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कम दिन में पकने वाली सोयाबीन की टॉप किस्में: 90 दिनों में बम्पर पैदावार और तगड़ा मुनाफा

किसान भाइयों, खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि इस बार सोयाबीन की कौन सी वैरायटी बोई जाए? अक्सर देखा गया है कि जो किस्में पकने में 110 से 120 दिन का लंबा समय लेती हैं, वे सितंबर-अक्टूबर के आखिर में आने वाली अचानक सूखे की मार या फिर आखिरी समय की भारी बारिश के कारण खेतों में ही खराब हो जाती हैं। जलभराव या नमी की कमी से फलियां चटकने लगती हैं और दानों का आकार छोटा रह जाता है, जिससे सीधे आपकी जेब पर मार पड़ती है।

आपकी इसी समस्या का पक्का समाधान है—कम दिन में पकने वाली सोयाबीन की उन्नत और हाइब्रिड (रिसर्च/सर्टिफाइड) किस्में। ये वैरायटीज मात्र 85 से 95 दिनों के भीतर कटकर तैयार हो जाती हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि फसल सितंबर के महीने में ही खेत खाली कर देती है, जिससे आप आलू, मटर, अगेती सरसों या समय पर गेहूं की बुवाई करके साल में तीन फसलें आसानी से ले सकते हैं। इस विस्तृत गाइड में हम मेरे अपने अनुभव, कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और जमीनी हकीकत के आधार पर कम दिनों वाली टॉप सोयाबीन वैरायटीज का पूरा लेखा-जोखा देखेंगे ताकि इस सीजन में आपकी उपज और कमाई दोनों रिकॉर्ड तोड़ रहे।

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सोयाबीन की खेती के लिए बुनियादी जरूरतें (Basic Framework)

कम दिनों में पकने वाली वैरायटी से अधिकतम उत्पादन लेने के लिए केवल अच्छा बीज काफी नहीं है, बल्कि सही कृषि प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है।

1. मिट्टी और जलवायु

सोयाबीन के लिए अच्छी जल निकासी वाली काली भारी मिट्टी या मध्यम दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। जिन खेतों में पानी ठहरता है, वहां जलभराव के कारण जड़ सड़न की समस्या आ सकती है। जलवायु की बात करें तो खरीफ सीजन का सामान्य तापमान (26°C से 32°C) इसके वानस्पतिक विकास के लिए उत्तम है।

2. खेत की तैयारी और बुवाई का सही समय

गर्मी के दिनों में खेत की एक बार गहरी जुताई जरूर करें। इसके बाद मॉनसून की पहली अच्छी बारिश (लगभग 3 से 4 इंच पानी गिरने के बाद) होने पर कल्टीवेटर और रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरा कर लें।

  • सही समय: 15 जून से 10 जुलाई के बीच बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए। देर से बुवाई करने पर उत्पादन में गिरावट आती है।
  • बुवाई का तरीका: कम दिनों वाली किस्मों के लिए बेड कल्टीवेटर या कूड-मेड़ (Ridge and Furrow) विधि अपनाएं। इससे भारी बारिश में पानी नालियों से निकल जाता है और सूखा पड़ने पर नमी लंबे समय तक बरकरार रहती है।

3. बीज की मात्रा और बीज उपचार (Mandatory Process)

प्रति एकड़ 30 से 35 किलोग्राम प्रामाणिक बीज की आवश्यकता होती है। बोने से पहले बीज उपचार करना कभी न भूलें, यह फसल की आधी बीमारियों को शुरुआत में ही खत्म कर देता है।

  • फफूंदनाशक: सबसे पहले बीज को कार्बोक्सिन 37.5% + थिरम 37.5% (विटावैक्स पावर) @ 2 ग्राम प्रति किलो बीज या पैनफ्लुफेन + ट्राइफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन (एवरगोल प्राइम) @ 1 मिली प्रति किलो बीज से उपचारित करें। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए आप सोयाबीन बीज उपचार बेस्ट फंगिसाइड गाइड पढ़ सकते हैं।
  • कल्चर: फफूंदनाशक उपचार के 2-3 घंटे बाद बीज में राइजोबियम कल्चर और पीएसबी (PSB) कल्चर @ 5 ग्राम प्रति किलो के हिसाब से मिलाएं ताकि जड़ों में गांठों का विकास अच्छा हो।

कम दिन में पकने वाली सोयाबीन की टॉप 5 उन्नत किस्में (Top Varieties)

यहाँ हम उन चुनिंदा किस्मों की बात कर रहे हैं जिन्होंने पिछले कुछ सालों में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के खेतों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

                       सोयाबीन की प्रमुख कम दिनों वाली किस्में
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    JS 20-34   JS 95-60   NRC 138    KDS 992 (Phule)   JS 21-72 (New)

1. JS 20-34 (जवाहर सोयाबीन 20-34)

यह मध्य भारत के किसानों की सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय किस्मों में से एक है।

  • अवधि: यह वैरायटी मात्र 85 से 88 दिनों में पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
  • विशेषताएं: इसके पौधे मध्यम ऊंचाई के होते हैं। इसके फूल सफेद रंग के और पत्तियां चौड़ी होती हैं। यह किस्म कम बारिश या सूखे की स्थिति को आसानी से सहन कर लेती है। इसमें गर्डल बीटल और सेमीलूपर कीटों के प्रति मध्यम प्रतिरोधक क्षमता होती है।
  • पैदावार: अनुकूल परिस्थितियों में इसकी औसत पैदावार 8 से 10 क्विंटल प्रति एकड़ तक आराम से मिल जाती है। इसकी पूरी विशेषताएँ जानने के लिए JS 2034 सोयाबीन वैरायटी गाइड देखें।

2. JS 95-60

यह सबसे कम समय में पकने वाली पारंपरिक और क्रांतिकारी वैरायटी है।

  • अवधि: यह मात्र 80 से 85 दिनों में पक जाती है।
  • विशेषताएं: इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका बेहद कम समय लेना है। हालांकि, अब इस किस्म में पीला मोजेक वायरस (YMV) का प्रकोप कुछ क्षेत्रों में देखा जाने लगा है, इसलिए इसका बीज केवल वहीं बोएं जहाँ इस बीमारी का इतिहास न हो। पकने के बाद इसकी कटाई तुरंत करनी होती है, वरना फलियां चटकने का डर रहता है।
  • पैदावार: इसकी औसत पैदावार 7 से 9 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए JS 9560 सोयाबीन कंप्लीट गाइड पढ़ें।

3. NRC 138 (भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर द्वारा विकसित)

यह एक नई और बेहद उन्नत किस्म है जो कम दिनों में बम्पर उत्पादन देने के लिए जानी जा रही है।

  • अवधि: यह फसल 90 से 93 दिनों में पककर तैयार होती है।
  • विशेषताएं: यह वैरायटी पीला मोजेक वायरस (Yellow Mosaic Virus) के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी है। इसके पौधे मजबूत होते हैं, जिससे तेज हवा और बारिश में फसल आड़ी नहीं गिरती। इसके दानों में तेल और प्रोटीन की मात्रा काफी अच्छी होती है।
  • पैदावार: प्रगतिशील किसान सही प्रबंधन से इससे 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ तक की उपज ले रहे हैं। अधिक विवरण के लिए NRC 138 सोयाबीन वैरायटी फीचर्स पर जाएं।

4. KDS 992 (फुले किमया)

महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी (महाराष्ट्र) द्वारा विकसित यह किस्म कम दिनों की श्रेणी में एक शानदार विकल्प है।

  • अवधि: यह लगभग 92 से 95 दिनों में पकती है।
  • विशेषताएं: इस वैरायटी की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत लाजवाब है। यह तांबा (Rust) रोग और पीला मोजेक के प्रति अत्यधिक सहनशील है। इसके पौधे सीधे बढ़ते हैं और निचली फलियां जमीन से थोड़ी ऊपर लगती हैं, जिससे हार्वेस्टर से कटाई करने में आसानी होती है।
  • पैदावार: इसकी उत्पादन क्षमता काफी अधिक है, जो 11 से 13 क्विंटल प्रति एकड़ तक जा सकती है। इसकी पूरी जानकारी के लिए KDS 992 सोयाबीन वैरायटी फीचर्स को जरूर पढ़ें।

5. JS 21-72

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय द्वारा हाल के वर्षों में रिलीज की गई यह एक बेहतरीन नई वैरायटी है।

  • अवधि: यह फसल 93 से 95 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।
  • विशेषताएं: यह किस्म नई होने के कारण इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पुरानी किस्मों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। चार दानों वाली फलियों की संख्या इसमें अधिक देखी जाती है। इसके दाने चमकदार और मोटे होते हैं जिससे बाजार में भाव अच्छा मिलता है।
  • पैदावार: इसकी औसत पैदावार 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ तक आती है। विस्तृत रिपोर्ट के लिए JS 2172 सोयाबीन वैरायटी हिंदी गाइड देखें।

वैरायटी तुलनात्मक तालिका (Comparison Table)

नीचे दी गई तालिका से आप अपनी जरूरत और क्षेत्र के हिसाब से सबसे बेहतरीन किस्म का चुनाव आसानी से कर सकते हैं:

वैरायटी का नामपकने की अवधि (दिन)औसत पैदावार (क्विंटल/एकड़)मुख्य विशेषता / रोग प्रतिरोधकतासबसे उपयुक्त क्षेत्र
JS 20-3485 – 888 – 10सूखा सहनशील, गर्डल बीटल के प्रति मध्यम प्रतिरोधीमध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र
JS 95-6080 – 857 – 9सबसे कम अवधि, अगेती खेती के लिए उत्तमजिन क्षेत्रों में YMV का प्रकोप न हो
NRC 13890 – 9310 – 12पीला मोजेक वायरस (YMV) के प्रति पूर्ण प्रतिरोधीसंपूर्ण मध्य एवं पश्चिम भारत
KDS 99292 – 9511 – 13रस्ट (तांबा रोग) प्रतिरोधी, हार्वेस्टर हेतु उपयुक्तमहाराष्ट्र, कर्नाटक, दक्षिण म.प्र.
JS 21-7293 – 9510 – 12मोटे व चमकदार दाने, तना छेदक के प्रति सहनशीलमध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश

नोट: यह आंकड़ा क्षेत्र, मौसम, प्रबंधन और बाजार की स्थिति के अनुसार बदल सकता है।

पोषक तत्व और वैज्ञानिक खाद प्रबंधन (Fertilizer Schedule)

अक्सर किसान भाई यह गलती करते हैं कि वे सोयाबीन में केवल डीएपी (DAP) डालकर छोड़ देते हैं। मेरे अनुभव में, सोयाबीन एक तिलहन और दलहन दोनों तरह की फसल है, इसलिए इसे नाइट्रोजन और फास्फोरस के साथ-साथ सल्फर की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

  • बुवाई के समय (प्रति एकड़): * 1 बोरी एनपीके (NPK 12:32:16) या 1 बोरी डीएपी (DAP) के साथ 20 किलो मयूरियेट ऑफ पोटाश (MOP)।
    • साथ में 10 किलोग्राम बेंटोनाइट सल्फर (90%) अवश्य मिलाएं। सल्फर मिलाने से दानों में तेल की मात्रा बढ़ती है और चमक आती है। अधिक जानकारी के लिए आप डीएपी बनाम एनपीके तुलना गाइड देख सकते हैं।
  • खड़ी फसल में छिड़काव: * फूल आने की अवस्था पर (35-40 दिन): एनपीके 19:19:19 @ 1 किलोग्राम प्रति एकड़ का फोलियर स्प्रे करें।
    • फलियां बनते समय (55-60 दिन): एनपीके 0:52:34 @ 1 किलोग्राम के साथ बोरॉन (20%) @ 100 ग्राम प्रति एकड़ मिलाकर स्प्रे करें। इससे फलियों में दाने खाली नहीं रहते और दाने सुडौल बनते हैं। बोरॉन के फायदों को विस्तार से समझने के लिए बोरॉन फर्टिलाइजर के फायदे अवश्य पढ़ें।

खरपतवार और कीट प्रबंधन (Weed & Pest Control)

कम दिनों वाली फसलों में खरपतवारों को बढ़ने का मौका नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि यह सीधे फसल की ग्रोथ को रोक देते हैं।

खरपतवार नियंत्रण (Weed Management)

  • बुवाई के तुरंत बाद (Pre-emergence): बुवाई के 24 से 48 घंटे के भीतर (फसल उगने से पहले) डाइक्लोसुलम 84% WDg (स्ट्रांगआर्म) @ 12.4 ग्राम प्रति एकड़ या पेंडिमेथालिन 38.7% CS @ 700 मिली प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। यह शुरुआती 30 दिनों तक चारा नहीं उगने देता।
  • खड़ी फसल में (Post-emergence): यदि बुवाई के बाद चारा उग आया है, तो 15 से 20 दिनों की फसल होने पर इमेज़ाथापायर 10% SL @ 400 मिली प्रति एकड़ या शॉकेड (क्विज़ालोफ़ॉप-पी-एथिल + इमेज़ाथापायर) @ 800 मिली प्रति एकड़ का छिड़काव करें। विस्तृत स्प्रे शेड्यूल के लिए सोयाबीन में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें देखें।

प्रमुख रोग एवं कीट नियंत्रण

  1. पीला मोजेक वायरस (YMV): यह बीमारी सफेद मक्खी (White Fly) के कारण फैलती है। इसके शुरुआती लक्षण दिखते ही थियामेथॉक्सम 25% WG @ 80 ग्राम या बीटा-सायफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड (सोलोमन) @ 100 मिली प्रति एकड़ का स्प्रे करें। इसके संपूर्ण जैविक समाधान के लिए आप घर पर दशपर्णी अर्क जैविक कीटनाशक भी तैयार कर सकते हैं। अधिक रासायनिक उपायों के लिए पीला मोजेक वायरस कंट्रोल केमिकल्स पढ़ें।
  2. गर्डल बीटल और सेमीलूपर (Ring Cutter & Caterpillars): फलियां बनते समय या फूल आते समय इनका हमला तेज होता है। इसके नियंत्रण के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC (कोराजन) @ 60 मिली या इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG @ 80 ग्राम प्रति एकड़ का छिड़काव करें। पूरी जानकारी के लिए सोयाबीन सेमिलूपर और गर्डल बीटल नियंत्रण का संदर्भ लें।
  3. फूल और फलियों का झड़ना: मौसम में अचानक बदलाव या हैवी पेस्टिसाइड के स्प्रे से फूल झड़ने लगते हैं। इसके उपाय के लिए सोयाबीन में फूल झड़ने के कारण और उपाय गाइड जरूर देखें।

किसानों के लिए 3 वास्तविक जमीनी परिस्थितियां (Farmer Scenarios)

परिस्थिति 1: उत्तर प्रदेश के ललितपुर के किसान रामनरेश जी की कहानी

रामनरेश जी के पास सिंचाई के सीमित साधन हैं और वे सोयाबीन के तुरंत बाद अगेती मटर और फिर गेहूं बोना चाहते थे। उन्होंने पिछले साल JS 20-34 वैरायटी चुनी। फसल केवल 86 दिनों में कट गई। सितंबर के आखिरी हफ्ते में खेत खाली हो गया, जिससे उन्होंने समय पर मटर की बुवाई की और उन्हें बाजार में मटर का अगेती भाव ₹45/किलो मिला।

परिस्थिति 2: महाराष्ट्र के लातूर के किसान सचिन पाटिल का अनुभव

सचिन जी के खेत में भारी काली मिट्टी है जहाँ आखिरी स्टेज में रस्ट (तांबा रोग) का प्रकोप बहुत ज्यादा होता था। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर उन्होंने KDS 992 (फुले किमया) वैरायटी लगाई। इस वैरायटी ने रस्ट को पूरी तरह झेल लिया और पकने की अवधि 93 दिन होने के कारण सितंबर के भारी मॉनसून से पहले ही फसल सुरक्षित घर आ गई।

परिस्थिति 3: मध्य प्रदेश के सीहोर के किसान विकास धाकड़ की समस्या

विकास जी के क्षेत्र में पिछले दो सालों से सितंबर के महीने में बारिश पूरी तरह गायब हो जाती थी, जिससे लंबी अवधि वाली फसलें सूख जाती थीं। उन्होंने NRC 138 वैरायटी का चुनाव किया। सितंबर के पहले सप्ताह में जब सूखा पड़ा, तब तक इनकी फसल के दाने पूरी तरह भर चुके थे और फसल पकने के कगार पर थी, जिससे उनकी पैदावार पर सूखे का कोई खास असर नहीं पड़ा।

किसानों की 5 आम गलतियां और एक्सपर्ट सलाह (Common Mistakes & Expert Tips)

  • 1: ज्यादा बीज दर रखना: कई किसान भाई सोचते हैं कि ज्यादा बीज डालेंगे तो ज्यादा पैदावार होगी। कम दिनों वाली किस्मों के पौधे फैलाव लेते हैं; अगर आप बीज ज्यादा (40-45 किलो प्रति एकड़) डालेंगे तो पौधे घने हो जाएंगे, हवा और धूप अंदर नहीं जाएगी और फूल झड़ने की समस्या बढ़ जाएगी।
    • 💡 एक्सपर्ट सलाह: प्रति एकड़ 30 से 35 किलो से ज्यादा बीज न डालें और कतार से कतार की दूरी 14 से 16 इंच रखें।
  • : कटाई में देरी करना: JS 95-60 और JS 20-34 जैसी किस्में जब पूरी तरह पक जाती हैं, तो उनकी फलियां धूप लगते ही चटकने (Shattering) लगती हैं। यदि आपने कटाई में 4-5 दिन की भी देरी की, तो आधा दाना खेत में ही बिखर जाएगा।
    • 💡 एक्सपर्ट सलाह: जैसे ही फसल की पत्तियां पीली होकर गिर जाएं और फलियों का रंग भूरा/काला पड़ने लगे (लगभग 90% फसल पकने पर), तुरंत कटाई शुरू कर दें।
  • 3: बिना अंकुरण क्षमता जांचे बुवाई: सोयाबीन के बीज का छिलका बहुत नाजुक होता है। पिछले साल की नमी या थ्रेशिंग के दौरान दाने टूटने से इसकी अंकुरण क्षमता घट जाती है।
    • 💡 एक्सपर्ट सलाह: बोने से पहले घर पर टाट की बोरी पर 100 दाने रखकर अंकुरण प्रतिशत जरूर जांचें। यदि 70 से कम दाने उगते हैं, तो बीज की मात्रा थोड़ी बढ़ा दें। पूरी विधि के लिए बीज अंकुरण परीक्षण कैसे करें पढ़ें।

लागत, कमाई और शुद्ध मुनाफा विश्लेषण (Cost & Profit Analysis)

कम दिनों वाली सोयाबीन की खेती का एक एकड़ का अनुमानित गणित नीचे दिया गया है:

खर्च का विवरणअनुमानित लागत (₹ / एकड़)
खेत की तैयारी (जुताई, रोटावेटर)₹ 2,000 – ₹ 2,500
सोयाबीन सर्टिफाइड बीज (35 किलो)₹ 3,000 – ₹ 3,500
बीज उपचार एवं खाद (DAP, सल्फर, पोटाश)₹ 2,500 – ₹ 3,000
खरपतवार नाशक एवं कीटनाशक स्प्रे₹ 2,000 – ₹ 2,800
कटाई और थ्रेसिंग का खर्च₹ 3,000 – ₹ 3,500
कुल अनुमानित लागत₹ 12,500 – ₹ 15,300

कमाई और शुद्ध मुनाफा (Range Profit)

  • औसत पैदावार: 9 क्विंटल प्रति एकड़ (न्यूनतम 8, अधिकतम 12 क्विंटल)
  • अनुमानित बाजार भाव (2026): ₹ 4,500 से ₹ 5,300 प्रति क्विंटल (सरकारी MSP और मंडी भाव के अनुसार)
  • कुल आय: 9 क्विंटल × ₹ 4,800 = ₹ 43,200
  • शुद्ध लाभ: ₹ 43,200 − ₹ 14,000 (औसत लागत) = ₹ 29,200 प्रति एकड़

ध्यान रहे: यह लाभ और लागत आपके स्थानीय बाजार भाव, मौसम और व्यक्तिगत कृषि प्रबंधन के आधार पर घट-बढ़ सकती है। यदि आप असमंजस में हैं कि इस बार धान लगाएं या सोयाबीन, तो हमारा विस्तृत आर्थिक विश्लेषण सोयाबीन बनाम धान मुनाफा तुलना जरूर पढ़ें।

निर्णय आधारित निष्कर्ष (Decision Based Conclusion)

किसान भाइयों, कम दिन में पकने वाली सोयाबीन की किस्मों का चयन आपको अपनी ज़मीन और आने वाली फसल के प्लान के हिसाब से करना चाहिए:

  1. यदि आपका इरादा सोयाबीन के तुरंत बाद आलू, अगेती मटर या लहसुन जैसी नकदी फसल लगाने का है, तो बंद आंख करके JS 20-34 या JS 95-60 लगाएं क्योंकि ये खेत को सबसे पहले खाली कर देंगी।
  2. यदि आपके क्षेत्र में पीला मोजेक वायरस (Yellow Mosaic) का प्रकोप बहुत ज्यादा होता है, तो आपको केवल NRC 138 या नई वैरायटी JS 21-72 का ही चुनाव करना चाहिए।
  3. यदि आप महाराष्ट्र या दक्षिणी राज्यों के किसान हैं और हार्वेस्टर से कटाई करवाना चाहते हैं, तो KDS 992 (फुले किमया) आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प साबित होगी क्योंकि इसकी ऊंचाई अच्छी होती है और फलियां ऊपर लगती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या कम दिनों में पकने वाली सोयाबीन किस्मों की पैदावार लंबी अवधि वाली किस्मों से कम होती है? Ans. सामान्य परिस्थितियों में लंबी अवधि वाली किस्में 2-3 क्विंटल ज्यादा दे सकती हैं, लेकिन यदि आखिरी समय में सूखा या भारी बारिश हो जाए तो कम दिनों वाली किस्में सुरक्षित पकने के कारण ज्यादा और स्थिर पैदावार दे जाती हैं।

Q2. सोयाबीन की फसल में पहली खाद कब और कितनी देनी चाहिए? Ans. सोयाबीन में मुख्य खाद बुवाई के समय ही दी जाती है। प्रति एकड़ 1 बोरी डीएपी या एनपीके के साथ 10 किलो बेंटोनाइट सल्फर देना सबसे उत्तम होता है। खड़ी फसल में यूरिया का प्रयोग न करें।

Q3. JS 20-34 सोयाबीन वैरायटी कितने दिनों में कट जाती है? Ans. यह वैरायटी बुवाई के दिन से लेकर मात्र 85 से 88 दिनों के भीतर पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है।

Q4. क्या कम दिनों वाली सोयाबीन की फलियां खेत में चटकती हैं? Ans. हां, विशेषकर JS 95-60 और JS 20-34 में यह समस्या होती है। इससे बचने का एकमात्र उपाय यह है कि फसल पकते ही (90% पीली पड़ने पर) बिना देरी किए तुरंत थ्रेशर चला लें।

Q5. सोयाबीन के साथ कौन सी अंतर्वर्ती (Intercropping) फसल ली जा सकती है? Ans. आप सोयाबीन के साथ मक्का या अरहर (तुअर) को 4:2 या 6:2 के अनुपात में लगा सकते हैं। मक्का की उन्नत किस्मों की जानकारी के लिए मक्का की हाइब्रिड किस्में 2026 देखें।

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Maneesh Thakur Agriculture Expert & Consultant | Founder, Smart KisanManeesh Thakur कृषि क्षेत्र से जुड़े लेखक एवं कृषि सलाहकार हैं। वे फसल प्रबंधन, उन्नत बीज किस्मों, उर्वरक प्रबंधन, कृषि मशीनरी और सरकारी कृषि योजनाओं पर हिंदी में जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य किसानों तक सरल, व्यावहारिक और शोध-आधारित जानकारी पहुंचाना है ताकि किसान बेहतर निर्णय लेकर अपनी खेती को अधिक लाभदायक बना सकें। 📌 Founder: SmartKisan.co.in

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