पिछले एक सप्ताह से कई राज्यों में लगातार भारी बारिश हुई है। अब मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मानसून एक छोटा ब्रेक ले रहा है, जिससे कई इलाकों में सूखे (Dry Spell) की स्थिति बन सकती है। मौसम का यह अचानक बदलाव सोयाबीन की फसल के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
शुरुआती जलभराव और उसके बाद अचानक धूप निकलने से पौधों की जड़ों का विकास रुक जाता है। इसके अलावा, खेतों में खरपतवार और कीटों का हमला भी तेजी से बढ़ता है।
अगर आप सोच रहे हैं कि इस बदलते मौसम में सोयाबीन किसान क्या करें, तो 10 से 22 जुलाई का समय आपकी फसल के लिए सबसे निर्णायक है। आइए जानते हैं कि इस दौरान जुलाई में सोयाबीन की देखभाल कैसे करनी चाहिए ताकि आपकी पैदावार प्रभावित न हो।
भारी बारिश के तुरंत बाद खेत में करें ये काम
लगातार बारिश रुकने के बाद किसानों को सबसे पहले खेत की स्थिति का मुआयना करना चाहिए। इस समय आपकी छोटी सी लापरवाही फसल को पीला कर सकती है।
1. खेत से अतिरिक्त जल निकासी (Drainage)
सोयाबीन की फसल जलभराव के प्रति बेहद संवेदनशील होती है। अगर खेत में पानी 24 से 48 घंटे तक रुका रह जाए, तो जड़ों में हवा का संचार बंद हो जाता है।
- क्या करें: खेत के निचले हिस्से में ढलान की दिशा में तुरंत नालियां (Trenches) बनाएं। सुनिश्चित करें कि जड़ों के पास पानी बिल्कुल न रुके। अगर आपने फसल ‘ब्रॉड बेड फरो’ (BBF) या ‘रिज-फरो’ विधि से बोई है, तो नालियों की मिट्टी हटाकर पानी बाहर निकालें।
2. फफूंद जनित रोगों से बचाव
लगातार नमी और फिर अचानक धूप निकलने से कॉलर रॉट (Collar rot) और जड़ गलन जैसी फफूंद जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
- क्या करें: खेत में जल निकासी के बाद, मौसम साफ होने पर अनुशंसित फफूंदनाशक का स्प्रे करें। इससे जड़ों में सड़न पैदा करने वाले बैक्टीरिया खत्म हो जाएंगे।
10 से 22 जुलाई के बीच खरपतवार और पोषण प्रबंधन
बारिश रुकने के बाद खेतों में सोयाबीन से ज्यादा तेजी से खरपतवार (Weeds) उगते हैं। यह समय फसल को खरपतवार मुक्त करने और जरूरी पोषण देने का है।
1. निंदाई-गुड़ाई और डोरा चलाना
सोयाबीन की अच्छी पैदावार के लिए बुवाई के बाद कम से कम शुरुआती 45 दिनों तक खेत को खरपतवार से मुक्त रखना अनिवार्य है।
- कैसे करें: जैसे ही खेत की मिट्टी थोड़ी भुरभुरी (वाफसा स्थिति) हो जाए, तुरंत ट्रैक्टर या बैलों की मदद से डोरा/कोल्पा चलाएं। इससे न सिर्फ खरपतवार नष्ट होंगे, बल्कि मिट्टी में हवा का संचार बढ़ेगा जिससे जड़ों का विकास तेज होगा।
2. पीलापन दूर करने के लिए फोलियर स्प्रे
भारी बारिश के कारण मिट्टी के पोषक तत्व (विशेषकर नाइट्रोजन) पानी के साथ बह जाते हैं। इससे सोयाबीन के पौधे पीले पड़ने लगते हैं और उनकी ग्रोथ रुक जाती है।
- समाधान: फसल का पीलापन दूर करने के लिए 2% यूरिया या DAP (20 ग्राम प्रति लीटर पानी) का फोलियर स्प्रे करें। इसके साथ ही फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जिंक सल्फेट का भी छिड़काव किया जा सकता है।
आगामी सूखे (Dry Spell) से फसल को कैसे बचाएं?
लगातार बारिश के बाद आने वाला सूखा (Dry spell) मिट्टी की ऊपरी परत को कठोर बना देता है। इससे मिट्टी की नमी तेजी से वाष्पीकृत होकर उड़ जाती है।
- नमी संरक्षण (Moisture Conservation): खेत में डोरा या कल्टीवेटर चलाने से मिट्टी की ऊपरी परत टूट जाती है। इसे ‘डस्ट मल्चिंग’ (Dust Mulching) कहते हैं। यह वाष्पीकरण को रोककर मिट्टी के अंदर नमी को लंबे समय तक सुरक्षित रखता है।
- गंभीर सूखे की स्थिति में: अगर बारिश 15 दिन से ज्यादा रुक जाती है और फसल मुरझाने लगती है, तो कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर 3% काओलिन (Kaolin) का स्प्रे किया जा सकता है। यह पत्तियों से होने वाले पानी के नुकसान को रोकता है।
कीटों की निगरानी और तुरंत नियंत्रण
जुलाई के मध्य में जब मौसम में उमस और नमी दोनों होती है, तब सोयाबीन पर तना मक्खी (Stem fly) और गर्डल बीटल (चक्रभृंग) का हमला सबसे ज्यादा होता है।
- लक्षण पहचानें: अगर पौधे की ऊपरी पत्तियां सूखकर लटक रही हैं, तो यह तना मक्खी या गर्डल बीटल का शुरुआती लक्षण है।
- नियंत्रण: खेत की नियमित निगरानी करें। कीटों का प्रकोप दिखते ही अनुशंसित कीटनाशक (जैसे- क्लोरेंट्रानिलिप्रोल या थियामेथोक्सम) का सही मात्रा में 300-325 लीटर पानी के साथ घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: सोयाबीन के खेत में जलभराव हो जाए तो सबसे पहले क्या करें?
उत्तर: जलभराव होने पर बिना समय बर्बाद किए खेत के ढलान वाली दिशा में नालियां बनाकर पानी बाहर निकालें। सोयाबीन 24 घंटे से ज्यादा ठहरा हुआ पानी बर्दाश्त नहीं कर सकता, इससे जड़ें गलने लगती हैं।
Q2: भारी बारिश के बाद सोयाबीन की पत्तियां पीली क्यों पड़ रही हैं?
उत्तर: ज्यादा बारिश से मिट्टी का नाइट्रोजन पानी के साथ बह जाता है या जड़ों के पास हवा न पहुंचने से पौधे भोजन नहीं बना पाते। इसे ठीक करने के लिए 2% यूरिया या DAP का फोलियर स्प्रे (छिड़काव) करें।
Q3: बारिश रुकने के बाद डोरा या कोल्पा चलाना क्यों जरूरी है?
उत्तर: डोरा चलाने से खरपतवार खत्म होते हैं और मिट्टी की ऊपरी परत टूट जाती है। इससे जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है और भविष्य में होने वाले सूखे से बचाव के लिए मिट्टी की नमी सुरक्षित रहती है।
Q4: जुलाई के महीने में सोयाबीन में कौन से कीट का खतरा सबसे अधिक होता है?
उत्तर: इस समय मुख्य रूप से तना मक्खी (Stem fly) और गर्डल बीटल (चक्रभृंग) का खतरा रहता है। ये कीट तने को अंदर से खा जाते हैं जिससे पूरा पौधा सूख जाता है।
Q5: क्या 10-15 जुलाई के बीच रासायनिक खरपतवार नाशक का स्प्रे करना सुरक्षित है?
उत्तर: हाँ, अगर फसल 15-20 दिन की हो गई है और खेत में पर्याप्त नमी है, तो आप पोस्ट-इमर्जेंस (उगने के बाद वाले) खरपतवार नाशक का छिड़काव कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि पत्तियों पर मिट्टी या ओस न हो।












