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धान में ब्लास्ट रोग: पत्ती, गांठ और गर्दन ब्लास्ट की पहचान व सही प्रबंधन

धान में ब्लास्ट रोग ऐसा फफूंदजनित रोग है जो नर्सरी से लेकर बाली निकलने तक अलग-अलग रूप में दिखाई दे सकता है। पत्तियों पर नाव या आँख जैसी धुरीदार आकृति के धब्बे, गांठ पर काला पड़ना और बाली की गर्दन पर भूरा-काला घाव इसके प्रमुख संकेत हैं। समय पर पहचान न हो तो किसान इसे पोषक तत्व की कमी, तना छेदक, बैक्टीरियल रोग या साधारण पत्ती धब्बा समझकर गलत उपचार कर सकता है।

यह लेख मध्य प्रदेश सहित मध्य भारत के धान किसानों के लिए तैयार किया गया है। इसमें कोई एक जैसी “प्रति पंप” मात्रा नहीं दी गई है, क्योंकि सही मात्रा उत्पाद की सक्रिय सामग्री, formulation, label claim, खेत का क्षेत्रफल और प्रति एकड़ पानी की मात्रा पर निर्भर करती है। किसी भी फफूंदनाशक का उपयोग केवल धान और ब्लास्ट के लिए वर्तमान लेबल पर पंजीकृत दावे के अनुसार करें।

धान का ब्लास्ट रोग क्या है?

ब्लास्ट धान का एक प्रमुख फफूंदजनित रोग है। इसे पत्ती ब्लास्ट, कॉलर ब्लास्ट, गांठ ब्लास्ट और गर्दन ब्लास्ट जैसे नामों से भी जाना जाता है, क्योंकि संक्रमण पौधे के अलग-अलग भागों पर हो सकता है। TNAU के अनुसार यह रोग पौध अवस्था से लेकर कल्ले निकलने, गांठ बनने और बाली निकलने तक फसल पर दिखाई दे सकता है।

रोग का महत्व केवल पत्ती के धब्बों तक सीमित नहीं है। यदि संक्रमण बाली की गर्दन पर जल्दी हो जाए, तो दाने बनना रुक सकता है या बालियाँ अधभरी और हल्की रह सकती हैं। इसलिए पत्ती पर शुरुआती लक्षण मिलने के बाद बाली निकलने वाले चरण तक निगरानी जारी रखना जरूरी है।

ब्लास्ट रोग की सही पहचान कैसे करें?

1. पत्ती ब्लास्ट के लक्षण

  • शुरुआत में पत्ती पर छोटे नीले-हरे या भूरे बिंदु दिखाई दे सकते हैं।
  • बाद में धब्बा दोनों सिरों से नुकीला होकर नाव, आँख या धुरी जैसा बनता है।
  • धब्बे का बीच का भाग धूसर या राख जैसा और किनारा गहरा भूरा होता है।
  • नमी अधिक रहने पर कई धब्बे आपस में मिलकर पत्ती का बड़ा हिस्सा सुखा सकते हैं।
  • अत्यधिक प्रकोप में खेत दूर से झुलसा हुआ दिखाई दे सकता है।

मैदानी पहचान का आसान नियम: केवल भूरा धब्बा देखकर ब्लास्ट तय न करें। पहले देखें कि धब्बा धुरी के आकार का है या नहीं, बीच धूसर है या नहीं और किनारे स्पष्ट गहरे भूरे हैं या नहीं।

2. कॉलर और गांठ ब्लास्ट

पत्ती और leaf sheath के जोड़ वाले कॉलर भाग पर संक्रमण होने से पूरा पत्ती ब्लेड सूख सकता है। गांठ ब्लास्ट में तने की गांठ गहरी भूरी या काली होकर कमजोर पड़ती है। गंभीर स्थिति में उसी स्थान से तना टूट सकता है और ऊपर का भाग सूख सकता है।

3. गर्दन ब्लास्ट के लक्षण

  • बाली के ठीक नीचे गर्दन वाले भाग पर धूसर-भूरा या काला घाव बनता है।
  • गर्दन सिकुड़ सकती है और बाली झुक या टूट सकती है।
  • दूधिया अवस्था से पहले संक्रमण होने पर बाली सफेद रह सकती है और दाने नहीं भरते।
  • देर से संक्रमण होने पर दाने अधभरे, सिकुड़े या हल्के रह सकते हैं।

IRRI के अनुसार गर्दन ब्लास्ट में बाली की गर्दन पर संक्रमण सबसे ज्यादा नुकसानदायक रूपों में से एक है। इसलिए बाली निकलने से पहले और बाली निकलते समय खेत की नियमित जांच जरूरी है।

ब्लास्ट, बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट और शीथ ब्लाइट में अंतर

समस्यामुख्य स्थानपहचान का प्रमुख संकेत
पत्ती ब्लास्टपत्ती, कॉलर, गांठ, गर्दनधुरीदार धब्बा, धूसर केंद्र और गहरा भूरा किनारा
बैक्टीरियल लीफ ब्लाइटपत्ती का सिरा और किनारासिरे से नीचे बढ़ता पीला-सफेद झुलसा क्षेत्र; धुरीदार धब्बा नहीं
शीथ ब्लाइटपानी की सतह के पास leaf sheathअंडाकार हरे-धूसर धब्बे, बाद में सफेद-धूसर केंद्र व भूरी सीमा
भूरा पत्ती धब्बामुख्यतः पत्तियाँगोल या अंडाकार भूरे धब्बे; ब्लास्ट जैसी स्पष्ट नुकीली धुरी हमेशा नहीं

यदि लक्षण पानी की सतह के पास sheath से शुरू हो रहे हैं, तो पहले धान में शीथ ब्लाइट की पहचान देखें। पत्ती के किनारे से लंबी पीली-सफेद पट्टी बन रही हो तो धान में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट वाली गाइड से मिलान करें।

किन परिस्थितियों में ब्लास्ट तेजी से बढ़ता है?

  • लंबे समय तक पत्तियों का गीला रहना, लगातार ओस, बादल और बार-बार हल्की बारिश।
  • घनी रोपाई, जिससे पौधों के बीच हवा का आवागमन कम हो।
  • एक साथ या जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देना, जिससे कोमल और घनी वृद्धि बढ़े।
  • खेत में नमी का बार-बार बहुत कम और बहुत ज्यादा होना।
  • संवेदनशील किस्म और संक्रमित अवशेष या रोगग्रस्त पौध सामग्री।
  • खेत के ठंडे, छायादार और देर तक गीले रहने वाले हिस्से।

केवल बरसात होना बीमारी की पुष्टि नहीं है। रोग तभी तय करें जब अनुकूल मौसम के साथ विशिष्ट लक्षण भी मिलें।

खेत में 15 मिनट की जांच कैसे करें?

  1. चार कोने और बीच का भाग देखें: खेत के कम से कम पाँच स्थान चुनें।
  2. ऊपरी और बीच की पत्तियाँ देखें: केवल सूखी निचली पत्तियों के आधार पर निष्कर्ष न निकालें।
  3. 20–25 पौधे प्रति स्थान देखें: धुरीदार धब्बों वाले पौधों की संख्या नोट करें।
  4. गांठ और गर्दन देखें: बाली निकल रही हो तो गर्दन पर भूरा-काला घाव खोजें।
  5. फोटो लें: पूरी पत्ती और धब्बे का नजदीकी फोटो रखें, ताकि कृषि विशेषज्ञ से पहचान कराई जा सके।
  6. एक दिन बाद फिर देखें: सक्रिय रोग में नए धब्बे या पुराने धब्बों का फैलाव दिखाई दे सकता है।

ब्लास्ट दिखे तो तुरंत क्या करें?

पहला कदम: नाइट्रोजन रोककर स्थिति जाँचें

रोग सक्रिय होने पर केवल गहरा हरा रंग पाने के लिए अतिरिक्त यूरिया न डालें। पहले मृदा परीक्षण, फसल की अवस्था और पहले दी गई नाइट्रोजन का हिसाब देखें। संतुलित पोषण रखें; पोटाश और अन्य तत्वों की कमी होने पर सुधार केवल मिट्टी/पत्ती परीक्षण या स्थानीय सिफारिश के आधार पर करें। धान में अगली खाद की योजना बनाते समय दूसरी खाद का सही समय और तरीका भी देखें।

दूसरा कदम: खेत का सूक्ष्म वातावरण सुधारें

  • अनावश्यक रूप से बहुत गहरा पानी लगातार न रखें; सिंचाई स्थानीय मिट्टी और फसल अवस्था के अनुसार करें।
  • जहाँ पानी लंबे समय तक रुका रहता है, वहाँ निकास सुधारें।
  • घनी खरपतवार वृद्धि को सुरक्षित तरीके से हटाएँ, ताकि हवा का आवागमन बेहतर हो।
  • रोगग्रस्त पत्तियों को पूरे खेत में हाथ से तोड़कर फैलाना व्यावहारिक नहीं है; पौधों को अनावश्यक चोट भी न पहुँचाएँ।

तीसरा कदम: फफूंदनाशक का निर्णय प्रमाण के आधार पर लें

हर धब्बे पर दवा डालना सही नहीं है। पहले रोग की पहचान, फैलाव, फसल का चरण और पिछले स्प्रे का रिकॉर्ड देखें। यदि कृषि विशेषज्ञ ब्लास्ट की पुष्टि करता है और रोग बढ़ रहा है, तो केवल ऐसा fungicide चुनें जिसके वर्तमान भारतीय label पर धान और blast का स्पष्ट दावा हो।

  • सक्रिय सामग्री और formulation प्रतिशत को बोतल पर पढ़ें।
  • लेबल की प्रति एकड़/हेक्टेयर मात्रा और पानी की मात्रा का पालन करें; केवल “एक पंप” के हिसाब से अनुमान न लगाएँ।
  • कटाई से पहले का प्रतीक्षा समय (PHI), अधिकतम स्प्रे संख्या और पुनः प्रवेश निर्देश पढ़ें।
  • दो fungicide, insecticide, micronutrient और PGR को बिना compatibility प्रमाण के एक टंकी में न मिलाएँ।
  • पहले से एक ही mode of action का बार-बार उपयोग हुआ हो तो स्थानीय विशेषज्ञ से resistance-management विकल्प पूछें।
  • दस्ताने, मास्क, पूरे कपड़े और सही nozzle का उपयोग करें; तेज हवा या बारिश से ठीक पहले स्प्रे न करें।

महत्वपूर्ण: बिना product label देखे tricyclazole, azoxystrobin, propiconazole या किसी अन्य सक्रिय सामग्री की मात्रा कॉपी करना सुरक्षित नहीं है। अलग-अलग formulations की सांद्रता अलग होती है। इसलिए इस लेख में universal dose जानबूझकर नहीं दी गई है।

बाली निकलने के समय गर्दन ब्लास्ट से बचाव

पत्ती ब्लास्ट का इतिहास हो तो बाली निकलने से पहले खेत को “ठीक हो गया” मानकर निगरानी बंद न करें। बाली निकलने के आसपास गर्दन और panicle branches की जांच बढ़ाएँ। रोग-रोधी किस्म, संतुलित नाइट्रोजन और स्थानीय मौसम के अनुसार समय पर निगरानी सबसे मजबूत आधार हैं। IRRI भी resistant varieties को प्राथमिक प्रबंधन विकल्प मानता है।

तना छेदक से सफेद बाली बनने पर तने में dead heart/white ear का संकेत और कीट क्षति मिल सकती है, जबकि गर्दन ब्लास्ट में बाली की गर्दन पर विशिष्ट भूरा-काला lesion मिलता है। कीट की शंका हो तो धान में तना छेदक की पहचान से तुलना करें।

अगले सीजन के लिए बचाव की योजना

  • स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित रोग-सहनशील किस्म चुनें।
  • स्वस्थ और प्रमाणित बीज लें; बीज उपचार केवल मान्य label और स्थानीय सिफारिश के अनुसार करें।
  • बहुत घनी रोपाई से बचें और खेत में संतुलित पौध संख्या रखें।
  • नाइट्रोजन को फसल की जरूरत के अनुसार विभाजित मात्रा में दें; एक बार में अत्यधिक यूरिया न डालें।
  • पिछले रोगग्रस्त अवशेषों का उचित प्रबंधन करें और संभव हो तो फसल चक्र अपनाएँ।
  • नर्सरी से ही साप्ताहिक scouting की आदत बनाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या हर धुरीदार धब्बा ब्लास्ट होता है?

धुरीदार आकृति, धूसर केंद्र और गहरे भूरे किनारे ब्लास्ट के मजबूत संकेत हैं, लेकिन पक्का निर्णय कई पत्तियों और खेत के पैटर्न देखकर करें। संदेह होने पर स्थानीय पादप रोग विशेषज्ञ को स्पष्ट फोटो दिखाएँ।

ब्लास्ट में यूरिया डालना चाहिए या रोकना चाहिए?

सक्रिय रोग और पहले से गहरी हरी, घनी फसल में अतिरिक्त यूरिया रोग का जोखिम बढ़ा सकता है। निर्धारित अगली मात्रा देने से पहले मृदा स्थिति, फसल अवस्था और स्थानीय सिफारिश की जांच करें।

पत्ती ब्लास्ट और गर्दन ब्लास्ट क्या एक ही रोग हैं?

रोगजनक एक ही समूह का है, लेकिन संक्रमण का स्थान और नुकसान अलग है। पत्ती ब्लास्ट पत्तियों पर दिखता है, जबकि गर्दन ब्लास्ट बाली के नीचे neck भाग को कमजोर करता है और दाना भराव सीधे प्रभावित कर सकता है।

क्या ब्लास्ट की दवा की एक मात्रा हर 15 या 25 लीटर पंप में समान रहती है?

नहीं। पंप की क्षमता से सही dose तय नहीं होती। पहले प्रति क्षेत्र label dose और कुल spray-water volume तय होता है, फिर उसी आधार पर tank concentration निकाली जाती है। formulation बदले तो मात्रा भी बदल सकती है।

बारिश के कितने समय बाद स्प्रे करें?

यह product label, मौसम और पत्ती सूखने की स्थिति पर निर्भर है। तेज हवा, सक्रिय बारिश या तुरंत बारिश की संभावना में स्प्रे न करें। स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और label का rainfastness निर्देश देखें।

निष्कर्ष

धान में ब्लास्ट रोग का सबसे सुरक्षित प्रबंधन सही पहचान से शुरू होता है। पत्ती पर धूसर केंद्र वाला धुरीदार धब्बा, गांठ पर काला पड़ना और बाली की गर्दन पर भूरा-काला lesion अलग-अलग चरण के संकेत हैं। अतिरिक्त नाइट्रोजन रोकना, खेत की नियमित जांच, संतुलित पोषण, अनुकूल सूक्ष्म वातावरण को कम करना और केवल label-claimed fungicide का जिम्मेदार उपयोग—इन सबको साथ अपनाना चाहिए।

स्रोत और संदर्भ

अंतिम अपडेट: 21 अगस्त 2026। कृषि दवा खरीदने या उपयोग करने से पहले नवीनतम label claim और अपने जिले की कृषि विभाग/KVK सलाह अवश्य देखें।

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Devendra Singh Thakur

Devendra Singh Thakur किसान, कृषि विषयों के लेखक एवं संस्थापक — Smart KisanDevendra Singh Thakur एक किसान, कृषि विषयों के लेखक और Smart Kisan के संस्थापक हैं। वे फसल प्रबंधन, बीज किस्मों, उर्वरक एवं सुरक्षित कीट-रोग प्रबंधन, कृषि मशीनरी और सरकारी कृषि योजनाओं से जुड़ी उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में साझा करते हैं। लेख तैयार करते समय आधिकारिक कृषि संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, उत्पाद के स्वीकृत लेबल और सरकारी पोर्टलों को प्राथमिकता दी जाती है।

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