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NRC 136 Soyabean Variety: कम दिनों में सबसे तगड़ा उत्पादन देने वाली सोयाबीन की नई किस्म, जानें पूरी हकीकत

क्या आपकी सोयाबीन की फसल भी पिछले कुछ सालों से लगातार हो रही बेमौसम भारी बारिश की वजह से खेतों में ही सड़ रही है? या फिर गर्डल बीटल और सफेद मक्खी जैसे जिद्दी कीड़े आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर देते हैं?

एक किसान होने के नाते मैं आपकी इस तकलीफ को बहुत अच्छे से समझ सकता हूँ। मौसम का कोई भरोसा नहीं रहा और पुरानी वैरायटियां अब बीमारियों को झेल नहीं पा रही हैं। इसी बड़ी समस्या का पक्का समाधान ढूंढते हुए भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (IISR), इंदौर के वैज्ञानिकों ने एक नई कामयाबी हासिल की है, जिसका नाम है NRC 136

अगर आप इस साल अपने खेत से रिकॉर्ड पैदावार लेना चाहते हैं और जोखिम को सबसे कम करना चाहते हैं, तो यह NRC 136 Soyabean Variety आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इस पूरे ब्लॉग में हम इस नई वैरायटी के एक-एक पहलू, इसकी खूबियों, बोने के सही तरीके और छिपे हुए नुकसानों के बारे में बिल्कुल देसी और आसान भाषा में बात करेंगे।

NRC 136 सोयाबीन वैरायटी क्या है? (एक सीधा परिचय)

सरल शब्दों में कहें तो NRC 136 सोयाबीन की एक बहुत ही आधुनिक और उन्नत किस्म है। इसे खास तौर पर भारत के उन इलाकों के लिए तैयार किया गया है जहाँ मानसून जल्दी विदा हो जाता है या फिर जहाँ किसानों को सोयाबीन काटने के तुरंत बाद रबी सीजन में आलू, मटर या अगेती गेहूं की बुआई करनी होती है।

यह एक कम से मध्यम अवधि में पकने वाली वैरायटी है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके पौधे बहुत ज्यादा लंबे नहीं होते, जिससे तेज हवा चलने पर भी फसल नीचे नहीं गिरती।

वैज्ञानिकों ने इस वैरायटी के जेनेटिक्स पर काफी काम किया है। इसके दानों में चमक शानदार होती है और इसका वजन भी आम सोयाबीन के मुकाबले ज्यादा बैठता है, जिसका सीधा फायदा आपको मंडी में तौल के समय मिलता है।

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NRC 136 सोयाबीन की सबसे बड़ी विशेषताएं

बाजार में वैसे तो दर्जनों वैरायटियां मौजूद हैं, लेकिन आखिर क्यों कृषि विशेषज्ञ इस साल इस किस्म को लगाने की सलाह दे रहे हैं? आइए इसकी कुछ बेहतरीन खूबियों पर नजर डालते हैं।

1. कम दिनों में पककर तैयार होना (Early Maturity)

यह वैरायटी मात्र 90 से 95 दिनों के भीतर पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यानी आपको अपनी जमीन खाली करने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सितंबर के आखिरी या अक्टूबर के शुरुआती हफ्ते तक आपका खेत अगली फसल के लिए बिल्कुल रेडी हो जाएगा।

2. पानी के प्रति जबरदस्त सहनशीलता

मध्य भारत में अक्सर देखा गया है कि अगस्त-सितंबर में या तो सूखा पड़ जाता है या फिर लगातार 10 दिनों तक भारी बारिश होती है। यह वैरायटी इन दोनों ही परिस्थितियों को झेलने का दम रखती है। इसकी जड़ें मिट्टी को अच्छे से पकड़कर रखती हैं और कम पानी में भी दानों का भराव सही तरीके से होता है।

3. पीला मोजेक वायरस (YMV) से परमानेंट मुक्ति

सोयाबीन के किसानों का सबसे बड़ा दुश्मन है पीला मोजेक रोग। एक बार यह खेत में आ जाए तो पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और फलियां आधी भी नहीं बनतीं। NRC 136 में इस वायरस के खिलाफ सबसे तगड़ी प्रतिरोधक क्षमता पाई गई है। इसे लगाने के बाद आपको महंगे एंटी-वायरल स्प्रे पर फालतू पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

4. फलियां चटकने की समस्या से राहत (Anti-Shattering)

JS 9560 जैसी पुरानी किस्मों के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि अगर कटाई में दो दिन की भी देरी हो जाए, तो फलियां खेत में ही चटककर बिखर जाती थीं। इसके साथ ऐसा नहीं है। पकने के बाद भी इसके दाने फलियों के अंदर सुरक्षित बंद रहते हैं, जिससे कटाई के दौरान होने वाला नुकसान लगभग जीरो हो जाता है।

NRC 136 बनाम अन्य प्रसिद्ध किस्में: कौन है असली किंग?

अपनी मेहनत की कमाई का बीज खरीदने से पहले आपको दूध का दूध और पानी का पानी कर लेना चाहिए। आइए देखते हैं कि यह नई वैरायटी हमारी पुरानी और भरोसेमंद किस्मों के सामने कहाँ ठहरती है।

मुख्य बिंदुNRC 136JS 20-34NRC 86
पकने का कुल समय90 – 95 दिन88 – 92 दिन85 – 90 दिन
औसत पैदावार (प्रति एकड़)10 – 13 क्विंटल8 – 10 क्विंटल10 – 12 क्विंटल
पीला मोजेक के प्रति रेजिस्टेंससबसे घातक (अत्यधिक)मध्यमबहुत अच्छा
फली का चटकना (Shattering)बिल्कुल नहीं (10 दिन सुरक्षित)सामान्य खतराबहुत कम
तेल की कुल मात्रालगभग 21%19.5%20.5%
तना छेदक (Stem Fly) से बचावबहुत अच्छासामान्यमध्यम

इस चार्ट को देखकर आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि यह वैरायटी कम दिनों में पकने के साथ-साथ पैदावार के मामले में भी बहुत आगे है।

प्रति एकड़ पैदावार और कमाई का पूरा गणित

खेती के बिजनेस में असली पैमाना तो यही है कि घर में कितना पैसा आया। अगर आप सही तरीके से इस वैरायटी को संभाल लेते हैं, तो इसकी औसत पैदावार 10 से 13 क्विंटल प्रति एकड़ तक बड़े आराम से निकल जाती है।

कुछ प्रगतिशील किसान भाइयों ने इसे ड्रिप इरिगेशन और बेड सिस्टम (Bed System) पर लगाकर 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक का आंकड़ा भी छुआ है।

मुनाफे का सीधा हिसाब-किताब

आइए एक मोटे अनुमान से समझते हैं कि एक एकड़ में आपको कितनी बचत होगी:

  • कुल पैदावार (औसत): 11 क्विंटल प्रति एकड़
  • बाजार भाव (अनुमानित): ₹4,800 प्रति क्विंटल
  • कुल कमाई: 11 × 4,800 = ₹52,800
  • खेती की कुल लागत (बीज, जुताई, खाद, दवाई): ₹15,000
  • शुद्ध मुनाफा: 52,800 – 15,000 = ₹37,800 प्रति एकड़

मात्र 3 महीने की इस फसल से करीब 38 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाना किसी भी लिहाज से एक घाटे का सौदा नहीं है।

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बुआई का सही और वैज्ञानिक तरीका (How-to Guide)

बीज कितना भी अच्छा हो, अगर उसे सही ढंग से जमीन में नहीं डाला गया तो उम्मीद के मुताबिक रिजल्ट नहीं मिलेगा। चलिए जानते हैं बुआई के वो 4 जरूरी स्टेप्स जो आपको फॉलो करने ही चाहिए।

1. खेत को तैयार करना

सोयाबीन के लिए सबसे जरूरी है कि खेत में पानी जमा न हो। इसके लिए कल्टीवेटर से दो बार आड़ी-तिरछी जुताई करें और रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरी बना लें। अगर संभव हो तो इस बार बेड मेकर (BBF विधि) से बेड बनाकर बुआई करें। इससे भारी बारिश में भी पौधे सुरक्षित रहते हैं।

2. सही बीज दर (Seed Quantity)

इस वैरायटी के दाने थोड़े गठीले और मध्यम आकार के होते हैं। इसके लिए आपको 38 से 42 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज की जरूरत पड़ेगी। अगर आप सीड ड्रिल से बो रहे हैं, तो मशीन की सेटिंग पहले ही चेक कर लें ताकि बीज बहुत घना न गिरे।

3. बीज उपचार (Seed Treatment) – सबसे कीमती स्टेप

यह वो काम है जिसे 80% किसान आलस में छोड़ देते हैं और बाद में पछताते हैं। बुआई से 2 घंटे पहले बीज का उपचार जरूर करें:

  • फंगीसाइड: सबसे पहले थिरम + कार्बेन्डाजिम (3 ग्राम प्रति किलो बीज) या पेनफ्लूफेन + ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन (एवरगोल प्राइम) से बीज को सानें।
  • इन्सेक्टिसाइड: इसके बाद तना छेदक और रस चूसने वाले कीड़ों से बचाने के लिए थियामेथोक्सम 30% FS का इस्तेमाल करें।
  • बायो-कल्चर: सबसे आखिरी में राइजोबियम कल्चर मिलाकर बीज को छांव में सुखा लें।

4. कतारों के बीच की दूरी

पंक्ति से पंक्ति (Row to Row) की दूरी 15 से 16 इंच रखें और पौधे से पौधे की दूरी लगभग 3 से 4 इंच होनी चाहिए। बीज को जमीन में 3 सेमी से ज्यादा गहरा न डालें, वरना अंकुरण (Germination) कमजोर हो सकता है।

खाद का सही संतुलन (Best Fertilizer Schedule)

सोयाबीन हवा से खुद नाइट्रोजन सोखने की क्षमता रखती है, इसलिए इसे नाइट्रोजन की बहुत कम जरूरत होती है। इसे सबसे ज्यादा जरूरत होती है फास्फोरस और सल्फर की।

बुआई के वक्त नीचे दिया गया कॉम्बिनेशन सबसे बेस्ट माना जाता है:

सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) -> 3 बोरी (150 किलो)
+
म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP)  -> 20 किलोग्राम
+
यूरिया                 -> 15 किलोग्राम

अगर आप सिंगल सुपर फास्फेट की जगह डीएपी (DAP) डाल रहे हैं, तो याद से 10 किलो प्रति एकड़ बेंटोनाइट सल्फर अलग से जरूर मिलाएं। सल्फर के बिना सोयाबीन के दानों में तेल की मात्रा नहीं बढ़ेगी और मंडियों में आपको उसकी अच्छी चमक नहीं मिलेगी।

खरपतवार और कीड़ों से फसल को कैसे बचाएं?

फसल बोने के पहले 30 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान अगर खेत में कचरा उग गया, तो वह आपकी फसल का सारा पोषण खुद खा जाएगा।

खरपतवार का आसान खात्मा

  • उगने से पहले (Pre-Emergence): बुआई के तुरंत बाद और 48 घंटे के अंदर डाइक्लोसुलम 84% WDG (स्ट्रॉन्गआर्म) या पेंडिमेथालिन का छिड़काव करें। इससे कम से कम 25 दिनों तक खेत में कोई कचरा नहीं उगेगा।
  • खड़ी फसल में (Post-Emergence): अगर बाद में चौड़ी पत्ती या संकरी पत्ती का कचरा दिखता है, तो बुआई के 20 दिन बाद इमाज़ेथापायर 10% SL या शॉक्ड (Quizalofop-p-ethyl) का छिड़काव करें।

कीट नियंत्रण (Insect Management)

इस किस्म में तना मक्खी (Stem Fly) और गर्डल बीटल का हमला बहुत कम देखा गया है। फिर भी, अगर फसल में पत्ती खाने वाली इल्लियों का प्रकोप दिखे, तो तुरंत एमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (80 ग्राम/एकड़) या क्लोरांट्रानिलिप्रोल (कोराजन – 60 एमएल/एकड़) का स्प्रे 200 लीटर पानी में मिलाकर करें।

इस वैरायटी को लगाते समय क्या सावधानियां रखें? (एक जरूरी सलाह)

कोई भी चीज परफेक्ट नहीं होती, इसलिए इस वैरायटी की कुछ सीमाएं भी हैं जो आपको पता होनी चाहिए:

  • ज्यादा यूरिया से नुकसान: कुछ किसान भाइयों को लगता है कि यूरिया डालने से फसल हरी-भरी होगी। लेकिन इस वैरायटी में ज्यादा यूरिया डालने से इसकी लंबाई जरूरत से ज्यादा बढ़ जाएगी और फलियां बहुत कम लगेंगी।
  • घर का पुराना बीज: अगर आप इस वैरायटी को लगा रहे हैं, तो कोशिश करें कि बीज प्रामाणिक (Certified) संस्था से ही खरीदें। घर के पुराने अन-ट्रीटेड बीज से वह रिजल्ट नहीं मिलेगा जो मिलना चाहिए।
  • जलभराव वाले गड्ढे: अगर आपके खेत के किसी हिस्से में हमेशा पानी भरा रहता है, तो वहाँ बुआई करने से बचें या फिर पानी निकालने का रास्ता बनाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. NRC 136 सोयाबीन की वैरायटी को पकने में कितना समय लगता है?

यह किस्म मात्र 90 से 95 दिनों में पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है, जिससे रबी फसलों की अगेती बुआई के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।

Q2. क्या NRC 136 में पीला मोजेक रोग आता है?

नहीं, इस वैरायटी को जेनेटिकली इस तरह तैयार किया गया है कि यह पीला मोजेक वायरस (Yellow Mosaic Virus) के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी है।

Q3. इस किस्म से अधिकतम कितनी पैदावार ली जा सकती है?

इस वैरायटी की औसत पैदावार 10 से 13 क्विंटल प्रति एकड़ है, लेकिन बेहतर कृषि प्रबंधन से इसे 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक बढ़ाया जा सकता है।

Q4. क्या इस वैरायटी की कटाई मशीन (हार्वेस्टर) से की जा सकती है?

हाँ, इसका तना सीधा और मजबूत होता है तथा फलियां जमीन से थोड़ी ऊपर लगती हैं, इसलिए कंबाइन हार्वेस्टर से इसकी कटाई आसानी से की जा सकती है।

Q5. बुआई के समय कौन सी खाद देना सबसे ज्यादा फायदेमंद है?

बुआई के समय सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) के साथ थोड़ी मात्रा में पोटाश और यूरिया देना सबसे उत्तम रहता है क्योंकि इससे फसल को जरूरी सल्फर मिल जाता है।

स्मार्ट खेती अपनाएं, मुनाफा बढ़ाएं

आज के दौर में वही किसान कामयाब है जो समय के साथ अपनी तकनीकों और बीजों को बदलता है। NRC 136 Soyabean Variety उन्हीं आधुनिक तकनीकों का एक बेहतरीन नतीजा है जो आपको कम समय, कम रिस्क और न्यूनतम लागत में सबसे शानदार मुनाफा देने का दम रखती है।

अगर आप भी इस बार अपनी सोयाबीन की खेती को घाटे से बचाकर एक सुरक्षित और तगड़ी कमाई का जरिया बनाना चाहते हैं, तो बिना देर किए इस वैरायटी के प्रामाणिक बीजों की व्यवस्था करें और ऊपर बताए गए वैज्ञानिक तरीके से इसकी बुआई करें।

क्या आपने इस वैरायटी के बारे में पहले सुना था या आप इस बार इसे अपने खेत में लगाने वाले हैं? नीचे कमेंट करके मुझे जरूर बताएं। इस जानकारी को अपने बाकी किसान दोस्तों के साथ व्हाट्सएप पर शेयर करना बिल्कुल न भूलें।

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