – 6.5 क्विंटल | खरपतवारों को बढ़ने से रोके |
| GAM 5 | 62 – 65 | 5 – 6 क्विंटल | अत्यधिक सूखा और गर्मी सहनशील |
| Pusa Vishal | 60 – 65 | 5.5 क्विंटल | सबसे बड़े और चमकीले दाने |
| PDM 139 (सम्राट) | 55 – 60 | 5 क्विंटल | हरी खाद और अतिरिक्त आय के लिए बेस्ट |
| सुजाता | 62 – 66 | 5.5 क्विंटल | कीटों और बीमारियों से लड़ने में मजबूत |
पैदावार बढ़ाने के लिए कुछ बेहद जरूरी और व्यावहारिक बातें
सिर्फ एक अच्छा बीज खरीद लेने से ही आपको अधिकतम पैदावार नहीं मिलेगी। उसके साथ कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
बीज उपचार (Seed Treatment) सबसे जरूरी है
बोआई करने से पहले बीजों का उपचार करना फसल का बीमा करने जैसा है। आप इसके लिए बीज अंकुरण परीक्षण कैसे करें की पूरी विधि सीख सकते हैं ताकि यह पता चल सके कि आपका बीज उगने लायक है या नहीं। इसके बाद फंगस से सुरक्षा के लिए बीज उपचार करें। अगर आप मक्के की भी खेती साथ में कर रहे हैं, तो सोयाबीन और मक्का बीज उपचार का सही तरीका जानकर अपनी दोनों फसलों को सुरक्षित कर सकते हैं।
खाद और उर्वरक का सही गणित
मूंग एक दलहनी फसल है, इसलिए इसे बहुत ज्यादा यूरिया की जरूरत नहीं होती। बोआई के समय सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) का इस्तेमाल करें। खेती में बेहतर नतीजों के लिए कई किसान आज नई तकनीक की तरफ बढ़ रहे हैं; आप भी नैनो यूरिया बनाम पारंपरिक यूरिया के फायदे समझकर अपनी फसल में इसका सही इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके साथ ही मिट्टी की सेहत जानने के लिए मिट्टी का pH लेवल कैसे मेंटेन करें इस बारे में भी जानकारी जरूर रखें।
सिंचाई का सही समय
मूंग को बहुत ज्यादा पानी नहीं चाहिए होता, लेकिन जब फसल में फूल आ रहे हों और फलियां बन रही हों, उस समय खेत में सूखा नहीं पड़ना चाहिए। इस दौरान पानी की कमी से फूल झड़ सकते हैं।
मूंग की खेती में होने वाली आम गलतियां और उनके उपाय
- गलती 1: पुरानी किस्मों का बार-बार इस्तेमाल करना।
- उपाय: हर दो से तीन साल में अपना बीज बदलें। यदि आप इस सीजन में मक्के जैसी फसल की भी प्लानिंग कर रहे हैं, तो मक्का की हाइब्रिड किस्में 2026 की तरह मूंग के भी हमेशा नए और प्रमाणित सरकारी बीज ही खरीदें।
- गलती 2: खरपतवार नियंत्रण में देरी करना।
- उपाय: मूंग की फसल में पहले 30 दिन बहुत नाजुक होते हैं। बोआई के तुरंत बाद पेंडिमेथालिन का छिड़काव करें या फिर 20 दिन बाद एक बार निराई-गुड़ाई जरूर करें।
- गलती 3: कीटों और वायरस के शुरुआती लक्षणों को पहचान न पाना।
- उपाय: जैसे ही खेत में सफेद मक्खी दिखाई दे, तुरंत कदम उठाएं। फसलों में वायरस का हमला रोकने के लिए आप पीला मोज़ेक वायरस नियंत्रण के टॉप केमिकल्स वाले गाइड की मदद ले सकते हैं ताकि बीमारी को पूरे खेत में फैलने से रोका जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. मूंग की बोआई के लिए प्रति एकड़ कितने बीज की जरूरत होती है?
जायद (गर्मी) के मौसम में प्रति एकड़ लगभग 10 से 12 किलोग्राम बीज लगता है, जबकि खरीफ (बरसात) के मौसम में 8 से 10 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज पर्याप्त होता है।
Q2. विराट मूंग (IPM 02-14) की खेती किस मौसम में सबसे अच्छी होती है?
विराट मूंग की खेती मुख्य रूप से जायद (गर्मी) के मौसम में सबसे शानदार परिणाम देती है क्योंकि यह मात्र 52-55 दिनों में पककर खेत खाली कर देती है।
Q3. मूंग की फसल को पीला मोज़ेक वायरस से कैसे बचाएं?
इसके लिए हमेशा रोग-प्रतिरोधी किस्में (जैसे MH 421 या विराट) चुनें और वायरस फैलाने वाली सफेद मक्खी को रोकने के लिए शुरुआती दिनों में ही कीटनाशक का छिड़काव करें।
Q4. क्या हम गेहूं काटने के तुरंत बाद मूंग लगा सकते हैं?
हां, गेहूं की कटाई के बाद मार्च-अप्रैल का समय मूंग की बोआई के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती है।
मुनाफा कमाने का सही समय
साल 2026 में खेती को घाटे से मुनाफे में बदलने का सीधा रास्ता यही है कि हम पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलें। मूंग की इन टॉप 10 किस्मों में से आप अपने क्षेत्र की मिट्टी और पानी की उपलब्धता के आधार पर किसी भी एक बेहतरीन वैरायटी को चुन सकते हैं। आधुनिक खेती को आसान और तेज बनाने के लिए आप आधुनिक कृषि यंत्र जैसे ऑटोमैटिक सीड ड्रिल मशीन गाइड की मदद भी ले सकते हैं, जिससे बीज और खाद की सही मात्रा सही गहराई पर गिरती है।
अब देर किस बात की? इस सीजन के लिए अपने नजदीकी सरकारी बीज केंद्र या प्रमाणित विक्रेता से संपर्क करें और आज ही अपनी पसंदीदा वैरायटी के एडवांस बुकिंग की योजना बनाएं। अगर आपके मन में इस खेती से जुड़ा कोई और सवाल है, तो नीचे कमेंट करके हमसे जरूर पूछें!












