क्या आपकी धान की फसल में कल्लों (tillers) की संख्या कम है? क्या भारी मात्रा में खाद डालने के बाद भी आपके धान के पौधे कमजोर, पतले और कम फैलाव वाले दिख रहे हैं?
हर किसान भाई का एक ही सपना होता है—कम लागत में रिकॉर्ड तोड़ पैदावार। लेकिन सच यह है कि जब तक धान के एक पौधे से 25 से 30 मजबूत कल्ले नहीं निकलेंगे, तब तक बंपर पैदावार पाना नामुमकिन है। कई बार हम महंगी खादें और टॉनिक लाकर खेतों में डाल देते हैं, फिर भी मनमुताबिक रिजल्ट नहीं मिलता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम सही समय पर सही तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते।
अगर आप भी इस सीजन में अपनी फसल से रिकॉर्ड उत्पादन लेना चाहते हैं, तो यह गाइड आपके लिए ही है। इस विस्तृत लेख में हम बात करेंगे कि धान में कल्लों का फुटाव बढ़ाने के लिए क्या करें, कौन सी गलतियों से बचें और कौन सा सीक्रेट फॉर्मूला अपनाएं।
धान में कल्ले कम निकलने के मुख्य कारण क्या हैं?
समाधान पर जाने से पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर हमारे धान में कल्लों का फुटाव कम क्यों रह जाता है। जब तक हम बीमारी की जड़ को नहीं पकड़ेंगे, तब तक सही इलाज नहीं हो पाएगा।
1. रोपाई में देरी और पौधों की ज्यादा उम्र
हमारे यहाँ बहुत से किसान भाई नर्सरी में पौधों को 35 से 40 दिनों तक छोड़ देते हैं। जब पौधे की उम्र बहुत ज्यादा हो जाती है, तो उसकी कल्ले बनाने की प्राकृतिक क्षमता आधी रह जाती है। हमेशा याद रखें कि रोपाई के लिए 21 से 25 दिन का पौधा सबसे बेस्ट होता है।
2. खेत में लगातार पानी भरकर रखना
यह धान की खेती से जुड़ा सबसे बड़ा मिथक है कि खेत में हमेशा 4-5 इंच पानी भरा रहना चाहिए। जब खेत में लगातार पानी जमा रहता है, तो मिट्टी में हवा का संचार (aeration) बंद हो जाता है। ऑक्सीजन न मिलने के कारण जड़ें सांस नहीं ले पातीं और नए कल्लों का फूटना रुक जाता है।
3. पोषक तत्वों की कमी और गलत टाइमिंग
सिर्फ यूरिया डाल देने से धान में कल्ले नहीं आते। धान की फसल को शुरुआती दिनों में नाइट्रोजन के साथ-साथ फास्फोरस, पोटैशियम, जिंक और सल्फर की सख्त जरूरत होती है। अगर इनकी सही मात्रा सही समय पर न मिले, तो पौधा अपनी ग्रोथ रोक देता है।
धान में कल्लों का फुटाव बढ़ाने के लिए क्या करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
धान की रोपाई के बाद के 15 से 40 दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसी समय को “मैक्सिमम टिलरिंग स्टेज” कहा जाता है। अगर आपने इस दौरान सही कदम उठा लिए, तो आपकी फसल को देखकर आस-पास के किसान भी हैरान रह जाएंगे। आइए जानते हैं क्या करना है।
धान की लाइफ साइकिल:
[रोपाई] ➔ ➔ [15 से 40 दिन: कल्ले निकलने का सही समय] ➔ ➔ [गाभा अवस्था] ➔ ➔ [कटाई]
(यही सही समय है काम करने का!)
स्टेप 1: रोपाई के समय बेसल डोज का सही तालमेल
धान के पौधे को शुरुआत में ही मजबूती देने के लिए आपको खेत तैयार करते समय या रोपाई के तुरंत बाद नीचे दी गई मात्रा के अनुसार खाद देनी चाहिए:
- DAP (डाई अमोनियम फास्फेट): 30 से 40 किलोग्राम प्रति एकड़
- MOP (म्यूरेट ऑफ पोटाश): 20 किलोग्राम प्रति एकड़
- जिंक सल्फेट (21%): 10 किलोग्राम प्रति एकड़ (या 33% वाला 7 किलोग्राम)
नोट: कभी भी DAP और जिंक सल्फेट को एक साथ मिलाकर न डालें, इससे दोनों बेअसर हो जाते हैं। जिंक को हमेशा रोपाई के 7-10 दिन बाद यूरिया के साथ दें।
स्टेप 2: पहली टॉप ड्रेसिंग (15-20 दिन पर)
रोपाई के लगभग 18 से 20 दिन बाद जब पौधे की जड़ें मिट्टी को अच्छी तरह पकड़ लें, तब आपको पहली टॉप ड्रेसिंग करनी है। इस समय प्रति एकड़ का फॉर्मूला नोट कर लीजिए:
- यूरिया: 35 से 40 किलोग्राम
- जाइम (Biozyme या Sagrika): 8 से 10 किलोग्राम
- सल्फर (90% WDG): 3 किलोग्राम
इस मिश्रण को मिलाकर शाम के समय खेत में छिटक दें। जाइम में मौजूद समुद्री शैवाल के अर्क (seaweed extract) जड़ों का ऐसा जाल बिछाते हैं कि पौधा मिट्टी से सारे पोषक तत्व खींचने लगता है।
स्टेप 3: जादुई स्प्रे (NPK 19:19:19 और चीलेटेड जिंक)
अगर आपकी मिट्टी कमजोर है या पौधे पीले पड़ रहे हैं, तो रोपाई के 25वें दिन एक कमाल का स्प्रे करें। 1 किलोग्राम NPK 19:19:19 और 100 ग्राम चीलेटेड जिंक (EDTA 12%) को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ स्प्रे करें। यह सीधे पत्तियों पर काम करता है और 3 दिनों के भीतर नए-नए कल्ले निकलने शुरू हो जाते हैं।
देसी और पारंपरिक तरीके: पाटा लगाना (Planking Method)
यह हमारे बुजुर्ग किसानों का एक ऐसा अचूक और मुफ्त का नुस्खा है, जिसके आगे महंगे टॉनिक भी फेल हैं। रोपाई के 20 से 30 दिन के बीच जब खेत में हल्का पानी (लगभग 1 से 2 इंच) हो, तब एक भारी बांस या लकड़ी के लट्ठे को रस्सी से बांधकर पूरे खेत में खींचें (जैसे हम पाटा लगाते हैं)।
पाटा लगाने के फायदे:
- जड़ों को झटका लगना: जब बांस पौधों को झुकाता है, तो उनकी जड़ों को एक सकारात्मक झटका (stress) लगता है। इस स्ट्रेस से बचने के लिए पौधा अपनी पूरी ताकत नए कल्ले फेंकने में लगा देता है।
- कीटों से बचाव: पत्ती लपेटक सुंडी (Leaf Folder) जैसी इल्लियां पानी में गिरकर मर जाती हैं।
- एकसमान विकास: मिट्टी समतल होती है और खाद हर पौधे तक बराबर पहुंचती है।
धान की टॉप 5 वैरायटी और उनका खाद प्रबंधन
अलग-अलग धान की किस्मों की कल्ले बनाने की क्षमता अलग होती है। नीचे दी गई तालिका से समझें कि किस प्रकार की वैरायटी में कैसा रिस्पॉन्स मिलता है:
| धान की वैरायटी / प्रकार | कल्लों की औसत संख्या (प्रति पौधा) | खाद की आवश्यकता | विशेष सुझाव |
| हाइब्रिड किस्में (जैसे- प्रज्वल, आरएच) | 25 – 35 कल्ले | मध्यम से उच्च | शुरुआत में नाइट्रोजन कम दें, वरना पौधे जरूरत से ज्यादा लंबे हो जाएंगे। |
| बासमती / सुगंधित किस्में (जैसे- PB 1, 1121) | 18 – 22 कल्ले | संतुलित | इनमें कल्ले बढ़ाने के लिए सल्फर का इस्तेमाल जरूर करें, इससे खुशबू भी बढ़ती है। |
| कम अवधि वाली किस्में (जैसे- IR 64, सहभागी) | 15 – 20 कल्ले | शुरुआती दिनों में तेज | इनके पास समय कम होता है, इसलिए रोपाई के 15 दिन के भीतर ही पहली खाद दें। |
| मध्यम अवधि की किस्में (जैसे- MTU 1010) | 20 – 25 कल्ले | सामान्य | रोपाई के 22वें दिन पाटा (Planking) लगाने से सबसे बेस्ट रिजल्ट मिलता है। |
खरपतवार नियंत्रण: कल्लों के सबसे बड़े दुश्मन
कई किसान भाई शिकायत करते हैं कि उन्होंने यूरिया, जिंक, जाइम सब डाल दिया फिर भी फुटाव नहीं हुआ। इसका एक बड़ा कारण यह होता है कि आपकी महंगी खाद को पौधे नहीं, बल्कि खेत में उगे खरपतवार (घास और मोथा) खा रहे होते हैं।
धान में कल्ले तभी आएंगे जब खेत साफ होगा। इसके लिए रोपाई के 2 से 3 दिनों के भीतर प्रीटिलाक्लोर (Pretilachlor 50% EC) 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से पानी में मिलाकर या रेत में मिलाकर पूरे खेत में बिखेर दें। अगर बाद में चौड़ी पत्ती या मोथा घास उग आए, तो रोपाई के 15-20 दिनों पर बिस्पायरीबैक सोडियम (Bispyribac Sodium 10% SC) 80 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें।
महत्वपूर्ण चेतावनी: खरपतवार नाशक का स्प्रे करते समय खेत में नमी होनी चाहिए, लेकिन बहुत ज्यादा भरा हुआ पानी नहीं होना चाहिए। स्प्रे करने के 24 घंटे बाद खेत में हल्का पानी भरें।
पानी का प्रबंधन: “सूखा-गीला” का नियम (AWD Method)
जैसा कि हमने पहले बताया, धान को हर समय बाढ़ जैसे पानी की जरूरत नहीं होती। कल्लों के शानदार फुटाव के लिए Alternate Wetting and Drying (AWD) यानी “सूखा-गीला” नियम अपनाएं।
- रोपाई के बाद पहले 10 दिन खेत में पानी रखें ताकि पौधे सेट हो जाएं।
- इसके बाद, खेत में 2-3 इंच पानी भरें और फिर उसे तब तक दोबारा पानी न दें जब तक कि मिट्टी की ऊपरी सतह हल्की सूख न जाए (ध्यान रहे, मिट्टी में दरारें नहीं पड़नी चाहिए, सिर्फ पानी सूखना चाहिए)।
- जैसे ही ऊपरी मिट्टी हल्की सूखी दिखे, तुरंत दोबारा पानी लगा दें।
- इस उतार-चढ़ाव से मिट्टी में ऑक्सीजन का लेवल बढ़ता है, जिससे जड़ों का विकास 3 गुना तेजी से होता है और कल्ले गिनते-गिनते आप थक जाएंगे।
धान में कल्लों के फुटाव के दौरान होने वाली आम गलतियां
अक्सर किसान अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है। इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
- अंधाधुंध यूरिया का प्रयोग: ज्यादा यूरिया डालने से पौधा सिर्फ लंबा और कोमल हो जाता है। ऐसे पौधों पर बीमारियां और कीट बहुत जल्दी हमला करते हैं, और हवा चलने पर फसल गिर जाती है।
- देर से जिंक डालना: जिंक की कमी होने पर धान में ‘खैरा रोग’ लग जाता है, जिससे पत्तियां कत्थई रंग की हो जाती हैं और फुटाव पूरी तरह रुक जाता है। जिंक हमेशा शुरुआती 15 दिनों में ही दे देना चाहिए।
- खराब ड्रेनेज सिस्टम: अगर आपके खेत के किसी हिस्से में पानी हमेशा जमा रहता है और सड़ने लगता है, तो वहां के पौधे काले पड़कर मरने लगते हैं। जल निकासी का उचित प्रबंध रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. धान में कल्लों का फुटाव बढ़ाने के लिए सबसे सस्ती और बेस्ट दवा कौन सी है?
जवाब: इसके लिए कोई महंगी दवा लेने की जरूरत नहीं है। रोपाई के 20-25 दिन पर 1 किलो NPK 19:19:19 के साथ 100 ग्राम चीलेटेड जिंक का स्प्रे सबसे सस्ता और असरदार तरीका है।
Q2. धान की फसल में पाटा (Planking) कब लगाना चाहिए?
जवाब: धान की रोपाई के 20 से 30 दिन के बीच पाटा लगाना सबसे सही माना जाता है। इस समय पौधों में कल्ले निकलने की प्रक्रिया अपने चरम पर होती है।
Q3. क्या यूरिया के साथ जिंक सल्फेट को मिला सकते हैं?
जवाब: हाँ, आप यूरिया के साथ जिंक सल्फेट (21% या 33%) को बिल्कुल मिला सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि इसे DAP या किसी भी फास्फोरस वाली खाद के साथ कभी न मिलाएं।
Q4. खेत में पानी सुखाने से क्या धान की फसल खराब नहीं होगी?
जवाब: बिल्कुल नहीं। कल्ले निकलते समय (20-40 दिन) मिट्टी को हल्की हवा लगना जरूरी है। बस ध्यान रखें कि मिट्टी में चौड़ी दरारें न पड़ें, सिर्फ सतह का पानी सूखे।
Q5. धान में कल्ले निकलने की स्टेज कब खत्म हो जाती है?
जवाब: रोपाई के लगभग 42 से 45 दिनों के बाद नए कल्लों का निकलना बंद हो जाता है, क्योंकि इसके बाद पौधा अपनी गाभा (गभोट) अवस्था यानी बालियां बनाने की तैयारी में लग जाता है।
निचोड़ (Summary)
धान में कल्लों का अधिक फुटाव कोई जादू नहीं, बल्कि सही समय पर किए गए वैज्ञानिक प्रबंधन का नतीजा है। आपको बस समय पर रोपाई करनी है, संतुलित बेसल डोज देना है, 20 दिन पर यूरिया के साथ जाइम और सल्फर का कॉम्बिनेशन डालना है, और खेत में पानी का सही संतुलन बनाए रखना है। इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर आप अपनी धान की फसल से पिछले साल के मुकाबले 20 से 30 प्रतिशत तक ज्यादा पैदावार आसानी से ले सकते हैं।
अब आपकी बारी: इस बार आप अपनी धान की फसल में कौन सा तरीका आजमाने वाले हैं? अगर आपका कोई सवाल है या फसल में कोई समस्या आ रही है, तो नीचे कमेंट करके हमें जरूर बताएं। इस जानकारी को अपने अन्य किसान भाइयों के साथ शेयर करना न भूलें!












