लगातार भारी बारिश के दौरान या अचानक आई बाढ़ किसानों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन जाती है। जब खेत में कई दिनों तक पानी भरा रहता है, तो पौधों की जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इससे फसल पीली पड़ने लगती है और जड़ों में गलन शुरू हो जाती है।
विशेषकर यदि सोयाबीन बुवाई के बाद बारिश रुकने का नाम न ले, तो अगर सही समय पर कदम न उठाए जाएं, तो पूरी मेहनत और लागत बर्बाद हो सकती है। घबराने की जरूरत नहीं है। अगर आपके खेत में जलभराव हो गया है, तो तुरंत कुछ जरूरी उपाय करके आप अपनी फसल को काफी हद तक सुरक्षित कर सकते हैं। (फसल का नुकसान बहुत ज्यादा होने पर पीएम फसल बीमा योजना का लाभ लेना न भूलें)।
आइए जानते हैं वे कौन से अचूक तरीके हैं जो आपकी डूबती फसल को नई जिंदगी दे सकते हैं।
जलभराव से फसल को तुरंत बचाने के 10 उपाय
1. सबसे पहले जल निकासी की व्यवस्था करें
खेत से अतिरिक्त पानी को बाहर निकालना सबसे पहला और अहम कदम है। खेत के निचले हिस्सों में फावड़े या ट्रैक्टर की मदद से नालियां (Trenches) बनाएं।
पानी को पास के किसी नाले, नहर या खाली जमीन की तरफ मोड़ दें। जितनी जल्दी पानी खेत से बाहर जाएगा, जड़ों को उतनी जल्दी हवा मिलेगी।
2. पंप सेट (Water Pump) का इस्तेमाल करें
अगर खेत के चारो तरफ पानी भरा है और प्राकृतिक ढलान नहीं है, तो तुरंत डीजल या इलेक्ट्रिक पंप सेट का इंतजाम करें।
पंप की मदद से तेजी से पानी को खेत से बाहर फेंका जा सकता है। यह तरीका महंगी सब्जियों और बागवानी वाली फसलों के लिए बहुत असरदार है।
3. फफूंदनाशक (Fungicide) का छिड़काव करें
पानी भरे रहने से मिट्टी में फफूंद (Fungus) तेजी से पनपती है, जो जड़ गलन या जड़ सड़न रोग का कारण बनती है। पानी निकलने के तुरंत बाद एक अच्छे फफूंदनाशक का इस्तेमाल करें।
आप कार्बेंडाजिम (Carbendazim) या मैंकोजेब (Mancozeb) का घोल बनाकर पौधों की जड़ों के पास ड्रेंचिंग (Drenching) कर सकते हैं।
4. यूरिया का पर्णीय छिड़काव (Foliar Spray)
जलभराव के कारण पौधे मिट्टी से नाइट्रोजन नहीं ले पाते, जिससे पत्तियां पीली हो जाती हैं। जमीन में दानेदार यूरिया डालने से कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि जड़ें काम नहीं कर रही होती हैं।
ऐसे में 2% यूरिया के घोल का पत्तियों पर सीधा छिड़काव करें। इससे पौधों को तुरंत ताकत मिलेगी और उनका पीलापन दूर होगा।
5. पोटेशियम नाइट्रेट (13:0:45) का उपयोग
लंबे समय तक पानी में रहने से पौधे तनाव (Stress) में आ जाते हैं। पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पोटेशियम बहुत जरूरी है।
पानी सूखने के बाद एनपीके 13:0:45 (पोटेशियम नाइट्रेट) का स्प्रे करें। यह पौधों को झटके से उबारने में मदद करता है।
6. पत्तियों पर जमी मिट्टी की सफाई
अगर बाढ़ के पानी के साथ खेत में गाद (सिल्ट) या मिट्टी आ गई है, तो वह पौधों की पत्तियों पर जम जाती है। इससे पौधे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) नहीं कर पाते।
साफ पानी का तेज स्प्रे करके पत्तियों को धो दें। इससे पौधे फिर से अपना भोजन बनाना शुरू कर देंगे।
7. खेत में गुड़ाई (Hoeing) करें
जब खेत से पानी निकल जाए और मिट्टी में चलने लायक नमी (बतर) आ जाए, तो तुरंत खुरपी या कल्टीवेटर से हल्की गुड़ाई करें।
गुड़ाई करने से मिट्टी की ऊपरी परत टूट जाती है। इससे जमीन के अंदर सूरज की रोशनी और ऑक्सीजन पहुंचती है, जिससे जड़ों का विकास फिर से शुरू हो जाता है।
8. सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) की पूर्ति
लगातार पानी बहने से मिट्टी के ऊपरी सतह के जरूरी पोषक तत्व धुलकर बह जाते हैं। फसल को दोबारा हरा-भरा करने के लिए जिंक और आयरन की कमी को पूरा करने वाले तत्वों की जरूरत होती है।
कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर किसी अच्छे माइक्रोन्यूट्रिएंट मिक्सचर का स्प्रे अपनी फसल पर करें।
9. खरपतवार (Weeds) पर नियंत्रण
नमी पाकर खेत में खरपतवार बहुत तेजी से उगते हैं। ये खरपतवार मुख्य फसल के हिस्से का पोषण छीनने लगते हैं।
मजदूरों की मदद से या सुरक्षित खरपतवार नियंत्रण दवाओं का इस्तेमाल करके इन्हें तुरंत खेत से बाहर निकालें। जलभराव से कमजोर हुई फसल को खरपतवारों से बचाना बहुत जरूरी है।
10. कृषि विशेषज्ञों से तुरंत संपर्क करें
हर फसल और मिट्टी की प्रकृति अलग होती है। धान को पानी से कम नुकसान होता है, जबकि सोयाबीन, मक्का या सब्जियों की फसल जल्दी खराब हो जाती है।
अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या किसान कॉल सेंटर पर संपर्क करें। उन्हें अपनी फसल की वर्तमान स्थिति बताएं और सही दवाइयों की सटीक मात्रा जानें।
5 जरूरी FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. जलभराव के बाद फसल पीली क्यों पड़ने लगती है?
जब जड़ों के पास पानी भर जाता है, तो उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिलती। इस स्थिति में जड़ें मिट्टी से नाइट्रोजन सोखना बंद कर देती हैं, जिसके कारण पौधों में क्लोरोफिल की कमी हो जाती है और पत्तियां पीली पड़ जाती हैं।
Q2. खेत से पानी निकलने के कितने दिन बाद खाद डालनी चाहिए?
पानी निकलने के तुरंत बाद जमीन में सीधे कोई दानेदार खाद (जैसे यूरिया या डीएपी और एनपीके) नहीं डालनी चाहिए। जब मिट्टी भुरभुरी हो जाए और उसमें चलने लायक नमी (बतर) आ जाए, तभी खाद का इस्तेमाल करें। आपात स्थिति में पत्तियों पर स्प्रे (Foliar spray) करना बेहतर होता है।
Q3. जड़ गलन (Root rot) को रोकने के लिए कौन सी दवा अच्छी है?
जड़ गलन रोकने के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, कार्बेंडाजिम, या साफ (Saaf – Carbendazim + Mancozeb) जैसे फफूंदनाशकों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा कारगर माना जाता है।
Q4. क्या पानी में डूबी हुई सब्जियों की फसल को बचाया जा सकता है?
अगर पानी 24 से 48 घंटे के अंदर निकाल दिया जाए, तो सब्जियों को बचाया जा सकता है। तुरंत जल निकासी के बाद पौधों की जड़ों में फफूंदनाशक का छिड़काव और यूरिया का स्प्रे करना सबसे जरूरी है।
Q5. जलभराव से तनाव में आए पौधों के लिए कौन सा स्प्रे सबसे अच्छा है?
तनाव दूर करने के लिए एनपीके 13:0:45 (पोटेशियम नाइट्रेट) और सीवीड एक्सट्रैक्ट (Seaweed Extract) का स्प्रे बहुत फायदेमंद साबित होता है। यह पौधों की रुकी हुई ग्रोथ को तेजी से शुरू करता है।












