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मूंगफली की टॉप 10 किस्में 2026: कम लागत में बंपर पैदावार देने वाले सबसे बेस्ट बीज

क्या आप भी हर साल खेतों में मेहनत तो पूरी करते हैं, लेकिन जब मूंगफली की खुदाई का समय आता है, तो पैदावार उम्मीद से बहुत कम निकलती है? कभी दानों का साइज छोटा रह जाता है, तो कभी पौधों में फंगस और कीड़े पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं। एक किसान भाई होने के नाते आपका यह दर्द बिल्कुल जायज है, क्योंकि असली कमाई सिर्फ मेहनत से नहीं, बल्कि सही बीज चुनने से होती है।

अगर आप साल 2026 में अपनी खेती से दोगुना मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो आपको पारंपरिक बीजों को छोड़कर आधुनिक और एडवांस वैरायटी की तरफ बढ़ना होगा। मूंगफली के साथ-साथ आप अन्य खरीफ 2026 के लिए टॉप हाइब्रिड बीज का भी चयन कर सकते हैं। इस गाइड में हम मूंगफली की टॉप 10 किस्में 2026 के बारे में पूरी बारीकी से बात करेंगे। हम सिर्फ किताबी बातें नहीं करेंगे, बल्कि ग्राउंड रियलिटी, जमीन के प्रकार, पकने के समय और प्रति एकड़ सटीक पैदावार का पूरा कच्चा चिट्ठा आपके सामने रखेंगे।

इस लेख को अंत तक ध्यान से पढ़ें, क्योंकि सही किस्म का चुनाव ही इस साल आपकी किस्मत बदलने वाला है। चलिए, सीधे मुद्दे पर आते हैं और जानते हैं कि आपकी जमीन के लिए कौन सा बीज अमृत साबित होगा।

मूंगफली की खेती में सही बीज का महत्व क्यों बढ़ गया है?

आज के समय में मौसम का कोई भरोसा नहीं रह गया है। कभी जरूरत से ज्यादा बारिश हो जाती है, तो कभी सूखा पड़ जाता है। ऐसे अनिश्चित मौसम में अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए पीएम फसल बीमा योजना 2026 का लाभ जरूर उठाएं। साल 2026 में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, चाहे वह खाद हो, पानी हो या फिर मजदूरी।

अगर आपका बीज दमदार नहीं है, तो आपकी पूरी लागत डूब सकती है। आधुनिक रिसर्च से तैयार की गई नई किस्मों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता ज्यादा होती है। ये कम पानी में भी बेहतरीन रिजल्ट देती हैं और इनके दानों में तेल की मात्रा भी काफी अधिक होती है, जिससे मार्केट में इनके भाव सबसे ऊंचे मिलते हैं। मूंगफली की तरह ही तिलहनी फसलों में तिल भी एक बेहतरीन विकल्प है, जिसके लिए आप हमारी तिल की टॉप 10 किस्में 2026 गाइड पढ़ सकते हैं।

मूंगफली की टॉप 10 किस्में 2026: पूरी लिस्ट और उनकी खासियतें

कृषि वैज्ञानिकों और अनुभवी किसानों के फीडबैक के आधार पर हमने इस साल के लिए सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली 10 किस्मों की सूची तैयार की है। आइए, एक-एक करके इनकी पूरी जानकारी देखते हैं।

1. गिरनार 4 (Girnar 4)

यह किस्म इस समय भारतीय किसानों के बीच सबसे लोकप्रिय बनी हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और दानों की क्वालिटी है।

  • पकने का समय: यह फसल बोने के बाद 110 से 115 दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाती है।
  • पैदावार: प्रति एकड़ इससे लगभग 12 से 15 क्विंटल तक की पैदावार आराम से मिल जाती है।
  • खासियत: इसके दानों में ऑयल कंटेंट यानी तेल की मात्रा 53% तक होती है। इस वजह से व्यापारी इसे हाथों-हाथ अच्छे दामों पर खरीदते हैं। अपनी उपज को देश की किसी भी मंडी में सबसे ऊंचे दाम पर बेचने के लिए आप ई-नाम (e-NAM) पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

2. गिरनार 5 (Girnar 5)

गिरनार 4 की सफलता के बाद वैज्ञानिकों ने इसे और अधिक एडवांस बनाकर पेश किया है। यह भारी और मध्यम दोनों प्रकार की जमीनों के लिए बेस्ट है।

  • पकने का समय: इसे पूरी तरह तैयार होने में 115 से 120 दिन का समय लगता है।
  • पैदावार: इसकी औसत पैदावार 14 से 16 क्विंटल प्रति एकड़ तक रिकॉर्ड की गई है।
  • खासियत: गिरनार 5 के दाने बड़े और चमकदार होते हैं। इसमें फंगस जनित बीमारियां (जैसे टिक्का रोग) लगने का खतरा नाममात्र का होता है।

3. जे.एल. 24 (JL 24 – Phule Pragati)

अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां पानी की कमी है या बारिश जल्दी रुक जाती है, तो यह वैरायटी आपके लिए एक वरदान की तरह है। इसके अलावा आप कम पानी में होने वाली खरीफ फसलें भी आज़मा सकते हैं।

  • पकने का समय: यह बहुत ही कम समय यानी मात्र 90 से 95 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।
  • पैदावार: कम समय लेने के बावजूद यह 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ की अच्छी उपज दे देती है।
  • खासियत: यह एक झुमका (Bunch) प्रकार की किस्म है, जिसके पौधे सीधे खड़े रहते हैं। इसकी खुदाई करना बेहद आसान होता है और कम सिंचाई में भी यह किसानों को निराश नहीं करती।

मूंगफली की टॉप किस्मों का तुलनात्मक चार्ट (Quick Comparison)

आपकी आसानी के लिए हमने नीचे एक टेबल तैयार की है, जिससे आप अपनी जरूरत के हिसाब से सबसे बेस्ट वैरायटी को एक नजर में चुन सकते हैं:

किस्म का नामपकने की अवधि (दिन)औसत पैदावार (प्रति एकड़)तेल की मात्रा (%)सबसे उपयुक्त राज्य/क्षेत्र
गिरनार 4110 – 11512 – 15 क्विंटल~53%गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश
गिरनार 5115 – 12014 – 16 क्विंटल~52%महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश
जे.एल. 2490 – 9510 – 12 क्विंटल~50%कम वर्षा वाले क्षेत्र, पूरे भारत में
कादरी लेपाक्षी (K1812)120 – 12515 – 18 क्विंटल~51%आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु
जी.जे.जी. 22115 – 12013 – 15 क्विंटल~50%रेतीली और दोमट मिट्टी वाले क्षेत्र

4. कादरी लेपाक्षी (Kadiri Lepakshi – K 1812)

दक्षिण और मध्य भारत के किसानों के बीच इस किस्म ने धूम मचा रखी है। अगर आपके पास सिंचाई के अच्छे साधन हैं, तो यह आपको सबसे ज्यादा मुनाफा देगी।

  • पकने का समय: यह थोड़ा लंबा समय लेती है और लगभग 120 से 125 दिनों में तैयार होती है।
  • पैदावार: सही देखरेख मिलने पर यह 15 से 18 क्विंटल प्रति एकड़ तक की बंपर पैदावार देने का दम रखती है।
  • खासियत: इसके पौधे फैलने वाले होते हैं और मिट्टी के नीचे मूंगफली के गुच्छे बहुत घने बैठते हैं। इसके दानों का आकार काफी बड़ा होता है, जो एक्सपोर्ट क्वालिटी के लिए बेस्ट माना जाता है।

5. जी.जे.जी. 22 (GJG 22)

गुजरात कृषि यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित यह किस्म खास तौर पर उन किसानों के लिए है जो रेतीली दोमट मिट्टी में खेती करते हैं।

  • पकने का समय: यह फसल 115 से 118 दिनों में खुदाई के लिए रेडी हो जाती है।
  • पैदावार: इससे किसानों को 13 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ की उपज आसानी से मिल जाती है।
  • खासियत: इस किस्म की पत्तियां अंत तक हरी बनी रहती हैं, जिससे कटाई के बाद आपको पशुओं के लिए बेहतरीन और पौष्टिक सूखा चारा (चारा/भूसा) भी प्रचुर मात्रा में मिल जाता है।

6. टी.ए.जी. 24 (TAG 24)

यह एक बेहद भरोसेमंद और पुरानी होने के बावजूद हर साल टॉप परफॉर्मर रहने वाली वैरायटी है। नए दौर में भी इसकी मांग कम नहीं हुई है।

  • पकने का समय: यह मात्र 100 से 105 दिनों में पक जाती है।
  • पैदावार: इसकी औसत पैदावार 11 से 13 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
  • खासियत: इसके पौधे छोटे और गठीले होते हैं, जिससे तेज हवा या भारी बारिश में भी फसल खेतों में गिरती नहीं है। यह खरीफ और जायद (गर्मी) दोनों सीजन के लिए उपयुक्त है।

7. जी.जे.जी. 9 (GJG 9)

गर्मी के मौसम यानी जायद की खेती के लिए इस वैरायटी को एक्सपर्ट्स सबसे बेस्ट मानते हैं। उच्च तापमान को सहने की इसमें गजब की क्षमता होती है।

  • पकने का समय: यह लगभग 110 से 115 दिनों का समय लेती है।
  • पैदावार: गर्मी के दिनों में भी यह 12 से 14 क्विंटल प्रति एकड़ का शानदार रिजल्ट देती है।
  • खासियत: इसके दानों का रंग गहरा गुलाबी होता है और इसका छिलका काफी मजबूत होता है, जिससे भंडारण (Storage) के दौरान दाने खराब नहीं होते।

8. कादरी 6 (Kadiri 6)

यह आंध्र प्रदेश के शुष्क इलाकों के लिए रिसर्च करके बनाई गई थी, लेकिन अब पूरे भारत में इसके शानदार नतीजे देखने को मिल रहे हैं।

  • पकने का समय: इसे पकने में 105 से 110 दिन लगते हैं।
  • पैदावार: इसकी उपज 12 से 14 क्विंटल प्रति एकड़ के बीच रहती है।
  • खासियत: यह मिट्टी में मौजूद कई तरह के हानिकारक कीड़ों और जड़ गलन (Root Rot) जैसी खतरनाक बीमारियों के प्रति काफी प्रतिरोधी है।

9. टी.जी. 37 ए (TG 37A)

भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) द्वारा विकसित यह म्यूटेंट वैरायटी उत्तरी और पश्चिमी भारत के राज्यों में बहुत ज्यादा बोई जाती है।

  • पकने का समय: यह फसल 110 से 120 दिनों में पककर तैयार होती है।
  • पैदावार: इससे प्रति एकड़ 13 से 16 क्विंटल तक की बंपर पैदावार ली जा सकती है।
  • खासियत: इस वैरायटी की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके सभी दाने एक ही साइज के और एक समान रूप से पकते हैं, जिससे थ्रेशिंग के समय नुकसान न्यूनतम होता है।

10. एच.एन.जी. 10 (HNG 10)

राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों के लिए जहां मिट्टी में थोड़ी गर्माहट ज्यादा होती है, यह वैरायटी कमाल का परफॉर्म करती है।

  • पकने का समय: यह थोड़ा लेट वैरायटी है जो 125 से 130 दिनों में तैयार होती है।
  • पैदावार: देरी से पकने के कारण इसके दानों का वजन भारी होता है और पैदावार 14 से 17 क्विंटल प्रति एकड़ तक चली जाती है।
  • खासियत: इसके छिलके पतले होते हैं और दानों का प्रतिशत (Shelling Percentage) बहुत ज्यादा होता है। यानी छिलका कम और माल ज्यादा निकलता है।

सही किस्म चुनने के बाद इन 4 बातों का रखें खास ख्याल

सिर्फ बाजार से मूंगफली की टॉप 10 किस्मों 2026 में से कोई एक बेस्ट बीज खरीद लेना ही काफी नहीं है। अगर आप सच में रिकॉर्ड तोड़ पैदावार चाहते हैं, तो खेती के दौरान इन चार बुनियादी नियमों का पालन जरूर करें:

1. बीज उपचार (Seed Treatment) सबसे जरूरी है

बुवाई से पहले बीजों की गुणवत्ता जांचने के लिए बीज अंकुरण परीक्षण कैसे करें गाइड जरूर पढ़ें। खेतों में बीज डालने से पहले उन्हें फंगीसाइड (जैसे कार्बोक्सिन या मैनकोजेब) से उपचारित जरूर करें। इसके लिए आप बीज उपचार का सही तरीका अपनाएं। इसके बाद राइजोबियम कल्चर का इस्तेमाल करें। इससे शुरुआत में ही लगने वाले फंगस और जड़ सड़न की बीमारी से आपकी फसल पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगी।

2. सही समय पर बुआई

खरीफ सीजन के लिए जून के दूसरे हफ्ते से लेकर जुलाई के पहले हफ्ते तक का समय सबसे बेस्ट माना जाता है। वहीं, जायद (गर्मी) की फसल के लिए 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच बुआई पूरी कर लेनी चाहिए। सही समय पर बोई गई फसल को मौसम की मार कम झेलनी पड़ती है।

3. जिप्सम और खाद का प्रयोग भूलें नहीं

मूंगफली की फसल में कैल्शियम और सल्फर की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। जब फसल में सुइयां (Pegs) बन रही हों (बुआई के लगभग 40-45 दिन बाद), तब खेत में 100 से 150 किलोग्राम प्रति एकड़ जिप्सम का छिड़काव जरूर करें। इसके अलावा सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) का उपयोग भी बहुत फायदेमंद होता है। यदि आप अन्य खादों के बारे में असमंजस में हैं तो DAP बनाम NPK का चुनाव अपनी मिट्टी की जांच के आधार पर करें।

4. खरपतवार नियंत्रण और खुदाई का सही समय

शुरुआती 30 से 45 दिनों तक खेत को पूरी तरह खरपतवार मुक्त रखें। जब मूंगफली के छिलके के अंदर का हिस्सा हल्का काला या भूरा होने लगे, तब समझ जाएं कि फसल खुदाई के लिए तैयार है। बहुत ज्यादा देर करने से मूंगफली के दाने खेत में ही अंकुरित होने लगते हैं। खुदाई के लिए मशीनों की खरीद पर सरकार से छूट पाने के लिए कृषि मशीनीकरण योजना (SMAM) की जानकारी जरूर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. साल 2026 में सबसे ज्यादा पैदावार देने वाली मूंगफली की किस्म कौन सी है?

कादरी लेपाक्षी (K 1812) और गिरनार 5 इस समय सबसे ज्यादा पैदावार देने वाली टॉप किस्में हैं। सही प्रबंधन मिलने पर इनसे प्रति एकड़ 15 से 18 क्विंटल तक की उपज आसानी से ली जा सकती है।

2. कम पानी वाले या सूखे क्षेत्रों के लिए मूंगफली का कौन सा बीज सबसे अच्छा है?

कम पानी या सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए जे.एल. 24 (फुले प्रगति) और गिरनार 4 सबसे बेस्ट ऑप्शंस हैं। ये किस्में कम दिनों में पक जाती हैं और सूखे को आसानी से बर्दाश्त कर लेती हैं।

3. मूंगफली की फसल में जिप्सम कब और कितनी मात्रा में डालना चाहिए?

बुआई के लगभग 40 से 50 दिनों के बाद, जब पौधों में सुइयां (Pegging Stage) बन रही हों, तब प्रति एकड़ 100 से 150 किलोग्राम जिप्सम का इस्तेमाल करना चाहिए।

4. गर्मी (जायद) के मौसम में खेती के लिए कौन सी किस्म सबसे उपयुक्त है?

जायद या गर्मी के मौसम के लिए टी.ए.जी. 24 और जी.जे.जी. 9 जैसी किस्में सबसे बढ़िया परिणाम देती हैं, क्योंकि ये उच्च तापमान को आसानी से सहन कर सकती हैं।

अपनी जमीन के हिसाब से सही फैसला लें

मूंगफली की खेती में आपकी सफलता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आपने अपनी जमीन और पानी की उपलब्धता के हिसाब से सही बीज चुना है या नहीं। ऊपर बताई गई मूंगफली की टॉप 10 किस्मों 2026 में से किसी भी एक वैरायटी को आप अपनी सुविधा के अनुसार चुन सकते हैं। आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, वैज्ञानिक तरीके से खेती करें और इस साल अपनी लागत को कम करके मुनाफे को आसमान पर ले जाएं।

क्या आपने इस साल के लिए अपना पसंदीदा बीज चुन लिया है? या खेती से जुड़ा आपका कोई और सवाल है? नीचे कमेंट बॉक्स में हमसे अपनी बात साझा करें, हमें आपकी मदद करने में बेहद खुशी होगी। अपनी खेती को समृद्ध बनाएं!

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Team Smart Kisan

Maneesh Thakur Agriculture Expert & Consultant | Founder, Smart KisanManeesh Thakur कृषि क्षेत्र से जुड़े लेखक एवं कृषि सलाहकार हैं। वे फसल प्रबंधन, उन्नत बीज किस्मों, उर्वरक प्रबंधन, कृषि मशीनरी और सरकारी कृषि योजनाओं पर हिंदी में जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य किसानों तक सरल, व्यावहारिक और शोध-आधारित जानकारी पहुंचाना है ताकि किसान बेहतर निर्णय लेकर अपनी खेती को अधिक लाभदायक बना सकें। 📌 Founder: SmartKisan.co.in

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