धान की फसल से रिकॉर्ड पैदावार लेने का सबसे बड़ा राज छुपा है उसके कल्लों (Tillers) की संख्या में। खेत में जितने अधिक और मजबूत कल्ले निकलेंगे, बालियों की संख्या भी उतनी ही ज्यादा होगी।
रोपाई के शुरुआती 20 से 35 दिन धान की फसल के लिए सबसे संवेदनशील समय होते हैं। इसी समय पौधे अपनी वानस्पतिक बढ़वार (Vegetative Growth) और फुटाव तय करते हैं।
अगर आपने इस दौरान सही समय पर सही पोषक तत्वों का कॉम्बिनेशन नहीं दिया, तो कल्ले कम रह जाएंगे और बाद में चाहे कितनी भी खाद डाल लें, पैदावार नहीं बढ़ पाएगी।
आइए विस्तार से समझते हैं कि धान में दूसरी खाद कब देनी चाहिए, कौन-कौन से उर्वरक मिलाने चाहिए और फुटाव बढ़ाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
धान में दूसरी खाद डालने का सबसे सही समय क्या है?
धान की रोपाई (Transplanting) के तुरंत बाद पौधे नई जड़ें जमाने में समय लेते हैं। रोपाई के समय किसान बेसल डोज (DAP/NPK और पोटाश) देते हैं, जो शुरुआती 15-20 दिनों तक काम करता है।
- आदर्श समय: रोपाई के 21 से 25 दिन बाद (अधिकतम 30 दिन के अंदर)।
- पहचान का तरीका: जब खेत में पौधे हरे होकर जड़ पकड़ लें और नीचे से हल्के-हल्के नए कल्ले निकलने की शुरुआत दिख रही हो।
- समय का महत्व: 35 दिन के बाद धान में कल्ले बनने की प्राकृतिक प्रक्रिया धीमी होने लगती है। इसलिए 30 दिन से पहले दूसरी खाद का छिड़काव या बुरकाव पूरा हो जाना चाहिए।
धान में दूसरी खाद का सटीक कॉम्बिनेशन (प्रति एकड़ डोज)
अधिक कल्ले और चमकदार हरी फसल के लिए केवल यूरिया डालना काफी नहीं होता। धान को इस समय नाइट्रोजन के साथ सल्फर, जिंक और बायो-स्टीमुलेंट की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
| खाद / पोषक तत्व | प्रति एकड़ सही मात्रा | मुख्य कार्य और लाभ |
| यूरिया (Urea) | 35 से 40 किलोग्राम | क्लोरोफिल बढ़ाता है और वानस्पतिक बढ़वार तेज करता है |
| जिंक सल्फेट (33% या 21%) | 5 किग्रा (33%) या 7-8 किग्रा (21%) | पौधे में प्रोटीन संश्लेषण और कल्ले निकलने की गति बढ़ाता है |
| बेंटोनाइट सल्फर (90% D.G.) | 3 से 5 किलोग्राम | मिट्टी का pH सुधारता है और फफूंद से सुरक्षा देता है |
| ह्यूमिक एसिड (98% Granules) | 1 से 1.5 किलोग्राम | सफेद जड़ों का तेजी से जाल बिछाता है |
| सीवीड एक्सट्रैक्ट (सागरिका/बायोविटा) | 8 से 10 किलोग्राम (वैकल्पिक) | सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान कर कल्लों को मोटा बनाता है |
खाद तैयार करने और डालने का सही तरीका
खाद को खेत में बुरकाव (Broadcasting) करने से पहले इन महत्वपूर्ण चरणों का पालन करें:
- मिक्सिंग का सही नियम: सबसे पहले यूरिया को जमीन या तिरपाल पर फैलाएं। इसके ऊपर ह्यूमिक एसिड, सल्फर और बायो-स्टीमुलेंट मिलाएं।
- जिंक मिलाने की सावधानी: अगर आप जिंक सल्फेट मिला रहे हैं, तो खाद मिलाने के तुरंत बाद (1 घंटे के भीतर) खेत में बिखेर दें। देर तक रखने पर यूरिया पानी छोड़ने लगता है।
- डीएपी/फास्फोरस के साथ जिंक न मिलाएं: अगर आपने बेसल डोज में फास्फोरस नहीं दिया था, तो ध्यान रहे कि जिंक और डीएपी को कभी एक साथ मिलाकर न डालें। इससे जिंक फॉस्फेट बन जाता है जो पौधे नहीं ले पाते।
धान में 40+ कल्ले पाने का सीक्रेट फॉर्मूला
पौधे से ज्यादा कल्ले तभी निकलेंगे जब उसकी जड़ें गहरी और मजबूत होंगी। फुटाव को दोगुना से तिगुना करने के लिए इन तीन पहलुओं पर काम करें:
1. सफेद जड़ों का विकास (White Root Development)
पौधा मिट्टी से भोजन अपनी सफेद महीन जड़ों के जरिए ही लेता है। दूसरी खाद के साथ ह्यूमिक एसिड या माइकोराइजा डालने से जड़ों का दायरा 3 गुना बढ़ जाता है, जिससे पौधा तेजी से भोजन खींचता है।
2. संतुलित नाइट्रोजन का उपयोग
बहुत से किसान गलती करते हैं और एक साथ 2-3 बैग यूरिया डाल देते हैं। अधिक यूरिया से पौधा केवल लंबा और कमजोर हो जाता है, जिससे कीटों (जैसे तना छेदक और पत्ता लपेटक) का हमला बढ़ जाता है। यूरिया हमेशा टुकड़ों में (Split Dose) दें।
3. पत्तियों पर स्प्रे फॉर्मूला (Foliar Spray Option)
अगर खेत में पानी ज्यादा भरा है या जमीन से खाद काम नहीं कर रही है, तो रोपाई के 25-30 दिन बाद यह स्प्रे करें:
- NPK 19:19:19: 1 किलोग्राम
- चिलेटेड जिंक (EDTA 12%): 100 से 150 ग्राम
- लिक्विड सीवीड / अमीनो एसिड: 250 से 300 मिली
- पानी: 150 से 200 लीटर प्रति एकड़
इस घोल का छिड़काव करने के 48 से 72 घंटे के भीतर फसल का रंग गहरा हरा हो जाता है और नए कल्ले तेजी से फूटने लगते हैं।
दूसरी खाद डालते समय पानी का सही प्रबंधन
खाद का पूरा असर तभी मिलता है जब खेत में नमी का स्तर सही हो।
- खाद डालते समय: खेत में बहुत ज्यादा गहरा पानी (4-5 इंच) न रखें। पानी केवल आधा से 1 इंच (कीचड़ जैसी स्थिति या हल्का पानी) होना चाहिए।
- गहरे पानी का नुकसान: ज्यादा पानी में यूरिया घुलने के बाद लीचिंग (जमीन के नीचे बह जाना) या वाष्पीकरण से हवा में उड़ जाता है।
- खाद डालने के 24 घंटे बाद: जब खाद जमीन में बैठ जाए, तब खेत में 2 से 3 इंच पानी भरें और उसे 3-4 दिन तक रोक कर रखें।
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- खरपतवार न निकालना: अगर खेत में घास और खरपतवार हैं, तो 40% खाद खरपतवार ही खा जाएंगे। दूसरी खाद डालने से पहले निंदाई-गुड़ाई करें या सही खरपतवारनाशक का प्रयोग कर चुके हों।
- देरी से खाद डालना: 35-40 दिन के बाद यूरिया और जिंक डालने से केवल पत्तियां बढ़ती हैं, नए कल्ले नहीं बनते।
- सल्फर को नजरअंदाज करना: धान में सल्फर देने से दानों में चमक आती है और नाइट्रोजन की कार्यक्षमता 25% तक बढ़ जाती है।
- कीटों की अनदेखी: कल्ले निकलते समय तना छेदक (Stem Borer) का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है। अगर सुंडी दिखे तो खाद के साथ फिप्रोनिल 0.3% GR (4-5 किग्रा/एकड़) या कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4G मिला लें।
- अत्यधिक पानी भरकर रखना: लगातार 4-5 इंच पानी भरा रहने से जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे कल्ले दब जाते हैं। बीच-बीच में खेत से पानी सुखाना (AWD तकनीक) फायदेमंद रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या दूसरी खाद में डीएपी (DAP) डाल सकते हैं?
नहीं, डीएपी या किसी भी फॉस्फेटिक खाद का इस्तेमाल रोपाई के समय (बेसल डोज में) ही करना चाहिए। कल्ले निकलते समय पौधे को नाइट्रोजन, जिंक और सल्फर की मुख्य जरूरत होती है।
2. धान में कल्ले बढ़ाने के लिए सबसे अच्छी दवा कौन सी है?
कल्ले बढ़ाने के लिए ह्यूमिक एसिड (98%), सीवीड एक्सट्रैक्ट (जैसे सागरिका/बायोविटा) या चिलेटेड जिंक + NPK 19:19:19 का स्प्रे सबसे सुरक्षित और असरदार माना जाता है।
3. जिंक 33% और जिंक 21% में कौन सा बेहतर है?
दोनों ही अच्छे हैं, लेकिन जिंक सल्फेट 33% में जिंक और सल्फर का अनुपात बेहतर होता है और इसकी कम मात्रा (5 किग्रा/एकड़) लगती है। यदि 21% डाल रहे हैं तो 7-8 किग्रा प्रति एकड़ डालें।
4. दूसरी खाद के कितने दिन बाद तीसरी खाद डालनी चाहिए?
दूसरी खाद के लगभग 20 से 25 दिन बाद (यानी रोपाई के 45 से 50 दिन बाद, गभोट अवस्था से ठीक पहले) तीसरी खाद में यूरिया और म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) का प्रयोग करना चाहिए।







