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NRC 138 Soyabean Variety: कम दिनों में सबसे रिकॉर्ड तोड़ पैदावार देने वाली नई सोयाबीन किस्म की पूरी सच्चाई

क्या आप भी हर साल खरीफ सीजन में सोयाबीन की घटती पैदावार और मौसम की मार से परेशान हो चुके हैं? क्या आपकी फसल भी ऐन वक्त पर ज्यादा बारिश या सूखे के कारण मंडी पहुंचने से पहले ही खेतों में दम तोड़ देती है?

एक किसान होने के नाते मैं आपकी इस चिंता को बहुत अच्छी तरह समझ सकता हूँ। आज के समय में ट्रेडिशनल बीजों के भरोसे खेती करना सीधे-सीधे नुकसान को बुलावा देना है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (IISR), इंदौर ने एक नया और बेहद ताकतवर हथियार तैयार किया है, जिसका नाम है NRC 138

अगर आप इस साल अपने खेतों से बिना किसी रिस्क के सबसे भारी मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो यह NRC 138 Soyabean Variety आपके लिए सबसे सटीक विकल्प बनने वाली है। इस स्पेशल ब्लॉग में हम इस नई वैरायटी के बारे में पूरी गहराई से बात करेंगे, ताकि बुआई से पहले आपके मन में कोई भी डाउट न रहे।

NRC 138 सोयाबीन वैरायटी क्या है? (एक ईमानदार परिचय)

सीधे शब्दों में कहें तो NRC 138 भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई सोयाबीन की एक बहुत ही एडवांस और कम समय वाली वैरायटी है। इस वैरायटी को बनाने का मुख्य मकसद उन किसानों की मदद करना था, जिनके पास सिंचाई के सीमित साधन हैं या जो अपनी फसल को बेमौसम बारिश के जुए से बचाना चाहते हैं।

यह किस्म मध्यम ऊंचाई की होती है और इसके पौधे का तना बहुत मजबूत होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि तेज हवाओं और पानी के थपेड़ों के बीच भी इसके पौधे खेतों में सीना तानकर खड़े रहते हैं, नीचे नहीं गिरते।

इसके दानों का रंग हल्का पीला और चमकदार होता है। दानों का बोल्ड साइज और मजबूत टेक्सचर होने के कारण व्यापारियों को यह पहली नजर में पसंद आ जाती है, जिससे मंडियों में आपको इसके हमेशा टॉप रेट मिलते हैं।

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NRC 138 सोयाबीन की सबसे खास विशेषताएं

जब भी कोई नई वैरायटी मार्केट में आती है, तो किसान के मन में पहला सवाल यही होता है कि “मैं पुरानी छोड़कर इसे क्यों लगाऊं?”। आइए जानते हैं इस किस्म की उन खूबियों के बारे में जो इसे दूसरी वैरायटियों से मीलों आगे रखती हैं।

1. बहुत कम समय में पक्का मुनाफा (Maturity Period)

यह वैरायटी मात्र 90 से 93 दिनों के भीतर पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है। कम दिनों में आने के कारण आपके खेत सितंबर के आखिरी हफ्ते तक बिल्कुल खाली हो जाते हैं। इसका मतलब है कि आप बिना किसी देरी के रबी सीजन की अगेती फसलों जैसे आलू, मटर या लहसुन की बुआई कर सकते हैं।

2. पानी के उतार-चढ़ाव को सहने की ताकत

मानसून के पैटर्न में अब बड़ा बदलाव आ चुका है। कभी-कभी बुआई के बाद लंबा सूखा पड़ जाता है, तो कभी कटाई के वक्त लगातार बारिश होती है। यह वैरायटी दोनों ही झटकों को आराम से झेल लेती है। कम पानी में भी इसके दानों का आकार छोटा नहीं पड़ता और ज्यादा पानी में इसकी जड़ें सड़ती नहीं हैं।

3. तना मक्खी (Stem Fly) और गर्डल बीटल से सुरक्षा

पुरानी सोयाबीन किस्मों में तना मक्खी और गर्डल बीटल का हमला पूरी फसल को अंदर ही अंदर खोखला कर देता था। इस किस्म की अपनी एक खास जेनेटिक कोडिंग है, जिसकी वजह से ये जिद्दी कीड़े इसके तने को आसानी से नुकसान नहीं पहुंचा पाते। इससे आपका कीटनाशकों का बड़ा खर्च बच जाता है।

4. पीला मोजेक वायरस (YMV) के खिलाफ फुल रेजिस्टेंस

पीला मोजेक रोग एक बार खेत में आ जाए, तो पूरी फसल को पीला करके बर्बाद कर देता है। NRC 138 में इस खतरनाक वायरस के प्रति बहुत ऊंची रोग प्रतिरोधक क्षमता देखी गई है। इसके पत्तों की बनावट और पौधे की इम्युनिटी वायरस को फैलने का मौका नहीं देती।

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NRC 138 बनाम अन्य लोकप्रिय वैरायटियां: एक खुला मुकाबला

सही निर्णय लेने के लिए तुलना करना बहुत जरूरी है। नीचे दी गई तालिका से आप साफ-साफ समझ जाएंगे कि बाजार की अन्य टॉप किस्मों के मुकाबले यह कहाँ खड़ी होती है।

खूबियां और मानकNRC 138NRC 136JS 20-34
पकने की अवधि (दिन)90 – 93 दिन90 – 95 दिन88 – 92 दिन
औसत पैदावार (क्विंटल/एकड़)11 – 13 क्विंटल10 – 13 क्विंटल8 – 10 क्विंटल
पीला मोजेक से सुरक्षाबहुत अधिकअत्यधिकमध्यम
फली चटकने का खतराबिल्कुल नहींकमसामान्य
दानों का आकार (Boldness)मध्यम से बड़ामध्यमछोटा
प्रति एकड़ बीज की मात्रा38 – 40 किलो38 – 42 किलो40 – 45 किलो

इस डेटा से साफ है कि यह वैरायटी कम दिनों की रेस में सबसे आगे होने के साथ-साथ दानों की क्वालिटी और पैदावार के मामले में भी बाजी मार लेती है।

प्रति एकड़ पैदावार और शुद्ध मुनाफे का पूरा गणित

किसान भाइयों, पैदावार पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आपने खेत का मैनेजमेंट कैसा रखा है। अगर आप सही खाद और सही दवाओं का शेड्यूल फॉलो करते हैं, तो NRC 138 से आसानी से 11 से 13 क्विंटल प्रति एकड़ की शानदार उपज मिल सकती है। कुछ उन्नत किसानों ने तो बेहतरीन देखरेख से 14.5 क्विंटल प्रति एकड़ तक का रिकॉर्ड भी बनाया है।

चलिए मुनाफे का हिसाब जोड़ते हैं

मान लेते हैं कि आपके खेत में न्यूनतम 11 क्विंटल प्रति एकड़ की एवरेज पैदावार हुई:

  • कुल पैदावार: 11 क्विंटल
  • बाजार का भाव (औसत): ₹4,900 प्रति क्विंटल
  • कुल कमाई: 11 × 4,900 = ₹53,900
  • खेती की कुल लागत (बीज, जुताई, खाद, स्प्रे): ₹14,500
  • आपका शुद्ध मुनाफा: 53,900 – 14,500 = ₹39,400 प्रति एकड़

सोचिए, मात्र 90 दिनों की मेहनत में एक एकड़ से लगभग 40 हजार रुपये की शुद्ध बचत होना एक बेहतरीन बिजनेस डील है।

बुआई का सही और वैज्ञानिक तरीका (Step-by-Step Guide)

सिर्फ महंगा बीज खरीद लेने से बंपर पैदावार की गारंटी नहीं मिलती। असली जादू तब होता है जब आप बुआई के समय इन वैज्ञानिक स्टेप्स का पालन करते हैं।

स्टेप 1: खेत की सही तैयारी

सोयाबीन के खेत में सबसे जरूरी चीज है सही जल निकासी (Water Drainage)। खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए। कल्टीवेटर से दो बार गहरी जुताई करने के बाद पाटा लगाकर खेत को समतल कर लें। अगर आपके इलाके में भारी बारिश होती है, तो रिज एंड फरो (Med Method) या BBF विधि से बेड बनाकर ही बुआई करें।

स्टेप 2: सही बीज दर का चयन

इस वैरायटी के लिए प्रति एकड़ 38 से 40 किलोग्राम प्रमाणित बीज की जरूरत होती है। बहुत ज्यादा घना बोने की गलती कभी न करें। अगर पौधे बहुत पास-पास उगेंगे, तो उन्हें हवा और धूप नहीं मिलेगी, जिससे पौधों की लंबाई तो बढ़ेगी लेकिन उनमें फलियां नहीं लगेंगी।

स्टेप 3: बीज उपचार (Seed Treatment) – सबसे जरूरी काम

बीज को बिना उपचारित किए सीधे खेत में डालना अपनी फसल को खुद बीमार करने जैसा है। बुआई के ठीक पहले यह तरीका अपनाएं:

  • फंगस से बचाव: सबसे पहले पेनफ्लूफेन + ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन (Evergol Prime) या कार्बेन्डाजिम + मैंकोजेब (3 ग्राम प्रति किलो बीज) से बीज को अच्छे से मिलाएं।
  • कीटों से सुरक्षा: इसके बाद तना छेदक कीड़ों से बचाने के लिए थियामेथोक्सम 30% FS से बीज को ट्रीट करें।
  • बायो-बूस्टर: सबसे अंत में राइजोबियम और पीएसबी (PSB) कल्चर की कोटिंग करें और आधे घंटे के लिए छांव में सुखाएं।

स्टेप 4: दूरी और गहराई की सेटिंग

सीड ड्रिल से बुआई करते समय कतार से कतार की दूरी 14 से 16 इंच रखें। बीज को मिट्टी के अंदर 3 से 4 सेमी से ज्यादा गहरा न गिराएं, वरना कमजोर अंकुरण के कारण पौधे जमीन से बाहर नहीं निकल पाएंगे।

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खाद और उर्वरक का परफेक्ट शेड्यूल (Nutrient Management)

सोयाबीन एक ऐसी फसल है जो अपनी जड़ों की ग्रंथियों के जरिए हवा से खुद नाइट्रोजन बना लेती है। इसलिए इसे बाहर से बहुत ज्यादा यूरिया देने की जरूरत नहीं होती। इसे सबसे ज्यादा जरूरत फास्फोरस, पोटाश और सल्फर की होती है।

बुआई के समय प्रति एकड़ इस कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करें:

  • सिंगल सुपर फास्फेट (SSP): 3 बैग (150 किलोग्राम) – इसमें सल्फर और कैल्शियम भी मिल जाता है।
  • म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP): 20 किलोग्राम – दानों के वजन और चमक को बढ़ाने के लिए।
  • यूरिया: 15 किलोग्राम – शुरुआती दिनों में पौधे को सहारा देने के लिए।

एक जरूरी सलाह: अगर आप एसएसपी की जगह डीएपी (DAP) डाल रहे हैं, तो याद से 10 किलो प्रति एकड़ बेंटोनाइट सल्फर अलग से जरूर डालें। सल्फर के बिना सोयाबीन में तेल की मात्रा नहीं बढ़ती और दाने बेजान दिखते हैं।

खरपतवार और कीट नियंत्रण के अचूक उपाय

शुरुआती 30 दिनों तक अगर आपने खेत को साफ रख लिया, तो आपकी आधी जंग वहीं खत्म हो जाती है। कचरा फसल का सारा भोजन चुरा लेता है।

खरपतवार का आसान समाधान

  • बुआई के तुरंत बाद (Pre-emergence): बुआई खत्म होने के 48 घंटे के भीतर डाइक्लोसुलम 84% WDG या पेंडिमेथालिन का स्प्रे पूरे खेत में करें। यह चौड़ी और संकरी पत्ती वाले कचरों को जमीन से ऊपर आने ही नहीं देता।
  • खड़ी फसल में (Post-emergence): अगर बुआई के समय दवा नहीं डाल पाए और फसल 20 दिन की हो गई है, तो इमाज़ेथापायर 10% SL (400 एमएल/एकड़) या क्विज़ालोफ़ॉप-इथाइल का छिड़काव करें।

कीट और रोगों का परमानेंट इलाज

यूं तो इस वैरायटी में बीमारियां बहुत कम आती हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर:

  1. पत्ती खाने वाली इल्लियां: अगर खेत में हरी इल्ली या तंबाकू की इल्ली दिखे, तो तुरंत एमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (80 ग्राम/एकड़) या कोराजन (60 एमएल/एकड़) का स्प्रे करें।
  2. फूल आने की स्टेज पर: जब फसल में 10 से 15% फूल आ जाएं, तब एक अच्छा अमीनो एसिड टॉनिक और फंगीसाइड मिलाकर स्प्रे करें। इससे फूल झड़ने बंद हो जाएंगे और फलियों की संख्या दोगुनी हो जाएगी।

इस वैरायटी की खेती में होने वाली 3 आम गलतियां जिनसे आपको बचना है

कई बार अनजाने में किसान भाई कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जो बंपर पैदावार को भी घाटे में बदल देती हैं। इन बातों का खास ध्यान रखें:

  • खड़ी फसल में यूरिया का छिड़काव: कुछ किसान फसल को ज्यादा काला और चमकदार बनाने के चक्कर में 40 दिन की फसल पर यूरिया डाल देते हैं। इससे पौधा केवल बढ़ता चला जाता है और उसमें फलियां लगना बंद हो जाती हैं।
  • दवाइयों का गलत मिक्सचर: कभी भी खरपतवार नाशक दवा के साथ कीटनाशक या टॉनिक मिलाकर स्प्रे न करें। इससे फसल को तगड़ा झटका लगता है और पत्तियां जल जाती हैं। हर स्प्रे के बीच कम से कम 4-5 दिनों का गैप रखें।
  • फली भरते समय पानी की कमी: अगर सितंबर के महीने में फली के अंदर दाना बनते समय सूखा पड़ जाता है, तो स्प्रिंकलर के जरिए खेत में एक हल्की सिंचाई जरूर दें। इस समय पानी की कमी से दाना पिचक जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. NRC 138 सोयाबीन वैरायटी को पकने में कितना समय लगता है?

यह वैरायटी मात्र 90 से 93 दिनों के भीतर पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है, जिससे रबी सीजन की अगेती फसलों के लिए पूरा समय मिलता है।

Q2. इस नई वैरायटी से प्रति एकड़ कितनी पैदावार मिल सकती है?

उचित खाद-पानी और अच्छे कृषि प्रबंधन के साथ इस वैरायटी से बड़े आराम से 11 से 13 क्विंटल प्रति एकड़ तक का शानदार उत्पादन लिया जा सकती है।

Q3. क्या NRC 138 वैरायटी में पीला मोजेक वायरस का खतरा होता है?

नहीं, इस वैरायटी को जेनेटिक स्तर पर पीला मोजेक वायरस (Yellow Mosaic Virus) और चारकोल रॉट जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी बनाया गया है।

Q4. इसकी बुआई के लिए एक एकड़ में कितना बीज डालना चाहिए?

इस वैरायटी के बेहतर अंकुरण और सही पौधों की संख्या के लिए प्रति एकड़ लगभग 38 से 40 किलोग्राम साफ और उपचारित बीज की आवश्यकता होती है।

Q5. क्या इस किस्म की कटाई हार्वेस्टर मशीन से करना सुरक्षित है?

हाँ, इसका तना बहुत मजबूत और सीधा होता है और इसकी फलियां जमीन से पर्याप्त ऊंचाई पर लगती हैं, इसलिए कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई करने पर दानों का बिल्कुल नुकसान नहीं होता।

सही बीज का चुनाव ही है आपकी तरक्की की चाबी

खेती में समझदारी इसी में है कि हम बदलते मौसम के हिसाब से खुद को बदलें। आज के अनिश्चित माहौल में NRC 138 Soyabean Variety किसानों के लिए एक ऐसी ढाल साबित हो रही है जो न केवल आपकी लागत को कम करती है बल्कि कम समय में आपको सबसे सुरक्षित और अधिकतम मुनाफा कमाकर देती है।

अगर आप भी इस खरीफ सीजन में अपनी पुरानी वैरायटियों के कम उत्पादन से तंग आ चुके हैं, तो बिना देर किए अपने नजदीकी सरकारी बीज डिपो, कृषि विज्ञान केंद्र या रजिस्टर्ड डीलर्स से संपर्क करें और इस उन्नत किस्म का प्रामाणिक बीज लाकर अपने खेतों की तकदीर बदलें।

क्या आप इस बार अपने खेत में इस वैरायटी को आजमाने वाले हैं? या खेती से जुड़ा कोई और सवाल आपके मन में है? नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर हमसे जरूर पूछें। इस काम की जानकारी को अपने व्हाट्सएप ग्रुप्स में बाकी किसान भाइयों के साथ भी जरूर शेयर करें ताकि सब मिलकर आगे बढ़ सकें।

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