Smart Kisan

सोयाबीन में 10–15 दिन बाद खरपतवार नियंत्रण: सही समय और असरदार दवाएं

सोयाबीन की खेती में शुरुआती 30 दिन सबसे संवेदनशील माने जाते हैं। अगर इस दौरान खेतों में खरपतवार हावी हो जाए, तो फसल की पैदावार में 40 से 50 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है। बुवाई के 10 से 15 दिन बाद का समय खरपतवार को जड़ से खत्म करने के लिए सबसे सही और सटीक समय होता है।

10 से 15 दिन का समय ही क्यों चुनें?

इस समय खेत में मौजूद अधिकतर खरपतवार अपनी 2 से 4 पत्ती की शुरुआती अवस्था में होते हैं। छोटी अवस्था में इनका तंत्र कमजोर होता है, जिससे दवा का असर तेजी से होता है।

साथ ही, इस समय सोयाबीन की फसल भी छोटी होती है। इसके कारण स्प्रे की गई दवा सीधे खरपतवार की पत्तियों तक पहुंचती है और बेहतरीन परिणाम मिलते हैं।

Join Smart Kisan Community

खेतों में पनपने वाले प्रमुख खरपतवार

दवा का चुनाव करने से पहले यह जानना जरूरी है कि आपके खेत में किस तरह का कचरा है। सोयाबीन की फसल में मुख्य रूप से दो तरह के खरपतवार नुकसान पहुंचाते हैं:

  • चौड़ी पत्ती वाले: बोखना, जंगली चौलाई, लहसुआ, गाजर घास और सफेद मुर्ग।
  • सकरी पत्ती वाले: सांवा, दूब, मकड़ा, कंजरू और चिनियारी।

सबसे असरदार खरपतवार नाशक दवाएं

सही टेक्निकल (रसायन) का चुनाव ही 100% परिणाम तय करता है। खरपतवार की स्थिति के अनुसार ये टेक्निकल सबसे ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं:

  • इमाजेथापायर 10% SL (Imazethapyr 10% SL): यह चौड़ी और सकरी दोनों तरह की पत्तियों वाले कचरे पर समान रूप से काम करता है। इसे 400 ml प्रति एकड़ की दर से स्प्रे किया जाता है।
  • क्विजालोफोप इथाइल (Quizalofop ethyl 5% EC): अगर खेत में केवल सकरी पत्ती (जैसे सांवा या मकड़ा) का भारी प्रकोप है, तो यह रसायन सबसे तेज असर दिखाता है।
  • प्रोपाक्विजाफोप + इमाजेथापायर (Propaquizafop + Imazethapyr): यह एक प्री-मिक्स्ड कॉम्बिनेशन है। अगर खेत में मिश्रित और जिद्दी खरपतवार हैं, तो यह उन्हें आसानी से नष्ट कर देता है।

दवा छिड़काव के समय ध्यान रखने योग्य 4 बातें

शानदार परिणाम के लिए दवा का छिड़काव करते समय इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है। छोटी सी गलती पूरी फसल को झटका दे सकती है।

  1. खेत में नमी: छिड़काव के समय खेत में पर्याप्त नमी होना बहुत जरूरी है। सूखे खेत में खरपतवार नाशक दवाएं ठीक से काम नहीं करती हैं।
  2. सही नोजल का चुनाव: हमेशा फ्लैट फैन नोजल (Flat Fan Nozzle) या कट नोजल का ही उपयोग करें। यह दवा को पत्तों पर एक समान रूप से फैलाता है।
  3. पानी की सही मात्रा: एक एकड़ खेत में कम से कम 150 से 200 लीटर साफ पानी का इस्तेमाल जरूर करें। कम पानी लेने से रिजल्ट खराब हो सकते हैं।
  4. सिलिकॉन चिपको (Sticker): बारिश के मौसम में दवा के साथ एक उच्च गुणवत्ता वाला सिलिकॉन स्टीकर जरूर मिलाएं ताकि दवा पत्तों पर चिपक सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. क्या 15 दिन बाद खरपतवार नाशक स्प्रे करने से सोयाबीन की फसल को झटका लगता है?

हां, कुछ दवाओं के इस्तेमाल से सोयाबीन के पत्तों पर हल्का पीलापन आ सकता है। यह एकदम सामान्य है और फसल 4 से 5 दिनों में खुद ही रिकवर होकर वापस स्वस्थ हो जाती है।

2. छिड़काव के कितनी देर बाद बारिश होने पर दवा काम करेगी?

अगर आपने दवा के घोल में अच्छी क्वालिटी का सिलिकॉन स्टीकर मिलाया है, तो छिड़काव के 2 से 3 घंटे बाद बारिश होने पर भी दवा का पूरा असर मिलेगा।

3. क्या हम कीटनाशक (Insecticide) और खरपतवार नाशक (Herbicide) को एक साथ मिलाकर स्प्रे कर सकते हैं?

नहीं, ऐसा करने से दवा का घोल फट सकता है और दोनों का असर खत्म हो सकता है। खरपतवार नाशक और कीटनाशक के स्प्रे के बीच कम से कम 3 से 4 दिन का अंतर जरूर रखें।

4. अगर खेत में नमी नहीं है तो क्या स्प्रे करना चाहिए?

बिल्कुल नहीं। बिना नमी के खरपतवार के रोमछिद्र बंद रहते हैं और वे दवा को नहीं सोखते। ऐसी स्थिति में पहले सिंचाई करें या बारिश का इंतजार करें, उसके बाद ही स्प्रे करें।

Join Smart Kisan Community

follow:
Picture of Devendra Singh Thakur

Devendra Singh Thakur

Devendra Singh Thakur किसान, कृषि विषयों के लेखक एवं संस्थापक — Smart KisanDevendra Singh Thakur एक किसान, कृषि विषयों के लेखक और Smart Kisan के संस्थापक हैं। वे फसल प्रबंधन, बीज किस्मों, उर्वरक एवं सुरक्षित कीट-रोग प्रबंधन, कृषि मशीनरी और सरकारी कृषि योजनाओं से जुड़ी उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में साझा करते हैं। लेख तैयार करते समय आधिकारिक कृषि संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, उत्पाद के स्वीकृत लेबल और सरकारी पोर्टलों को प्राथमिकता दी जाती है।

Related Posts

dhan-ka-beej-upchar-kaise-kare

धान का बीज उपचार कैसे करें: बेहतर पैदावार और नर्सरी को बीमारियों से बचाने की पूरी गाइड

क्या आपकी धान की नर्सरी (पौधशाला) में भी पौधे अचानक पीले पड़कर सूख जाते हैं? या फिर खेत में रोपाई

बारिश के बाद पपीते के तने के आधार पर फुट रॉट का काला सड़ाव देखते भारतीय किसान

पपीता में फुट रॉट: बारिश के बाद जमीन के पास तना सड़ने और पौधा गिरने की पहचान

बारिश के बाद पपीते के तने में जमीन के पास पानी-भीगा भूरा-काला सड़ाव दिखे तो फुट रॉट की सही पहचान, जल निकास, scouting और सुरक्षित प्रबंधन जानें।

dhan-ka-beej-upchar-kaise-kare

धान का बीज उपचार कैसे करें: बेहतर पैदावार और नर्सरी को बीमारियों से बचाने की पूरी गाइड

क्या आपकी धान की नर्सरी (पौधशाला) में भी पौधे अचानक पीले पड़कर सूख जाते हैं? या फिर खेत में रोपाई

बारिश के बाद पपीते के तने के आधार पर फुट रॉट का काला सड़ाव देखते भारतीय किसान

पपीता में फुट रॉट: बारिश के बाद जमीन के पास तना सड़ने और पौधा गिरने की पहचान

बारिश के बाद पपीते के तने में जमीन के पास पानी-भीगा भूरा-काला सड़ाव दिखे तो फुट रॉट की सही पहचान, जल निकास, scouting और सुरक्षित प्रबंधन जानें।